दो प्रतिशत डीए को बताया छल, हज़ारों कर्मचारी बरसात में उतरे सड़कों पर — तीसरे चरण में अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी
गरियाबंद (गंगा प्रकाश)। विधानसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की गारंटी लागू करने और 11 सूत्रीय मांगों को लेकरछत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन ने गरियाबंद जिला मुख्यालय में जबरदस्त शक्ति-प्रदर्शन किया। लगातार हो रही बारिश के बावजूद कर्मचारियों और अधिकारियों का जोश देखते ही बन रहा था। रावणभाठा मैदान से कलेक्टर कार्यालय तक नारेबाजी और रैली ने माहौल गरमा दिया।
हड़ताल में शामिल भीड़ इतनी विशाल रही कि पंडाल छोटा पड़ गया और सैकड़ों कर्मचारियों को बाहर ही खड़े रहकर आंदोलन में अपनी हिस्सेदारी निभानी पड़ी। आंदोलन की गूंज जिला मुख्यालय की सड़कों से लेकर प्रशासनिक गलियारों तक सुनाई दी।

आधा-अधूरा डीए, छलावा करार
गौरतलब है कि आंदोलन की रूपरेखा जारी होते ही सरकार ने कैबिनेट की बैठक में 2 प्रतिशत महंगाई भत्ता देने की घोषणा तो की, लेकिन उसका आदेश अब तक जारी नहीं किया गया है। साथ ही देय तिथि और लंबित एरियर्स को लेकर कोई स्पष्टता नहीं है। फेडरेशन ने इस आधे-अधूरे निर्णय को छलावा बताते हुए कड़ा विरोध जताया।
फेडरेशन के संरक्षक प्रदीप वर्मा ने कहा — “हमारी मांग केंद्र के समान देय तिथि से डीए देने की है। सरकार ने केवल 2 प्रतिशत डीए का जुमला उछाला है, लेकिन यह कर्मचारियों के साथ धोखा है। वादा खिलाफी की यही राजनीति हमें सड़कों पर उतरने को मजबूर कर रही है।”
11 सूत्रीय मांगों पर अड़े कर्मचारी
कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन ने मोदी की गारंटी के तहत विधानसभा चुनाव पूर्व किए गए वादों की याद दिलाई और 11 सूत्रीय मांगों को एक स्वर में रखा। प्रमुख मांगों में शामिल हैं —
- केंद्र के समान देय तिथि से महंगाई भत्ता लागू करना
- लंबित डीए का एरियर जीपीएफ खातों में समायोजित करना
- सेवा अवधि में चार स्तरीय वेतनमान देना
- लंबित पदोन्नतियां व वेतन विसंगतियां दूर करना
- संविदा/एनएचएम कर्मचारियों का नियमितीकरण
फेडरेशन ने साफ कहा कि यदि शासन ने जल्द ही इन पर सकारात्मक पहल नहीं की, तो आंदोलन चरणबद्ध रूप से तेज़ किया जाएगा।
पहले से ही हड़ताल पर हैं कई विभाग
इस बीच, छग राजस्व पटवारी संघ, पंचायत सचिव संघ और एनएचएम कर्मचारी पहले से ही अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं। संसाधन भत्ता, पदोन्नति, नियमितीकरण और 27 प्रतिशत लंबित वेतन सहित तमाम मुद्दों को लेकर ये संगठन लगातार शासन के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। इन संगठनों ने भी फेडरेशन की हड़ताल में भागीदारी कर आंदोलन को और ताकत दी।
प्रशासन तक पहुँची गूंज
धरना-प्रदर्शन के बाद फेडरेशन से जुड़े संगठनों ने रैली निकालकर कलेक्टर कार्यालय पहुँचे और मुख्यमंत्री व मुख्य सचिव के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांगों पर शीघ्र निर्णय की चेतावनी देते हुए साफ कहा गया कि अब कर्मचारी वर्ग किसी भी तरह के बहकावे में नहीं आएगा।
तीसरे चरण में अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी
फेडरेशन ने साफ कहा कि यदि सरकार ने अब भी वादों को अमलीजामा नहीं पहनाया, तो तीसरे चरण में समस्त विभागों के कर्मचारी-अधिकारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे। इससे शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पूरी तरह ठप हो सकती है।
बड़ी संख्या में शामिल रहे कर्मचारी-अधिकारी
धरना-प्रदर्शन में संरक्षक प्रदीप वर्मा, महासचिव बसंत त्रिवेदी, बसंत मिश्रा, सुदामा ठाकुर, मनोज खरे, मुकेश साहू, आर.एन. शर्मा, सुरेखा तिवारी, भगवान चंद्राकर, गुलशन यदु, नमिता भगत, प्रवीण साहू, डॉ. लक्ष्मीकांत जांगड़े, संजय मिश्रा, अनूप महाडिक, सतीश साहू, चेतन सोनकर, अशोक तिवारी सहित विभिन्न विभागों के जिलाध्यक्ष और पदाधिकारी मौजूद रहे।
गरियाबंद में हुआ यह प्रदर्शन साफ संकेत देता है कि अब छत्तीसगढ़ का कर्मचारी-अधिकारी वर्ग “वादों से नहीं, क्रियान्वयन से संतुष्ट होगा”। यदि शासन ने ठोस निर्णय नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन पूरे प्रदेश में बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक संकट खड़ा कर सकता है।