स्कूल में अनियमित उपस्थिति और कथित नशे में पहुंचने की शिकायत, ग्रामीणों ने दी तालाबंदी की चेतावनी; उपसरपंच खीरमणि हरपाल ने भी उठाए सवाल
छुरा (गंगा प्रकाश)। सरकारी स्कूलों में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने और शिक्षकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के दावों के बीच छुरा विकासखंड के ग्राम पंचायत के आश्रित ग्राम पंडरीपानीडीह स्थित शासकीय प्राथमिक शाला का मामला चर्चा में है। विद्यालय में पदस्थ प्रधानपाठक नोहर सिंह मोर्य की कार्यप्रणाली को लेकर ग्रामीणों एवं शाला प्रबंधन एवं विकास समिति ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों से लिखित शिकायत की है। शिकायत में प्रधानपाठक पर नियमित रूप से विद्यालय नहीं आने, समय से पहले स्कूल छोड़ने तथा कथित रूप से शराब के नशे में विद्यालय पहुंचने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
ग्रामीणों की शिकायत के अनुसार विद्यालय में करीब 48 विद्यार्थी दर्ज हैं। ऐसे में शिक्षक की नियमित उपस्थिति सीधे तौर पर बच्चों की पढ़ाई से जुड़ा विषय है। ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले कुछ समय से विद्यालय की व्यवस्था प्रभावित हो रही है और बच्चों की पढ़ाई को लेकर अभिभावकों में चिंता बढ़ रही है।
एक सप्ताह में कार्रवाई नहीं तो तालाबंदी की चेतावनी
शाला प्रबंधन एवं विकास समिति तथा ग्रामीणों द्वारा अधिकारियों को दिए गए आवेदन में कहा गया है कि संबंधित शिक्षक को कई बार समझाइश देने का प्रयास किया गया, लेकिन कथित रूप से स्थिति में सुधार नहीं हुआ। ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग से मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है।
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शिकायतकर्ताओं ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर उचित कार्रवाई नहीं की गई तो विद्यालय में तालाबंदी कर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों के भविष्य से जुड़े मामले में अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई की आवश्यकता है।
उपसरपंच खीरमणि हरपाल ने भी रखी अपनी बात
मामले को लेकर ग्राम पंचायत की उपसरपंच खीरमणि हरपाल ने भी विद्यालय की स्थिति को लेकर अपनी बात रखी है। उनका कहना है कि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होनी चाहिए और विद्यालय में शिक्षक की नियमित उपस्थिति जरूरी है। ग्रामीणों द्वारा उठाए गए सवालों को गंभीरता से लेते हुए मामले की वास्तविक स्थिति सामने लाने की आवश्यकता है।
उपसरपंच के बयान के मुताबिक, गांव के लोगों की चिंता का मुख्य विषय बच्चों की शिक्षा है। यदि विद्यालय में नियमित रूप से अध्यापन नहीं होता है तो इसका असर सीधे विद्यार्थियों के भविष्य पर पड़ सकता है। उन्होंने मामले में उचित जांच और आवश्यक कार्रवाई की अपेक्षा जताई है।
सहायक शिक्षा अधिकारी ने लिया संज्ञान
मामला शिक्षा विभाग के संज्ञान में पहुंचने के बाद सहायक शिक्षा अधिकारी विनोद सिन्हा का पक्ष भी सामने आया है। विभागीय अधिकारी द्वारा मामले की जानकारी लेने और विद्यालय की स्थिति को लेकर आवश्यक कार्रवाई की बात कही गई है। ऐसे में अब ग्रामीणों की शिकायत पर विभाग किस स्तर की जांच करता है और जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं, इस पर सबकी नजर है।
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ग्रामीणों की मांग है कि विद्यालय की उपस्थिति पंजी, अध्यापन व्यवस्था और स्कूल संचालन से संबंधित रिकॉर्ड की जांच की जाए, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए और यदि आरोपों की पुष्टि नहीं होती है तो विभाग जांच के माध्यम से स्थिति स्पष्ट करे।
आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही
इस पूरे मामले में यह स्पष्ट करना जरूरी है कि प्रधानपाठक के खिलाफ लगाए गए आरोप फिलहाल ग्रामीणों और शाला प्रबंधन समिति की शिकायत पर आधारित हैं। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित प्रधानपाठक का पक्ष भी सामने आना बाकी है। इसलिए शिकायत में लगाए गए आरोपों की वास्तविकता विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
लेकिन सवाल बड़ा है—क्या 48 बच्चों की पढ़ाई किसी विवाद या प्रशासनिक लापरवाही की भेंट चढ़ेगी? क्या शिक्षा विभाग समय रहते विद्यालय की व्यवस्था को दुरुस्त करेगा? और क्या शिकायत में लगाए गए गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी?
अब पूरा मामला शिक्षा विभाग की कार्रवाई पर टिका हुआ है। ग्रामीणों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि बच्चों की पढ़ाई और विद्यालय की व्यवस्था को लेकर जल्द समाधान नहीं निकला तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को तैयार हैं।
