छुरा (गंगा प्रकाश)। गरियाबंद जिले के छुरा नगर स्थित लक्ष्मीनारायण अस्पताल, छुरा में हाल ही में हुई जच्चा-बच्चा की मृत्यु की घटना को लेकर प्रारंभिक स्तर पर विभिन्न प्रकार की चर्चाएं सामने आई थीं। हालांकि अब मृतका प्रेमीन बाई ध्रुव के पति रामचंद्र ध्रुव का स्पष्ट और आधिकारिक बयान सामने आने के बाद मामले की तस्वीर अलग रूप में दिखाई दे रही है।

मृतका प्रेमीन बाई ध्रुव (35 वर्ष), निवासी रामपुर, जिला गरियाबंद थीं। 23 जनवरी 2026 को शाम लगभग 5 बजे प्रसव पीड़ा शुरू होने पर उन्हें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पीपरछेड़ी में भर्ती कराया गया। वहां लगभग दो घंटे तक सामान्य डिलीवरी का प्रयास किया गया, लेकिन सफलता नहीं मिलने पर डॉक्टरों ने उच्च सुविधा वाले अस्पताल ले जाने की सलाह दी।

इसके बाद रात लगभग 9 बजे उन्हें छुरा स्थित लक्ष्मीनारायण अस्पताल लाया गया।

डॉक्टरों ने स्थिति स्पष्ट कर बड़े अस्पताल ले जाने की दी सलाह

रामचंद्र ध्रुव के अनुसार अस्पताल पहुंचने के बाद डॉक्टरों ने तत्काल जांच की और बताया कि बच्चे की धड़कन नहीं मिल रही है तथा मरीज की स्थिति गंभीर है। चिकित्सकों ने बिना समय गंवाए बड़े अस्पताल या रायपुर स्थित मेकाहारा में इलाज कराने की सलाह दी।

पति के अनुसार उन्होंने स्वयं लिखित रूप से यह सहमति दी कि वे अपनी इच्छा से अस्पताल में इलाज करवा रहे हैं और संभावित जोखिम की जिम्मेदारी स्वयं स्वीकार करते हैं।

यह तथ्य अस्पताल की पारदर्शिता और पेशेवर ईमानदारी को दर्शाता है कि चिकित्सकों ने पहले ही स्थिति स्पष्ट कर दी थी और रेफर करने की सलाह दी थी।

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आर्थिक कठिनाई के बावजूद अस्पताल का सहयोग

रामचंद्र ध्रुव ने बताया कि उस समय उनके पास इलाज के लिए पर्याप्त धनराशि उपलब्ध नहीं थी। इसके बावजूद अस्पताल प्रबंधन ने मानवीय संवेदनशीलता दिखाते हुए आवश्यक जांच, दवाइयों, ऑपरेशन की तैयारी तथा रक्त की व्यवस्था की।

उन्होंने कहा कि इलाज के दौरान उन्हें किसी प्रकार की कमी महसूस नहीं हुई और डॉक्टरों व स्टाफ ने उनके सामने पूरी निष्ठा और समर्पण से उपचार किया।

ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्र में स्थित अस्पताल द्वारा आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना उपचार करना सामाजिक उत्तरदायित्व का उदाहरण माना जा रहा है।

बेहतर उपचार हेतु रायपुर रेफर

मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए 24 जनवरी को बेहतर इलाज के लिए रायपुर रेफर किया गया। 25 जनवरी 2026 की सुबह मेकाहारा अस्पताल में उपचार के दौरान प्रेमीन बाई ध्रुव की मृत्यु हो गई।

रामचंद्र ध्रुव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह एक दुर्भाग्यपूर्ण चिकित्सकीय परिस्थिति थी, लेकिन इसमें लक्ष्मीनारायण अस्पताल या उसके डॉक्टरों की कोई लापरवाही नहीं थी।

चिकित्सकीय सेवा और मानवता का उदाहरण

यह अत्यंत अनुचित है कि ऐसे अस्पताल या चिकित्सक पर दोषारोपण किया जाए, जो मरीज की वित्तीय स्थिति की परवाह किए बिना सदैव उपचार और मानवीय सहयोग के लिए तत्पर रहे हों।

जो चिकित्सक निस्वार्थ भाव से रोगी की सेवा करता है, वह केवल अपना पेशेवर दायित्व ही नहीं निभाता, बल्कि मानवता का सर्वोच्च उदाहरण प्रस्तुत करता है। संकट की घड़ी में सीमित संसाधनों और समय की चुनौती के बीच डॉक्टरों का उद्देश्य केवल एक होता है — मरीज की जान बचाना।

ऐसे समर्पित और करुणामय चिकित्सकों को कठघरे में खड़ा करने के बजाय उनके प्रयासों का सम्मान किया जाना चाहिए। समाज में डॉक्टरों को भगवान का दर्जा इसलिए दिया जाता है क्योंकि वे जीवन रक्षा के लिए कठिन परिस्थितियों में भी निरंतर प्रयासरत रहते हैं।

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जांच की प्रक्रिया सामान्य प्रशासनिक कदम

स्वास्थ्य विभाग द्वारा यदि औपचारिक जांच की जाती है तो वह एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया होगी। लेकिन उपलब्ध तथ्यों और मृतका के पति के बयान के आधार पर यह स्पष्ट होता है कि अस्पताल प्रबंधन ने अपनी क्षमता के अनुरूप पूर्ण ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ उपचार किया।


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