छुरा (गंगा प्रकाश)। डिजिटल भुगतान व्यवस्था को आम नागरिकों और छोटे कारोबारियों के लिए सहज एवं सुलभ बनाए रखने की मांग को लेकर बुधवार को छुरा में प्रधानमंत्री के नाम अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) के माध्यम से ज्ञापन सौंपा गया। प्रतिनिधिमंडल ने यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) लेनदेन को भविष्य में किसी भी प्रकार के प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष कर, शुल्क या मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) से मुक्त रखने की मांग उठाई।
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ज्ञापन में कहा गया कि डिजिटल इंडिया अभियान के तहत UPI देश में डिजिटल अर्थव्यवस्था और वित्तीय समावेशन का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरों तक छोटे दुकानदार, रेहड़ी-पटरी व्यवसायी, स्वरोजगार से जुड़े लोग और आम उपभोक्ता रोजमर्रा के भुगतान के लिए UPI का उपयोग कर रहे हैं। ऐसे में डिजिटल लेनदेन पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ने से छोटे कारोबारियों और आम उपभोक्ताओं पर इसका असर पड़ने की आशंका जताई गई है।
निःशुल्क व्यवस्था को बताया डिजिटल समावेशन की अहम कड़ी
ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि UPI के आसान और कम लागत वाले स्वरूप के कारण बड़ी संख्या में लोगों ने नकद भुगतान की बजाय डिजिटल लेनदेन को अपनाया है। प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि यदि भविष्य में UPI भुगतान पर किसी प्रकार का शुल्क या कर लगाया जाता है, तो इससे डिजिटल भुगतान को अपनाने की गति प्रभावित हो सकती है और लोगों के बीच नकद लेनदेन की प्रवृत्ति दोबारा बढ़ने की संभावना पैदा हो सकती है।
छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त बोझ की जताई आशंका
ज्ञापन में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) और छोटे कारोबारियों का भी उल्लेख किया गया। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि छोटे व्यापारियों का मुनाफा सीमित होता है। ऐसे में डिजिटल भुगतान पर MDR या अन्य शुल्क लागू होने से उनकी लागत बढ़ सकती है, जिसका सीधा प्रभाव उनके कारोबार और आय पर पड़ सकता है।
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प्रतिनिधिमंडल ने यह भी कहा कि UPI के व्यापक इस्तेमाल से लेनदेन में पारदर्शिता बढ़ी है तथा डिजिटल भुगतान के विस्तार से अर्थव्यवस्था में वित्तीय गतिविधियों का रिकॉर्ड उपलब्ध होता है। ऐसे में डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित करने की नीति को आगे भी जारी रखने की आवश्यकता है।
सरकारी प्रोत्साहन जारी रखने की मांग
ज्ञापन के माध्यम से प्रधानमंत्री से मांग की गई कि आम नागरिकों और सभी स्तर के व्यापारियों के लिए UPI लेनदेन को पूरी तरह शुल्क-मुक्त एवं कर-मुक्त बनाए रखा जाए। साथ ही डिजिटल भुगतान से जुड़े तकनीकी ढांचे तथा बैंकों के संचालन खर्च के लिए पूर्व की तरह सरकारी प्रोत्साहन एवं सब्सिडी व्यवस्था जारी रखने की मांग की गई, ताकि इसका अतिरिक्त वित्तीय भार आम जनता पर न पड़े।
ज्ञापन सौंपने वाले प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश सचिव रुद्रसेन सिन्हा, लोकसभा अध्यक्ष महेश यादव, जिलाध्यक्ष चमन यादव, जिला महासचिव इरफान खान, ब्लॉक अध्यक्ष खेमसिंग ठाकुर सहित अन्य प्रतिनिधि शामिल रहे। प्रतिनिधिमंडल ने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार आम नागरिकों, किसानों और छोटे कारोबारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए UPI भुगतान व्यवस्था को शुल्क-मुक्त बनाए रखने के संबंध में सकारात्मक निर्णय लेगी।
