स्कूल का शौचालय अधूरा, आंगनबाड़ी बदहाल और कूड़ेदान भी सवालों के घेरे में; ग्रामीणों ने मांगा आय-व्यय का पूरा हिसाब
देवभोग (गंगा प्रकाश)। ग्राम पंचायत मुंगिया में विकास कार्यों और पंचायत की राशि के खर्च को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में कई कार्यों के नाम पर राशि खर्च अथवा आहरित की गई, लेकिन मौके पर उन कार्यों की स्थिति अपेक्षित नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत के आय-व्यय का पूरा ब्यौरा मांगने पर सरपंच और उपसरपंच की ओर से स्पष्ट जानकारी देने के बजाय टालमटोल की जा रही है।
ग्रामीणों के अनुसार पंचायत में पिछले लंबे समय से विभिन्न निर्माण एवं विकास कार्य कराए जाने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन मौके पर कई कार्य अधूरे, जर्जर अथवा उपयोग के लायक स्थिति में नहीं दिखाई दे रहे हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि कुछ मामलों में बिना अपेक्षित कार्य पूर्ण किए भुगतान निकाले जाने की आशंका है।
स्कूल का शौचालय अधूरा, बच्चों की सुविधा पर सवाल
मुंगिया स्कूल परिसर में शौचालय निर्माण की तस्वीर सामने आई है, जिसमें निर्माण कार्य अधूरा दिखाई दे रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि शौचालय निर्माण के लिए कितनी राशि स्वीकृत हुई, कितनी राशि खर्च हुई और भुगतान किस आधार पर किया गया।
ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों के लिए आवश्यक मूलभूत सुविधा से जुड़े निर्माण कार्य यदि अधूरे पड़े हैं तो संबंधित कार्य की स्वीकृति, लागत, भुगतान और निर्माण की वास्तविक स्थिति की जांच होनी चाहिए।
आंगनबाड़ी भवन की हालत भी सामने आई
मुंगिया स्थित आंगनबाड़ी केंद्र की तस्वीरें भी भवन की स्थिति को लेकर सवाल खड़े करती हैं। भवन की दीवारों पर सीलन, उखड़ा हुआ प्लास्टर और जगह-जगह खराब स्थिति दिखाई दे रही है। परिसर में भी साफ-सफाई की स्थिति संतोषजनक नजर नहीं आती।
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तस्वीरों में आंगनबाड़ी केंद्र के अंदर बच्चों के लिए बनाए गए शैक्षणिक चित्र और सामग्री दिखाई देती है, लेकिन भवन के रखरखाव की स्थिति यह सवाल खड़ा करती है कि मरम्मत और रखरखाव के नाम पर यदि राशि खर्च की गई है तो उसका असर मौके पर कितना हुआ?
कूड़ेदान के नाम पर भी उठे सवाल
पंचायत क्षेत्र में कचरा प्रबंधन के लिए रखे गए कूड़ेदान/सामग्री की स्थिति को लेकर भी ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं। तस्वीरों में सामग्री अस्त-व्यस्त स्थिति में दिखाई दे रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि पंचायत द्वारा कूड़ेदान या कचरा प्रबंधन के लिए राशि खर्च की गई है तो खरीद की संख्या, दर, बिल, भुगतान और वास्तविक उपयोग का सत्यापन किया जाना चाहिए।
सिर्फ तीन कार्य नहीं, कई कामों पर ग्रामीणों की नजर
ग्रामीणों का कहना है कि मामला केवल स्कूल के शौचालय, आंगनबाड़ी और कूड़ेदान तक सीमित नहीं है। पंचायत में निर्माण कार्य, मरम्मत, सामग्री खरीदी सहित कई अन्य कार्यों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में ऐसे कई कार्य हैं जिनमें कागजों पर खर्च और जमीन पर दिखाई देने वाले कार्य के बीच अंतर हो सकता है। ग्रामीणों ने पिछले वर्षों में पंचायत से हुए कार्यों की कार्यवार जांच और भौतिक सत्यापन कराने की मांग की है।
70 से 80 प्रतिशत राशि के आरोप की भी जांच की मांग
ग्रामीणों द्वारा पंचायत में 70 से 80 प्रतिशत तक राशि बिना काम किए अथवा काम पूरा किए बिना निकालकर गड़बड़ी किए जाने जैसे गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में आरोपों की सच्चाई दस्तावेजों और विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। ग्रामीणों ने मांग की है कि पंचायत के आय-व्यय का रिकॉर्ड, कार्य स्वीकृति, माप पुस्तिका, बिल-वाउचर, जीएसटी बिल, सामग्री खरीदी, भुगतान विवरण और संबंधित अभिलेखों की जांच कराई जाए तथा मौके पर कार्यों का भौतिक सत्यापन किया जाए।
हिसाब मांगना नागरिक का अधिकार, फिर जानकारी में टालमटोल क्यों?
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत की राशि सार्वजनिक धन है और उसके खर्च का हिसाब मांगना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है। यदि सभी कार्य नियमों के अनुसार हुए हैं तो संबंधित दस्तावेजों और खर्च का विवरण सार्वजनिक किए जाने में परेशानी नहीं होनी चाहिए। ग्रामीणों ने जनपद पंचायत एवं जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
पक्ष जानने किया गया संपर्क, नंबर बंद बताया गया
मामले में सरपंच एवं पंचायत सचिव का पक्ष जानने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया गया। उपलब्ध मोबाइल नंबरों पर संपर्क करने पर नंबर बंद/उपयोग में नहीं होने की जानकारी प्राप्त हुई। इसके कारण समाचार तैयार किए जाने तक संबंधित सरपंच एवं सचिव का पक्ष प्राप्त नहीं हो सका।
अब जांच से खुलेगा असली राज
स्कूल का अधूरा शौचालय, बदहाल आंगनबाड़ी, कूड़ेदान की स्थिति और पंचायत के अन्य कार्यों को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि मुंगिया पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर कितनी राशि निकाली गई और वास्तव में जमीन पर कितना काम हुआ?
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क्या पंचायत के रिकॉर्ड में दर्ज खर्च और मौके की तस्वीरों में कोई अंतर है? यदि है तो वह कितना है? इसका जवाब पंचायत के दस्तावेजों की जांच और मौके पर भौतिक सत्यापन के बाद ही सामने आएगा।
