पहली से पांचवीं की परीक्षा स्थगित, छठवीं से आठवीं के मामले में चुप्पी क्यों? शासन के आदेश में त्रैमासिक अंकों के 20% अधिभार का स्पष्ट प्रावधान

छुरा (गंगा प्रकाश)। गरियाबंद जिले में कक्षा पहली से आठवीं तक की त्रैमासिक परीक्षा के प्रश्नपत्र सोशल मीडिया पर वायरल होने का मामला अब शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और मूल्यांकन व्यवस्था को लेकर सवालों के घेरे में आ गया है। शनिवार-रविवार को प्रश्नपत्रों की पीडीएफ सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद कक्षा पहली से पांचवीं तक की परीक्षा स्थगित किए जाने की जानकारी सामने आई। वहीं कक्षा छठवीं, सातवीं और आठवीं के प्रश्नपत्र भी वायरल होने के बावजूद इन कक्षाओं की परीक्षा स्थगित नहीं किए जाने को लेकर विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।

मामले को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी राजेश चन्द्राकर की मीडिया में सामने आई कथित टिप्पणी ने विवाद को और गहरा कर दिया है। बताया जा रहा है कि डीईओ ने प्रश्नपत्र वायरल होने को गंभीर विषय नहीं माना तथा यह कहा कि त्रैमासिक और अर्धवार्षिक परीक्षा के अंक वार्षिक परीक्षा में नहीं जुड़ेंगे। यदि अधिकारी की ओर से वास्तव में ऐसा बयान दिया गया है, तो यह शासन द्वारा जारी मूल्यांकन संबंधी आदेश की व्याख्या को लेकर महत्वपूर्ण सवाल खड़ा करता है।

शासन के आदेश में 20 प्रतिशत अधिभार का उल्लेख

छत्तीसगढ़ शासन, स्कूल शिक्षा विभाग के उप सचिव द्वारा जारी आदेश क्रमांक GENCOR/6083/2025/20-1, दिनांक 26 सितंबर 2025 में विभिन्न कक्षाओं की मूल्यांकन व्यवस्था को लेकर स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं।

👉 जरूर पढ़ें: चरित्र शंका में पत्नी की बेरहमी से पिटाई, सुबह मौत से खुला खौफनाक राज!

आदेश के बिंदु क्रमांक-1 के अनुसार कक्षा पहली, दूसरी, तीसरी, चौथी, छठवीं एवं सातवीं की वार्षिक परीक्षा में प्रत्येक विषय के त्रैमासिक परीक्षा में प्राप्त अंकों का 20 प्रतिशत तथा छमाही परीक्षा में प्राप्त अंकों का 20 प्रतिशत अधिभार के रूप में जोड़े जाने का प्रावधान है। इसके अनुसार इन कक्षाओं का परीक्षाफल त्रैमासिक 20 प्रतिशत, छमाही 20 प्रतिशत और वार्षिक परीक्षा 60 प्रतिशत के आधार पर तैयार किया जाना है।

वहीं आदेश के बिंदु क्रमांक-2 में कक्षा आठवीं एवं नौवीं के लिए छमाही परीक्षा के अंकों का 30 प्रतिशत तथा वार्षिक परीक्षा के अंकों का 70 प्रतिशत निर्धारित किए जाने का उल्लेख है। इसी प्रकार कक्षा 10वीं एवं 11वीं के लिए भी छमाही के 30 प्रतिशत और वार्षिक के 70 प्रतिशत के आधार पर मूल्यांकन का प्रावधान बताया गया है।

फिर किसकी बात सही—आदेश या बयान?

यही वह बिंदु है, जहां पूरे मामले में नया सवाल खड़ा हो रहा है। यदि शासन के आदेश में कुछ कक्षाओं के त्रैमासिक और छमाही परीक्षा के अंकों को वार्षिक परिणाम में निर्धारित प्रतिशत के साथ जोड़ने का स्पष्ट प्रावधान है, तो जिला स्तर पर यह कहना कि त्रैमासिक और अर्धवार्षिक के अंक वार्षिक परीक्षा में नहीं जुड़ेंगे, किस नियम या नवीन आदेश के आधार पर कहा गया है?

यदि मूल्यांकन व्यवस्था में कोई संशोधन हुआ है, तो उसकी जानकारी भी सार्वजनिक की जानी चाहिए, ताकि विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों के बीच बनी असमंजस की स्थिति समाप्त हो सके।

पहली से पांचवीं की परीक्षा रुकी, बाकी पर क्यों नहीं?

प्रश्नपत्र सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पहली से पांचवीं तक की परीक्षा स्थगित किए जाने से यह संकेत मिलता है कि प्रश्नपत्र की गोपनीयता का विषय विभाग के लिए महत्वपूर्ण था। ऐसे में कक्षा छठवीं, सातवीं और आठवीं के प्रश्नपत्रों के वायरल होने के बावजूद परीक्षा जारी रखने के निर्णय पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

👉 जरूर पढ़ें: महानदी पुल पर अचानक मची चीख-पुकार, टक्कर के बाद नीचे जा गिरे बाइक सवार

क्या वायरल हुए प्रश्नपत्रों की सत्यता अलग-अलग थी? क्या विभाग ने यह जांच की कि प्रश्नपत्र वास्तविक थे अथवा नहीं? प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर स्कूलों तक पहुंचने की प्रक्रिया में कहीं से गोपनीयता भंग हुई? और यदि प्रश्नपत्र वास्तविक थे तो संबंधित कक्षाओं की परीक्षा स्थगित क्यों नहीं की गई? इन सवालों का स्पष्ट जवाब फिलहाल सामने नहीं आया है।

जांच से ही साफ होगी तस्वीर

पूरा मामला अब केवल प्रश्नपत्र वायरल होने तक सीमित नहीं है। इसमें परीक्षा की गोपनीयता, विद्यार्थियों के साथ समान व्यवहार, परीक्षा स्थगित करने के अलग-अलग निर्णय तथा शासन के मूल्यांकन संबंधी आदेश के पालन का प्रश्न भी जुड़ गया है।

ऐसे में शिक्षा विभाग द्वारा वायरल प्रश्नपत्रों की सत्यता की जांच, प्रश्नपत्र वितरण व्यवस्था की पड़ताल और अलग-अलग कक्षाओं की परीक्षा को लेकर अपनाए गए मापदंड को सार्वजनिक करना आवश्यक माना जा रहा है। साथ ही शासन के 26 सितंबर 2025 के आदेश के वर्तमान शैक्षणिक सत्र में लागू होने की स्थिति पर भी विभाग को स्पष्ट जानकारी देनी होगी।

अब देखने वाली बात यह होगी कि वायरल प्रश्नपत्र मामले में विभाग जांच का रास्ता अपनाता है या फिर आदेश और बयान के बीच बने इस अंतर पर ही सवाल अनुत्तरित रह जाते हैं।

WhatsApp0 Facebook 0 Twitter/X 0 0Shares
Share.

About Us

Chif Editor – Prakash Kumar yadav

Founder – Gangaprakash

Contact us

📍 Address:
Ward No. 12, Jhulelal Para, Chhura, District Gariyaband (C.G.) – 493996

📞 Mobile: +91-95891 54969
📧 Email: gangaprakashnews@gmail.com
🌐 Website: www.gangaprakash.com

🆔 RNI No.: CHHHIN/2022/83766
🆔 UDYAM No.: CG-25-0001205

Disclaimer

गंगा प्रकाश छत्तीसगढ के गरियाबंद जिले छुरा(न.प.) से दैनिक समाचार पत्रिका/वेब पोर्टल है। गंगा प्रकाश का उद्देश्य सच्ची खबरों को पाठकों तक पहुंचाने का है। जिसके लिए अनुभवी संवाददाताओं की टीम हमारे साथ जुड़कर कार्य कर रही है। समाचार पत्र/वेब पोर्टल में प्रकाशित समाचार, लेख, विज्ञापन संवाददाताओं द्वारा लिखी कलम व संकलन कर्ता के है। इसके लिए प्रकाशक, मुद्रक, स्वामी, संपादक की कोई जवाबदारी नहीं है। न्यायिक क्षेत्र गरियाबंद जिला है।

Ganga Prakash Copyright © 2025. Designed by Nimble Technology

You cannot copy content of this page

WhatsApp us

Exit mobile version