CG: गरियाबंद पुलिस का हरियाली को सलाम: “एक पौधा माँ के नाम” अभियान में लगाए 2000 से अधिक फलदार-छायादार पौधे
गरियाबंद (गंगा प्रकाश)। एक पौधा माँ के नाम विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जब पूरा देश पर्यावरण की चिंता में डूबा रहा, तब गरियाबंद पुलिस ने एक अनूठी मिसाल पेश की। “एक पौधा माँ के नाम”एक पौधा माँ के नाम अभियान के तहत जिले के समस्त थानों, चौकियों एवं पुलिस लाइन परिसर में 2000 से अधिक फलदार एवं छायादार पौधों का रोपण किया गया। यह सिर्फ एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक भावनात्मक एवं सामाजिक संकल्प था — माँ के प्रति श्रद्धा और धरती माँ के प्रति कर्तव्य का सजीव उदाहरण।

इस पूरे अभियान का नेतृत्व गरियाबंद के पुलिस अधीक्षक निखिल राखेचा ने किया। उनके दिशा-निर्देश एवं मार्गदर्शन में जिले के सभी थाना प्रभारियों, उपनिरीक्षकों, आरक्षकों और कर्मचारियों ने अपने नाम के साथ-साथ अपने माता-पिता एवं परिवारजनों के नाम पर भी पौधे लगाकर, उन्हें पालने-पोसने का संकल्प लिया।
अभियान का भावनात्मक पक्ष: माँ के नाम पौधा
“एक पौधा माँ के नाम” — यह नाम मात्र से ही एक भावनात्मक जुड़ाव पैदा करता है। गरियाबंद पुलिस ने इसे एक सरकारी जिम्मेदारी से आगे बढ़कर निजी प्रतिबद्धता में तब्दील कर दिया। हर पुलिसकर्मी ने इसे व्यक्तिगत अभियान माना और पौधे को अपनी माँ के स्नेह का प्रतीक मानकर लगाया। कई जगहों पर अधिकारियों ने पौधे लगाते हुए अपनी माँ की तस्वीरों के साथ फोटो भी खिंचवाईं। कुछ ने यह भी कहा कि माँ की ममता की तरह यह पौधे भी जीवन देते हैं, छांव देते हैं और सुकून देते हैं।
पर्यावरण संकट की पृष्ठभूमि
आज जब जलवायु परिवर्तन, बढ़ता तापमान, वनों की कटाई और प्रदूषण मानवता के अस्तित्व के लिए चुनौती बन चुके हैं, ऐसे में इस तरह का सामूहिक वृक्षारोपण न केवल प्रेरणादायक है बल्कि आने वाली पीढ़ियों को एक हरित संदेश भी देता है। गरियाबंद पुलिस ने यह दिखा दिया कि वर्दीधारी सिर्फ कानून की रक्षा ही नहीं करते, वे प्रकृति के प्रहरी भी हो सकते हैं।
पुलिस अधीक्षक निखिल राखेचा ने कहा,
“हमारी जिम्मेदारी सिर्फ अपराध नियंत्रण तक सीमित नहीं है। पर्यावरण की रक्षा करना भी हमारा नैतिक दायित्व है। यदि आज हमने हरित संसाधनों की सुरक्षा नहीं की, तो कल की पीढ़ी हमें माफ नहीं करेगी। इसीलिए हमने तय किया है कि हर वर्ष इस अभियान को और विस्तार देंगे।”
विभागीय समन्वय बना उदाहरण
इस अभियान में वन विभाग एवं उद्यानिकी विभाग का भी विशेष सहयोग रहा। उन्होंने आवश्यक पौधे उपलब्ध कराए और पौधों की देखभाल के लिए तकनीकी मार्गदर्शन भी प्रदान किया। पुलिस विभाग और वन विभाग के इस सामंजस्यपूर्ण सहयोग ने यह भी दर्शाया कि जब विभागीय सीमाएं टूटती हैं, तब सामूहिक प्रयास से बड़ा बदलाव संभव होता है।
आमजन को किया गया प्रेरित
इस वृक्षारोपण अभियान के माध्यम से गरियाबंद पुलिस ने आम नागरिकों से भी अपील की —
“एक स्वस्थ्य, स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण के लिए हर व्यक्ति एक पौधा अवश्य लगाए और उसकी देखरेख करे। अपने बच्चों के नाम, माता-पिता के नाम, किसी प्रियजन की स्मृति में पौधा लगाकर पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाएं।”
कई स्थानों पर पुलिसकर्मियों ने नागरिकों को भी पौधे वितरित किए और स्वयं उनके साथ मिलकर वृक्षारोपण किया। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में भी जागरूकता का संचार हुआ।
अभियान के दृश्य रहे बेहद प्रेरणादायक
सोशल मीडिया पर “एक पौधा माँ के नाम” अभियान के दृश्य वायरल हो रहे हैं। वर्दीधारी जवानों की मुस्कान, मिट्टी से सने हाथ, पौधों को थामे हुए दृढ़ संकल्पित चेहरों की तस्वीरें लोगों के दिलों को छू रही हैं। कई लोगों ने यह भी लिखा कि “यह तस्वीरें सिर्फ हरियाली नहीं, उम्मीद का चेहरा हैं।”
निष्कर्ष
गरियाबंद पुलिस का यह अभियान सिर्फ एक दिन का पर्यावरण दिवस आयोजन नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक सोच का परिचायक है। यह बताता है कि जब दिल से पहल हो, तो बदलाव सिर्फ मुमकिन नहीं — सुनिश्चित होता है। अब यह आवश्यक है कि जिले के नागरिक भी इस पहल को अपनी जिम्मेदारी समझें और “एक पौधा माँ के नाम” को हर घर, हर गली, हर खेत तक पहुंचाएं।