सीएम पोर्टल पर शिकायत से मचा हड़कंप, छात्रावास की छत से टपकता पानी और भोजन व्यवस्था पर सवाल; वर्षों से पदस्थ अधीक्षक नरेंद्र सोनवानी फिर चर्चा में
गरियाबंद (गंगा प्रकाश)। एक तरफ छात्रावास की व्यवस्थाओं को लेकर शिकायत, दूसरी तरफ अधीक्षक को वर्तमान शैक्षणिक सत्र तक नहीं हटाने की मांग! गरियाबंद के पोस्ट मैट्रिक आदिवासी बालक छात्रावास का यह घटनाक्रम अब कई सवाल खड़े कर रहा है। आखिर ऐसा क्या हुआ कि छात्रावास की शिकायत सीएम पोर्टल से निकलकर कलेक्टर जनदर्शन तक पहुंच गई? 95 से अधिक विद्यार्थी एक साथ जनदर्शन क्यों पहुंचे? और अधीक्षक नरेंद्र सोनवानी को वर्तमान सत्र तक बनाए रखने की मांग के पीछे क्या वजह थी? इन सवालों ने पूरे मामले को चर्चा में ला दिया है।
शिकायत व्यवस्था की, लेकिन जनदर्शन में उठी अधीक्षक को बनाए रखने की मांग !
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, छात्रावास की साफ-सफाई और भोजन व्यवस्था को लेकर सीएम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई गई थी। इसके बाद मामला प्रशासनिक स्तर पर पहुंचा। इसी बीच 95 से अधिक विद्यार्थियों के कलेक्टर जनदर्शन पहुंचने और अधीक्षक नरेंद्र सोनवानी को वर्तमान शैक्षणिक सत्र तक छात्रावास में बनाए रखने की मांग करने की बात सामने आई।
यहीं से घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया। यदि छात्रावास की व्यवस्थाओं को लेकर शिकायत थी, तो विद्यार्थियों को अधीक्षक को नहीं हटाने की मांग क्यों करनी पड़ी? क्या विद्यार्थी मौजूदा व्यवस्था में बदलाव नहीं चाहते थे, या उनके सामने कोई दूसरी समस्या थी? इन सवालों का जवाब विद्यार्थियों के स्वतंत्र बयान और प्रशासनिक जांच से ही स्पष्ट हो सकेगा।

बरसात में टपकती छत, टेबल-कुर्सियों की कमी… फिर कैसी है छात्रावास की व्यवस्था?
जनदर्शन में विद्यार्थियों की ओर से छात्रावास की बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं सामने रखे जाने की जानकारी मिली है। बताया गया कि बरसात के दौरान छत से पानी टपकता है। टेबल-कुर्सियों की कमी के साथ कंबल और चादर जैसी आवश्यक सुविधाओं को लेकर भी परेशानी बताई गई।
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यदि ये शिकायतें सही पाई जाती हैं, तो सवाल केवल भवन की मरम्मत या भोजन की गुणवत्ता का नहीं, बल्कि छात्रावास में रहने वाले विद्यार्थियों को मिलने वाली सुविधाओं और विभागीय जवाबदेही का भी है। आखिर विद्यार्थियों की इन समस्याओं का समाधान पहले क्यों नहीं हुआ? क्या शिकायतों के बाद ही व्यवस्था सुधारने की पहल की गई? इन बिंदुओं पर विभाग का स्पष्ट जवाब जरूरी है।
वर्ष 2015 से जुड़ा नाम, पुराने विवादों की चर्चा फिर तेज
छात्रावास अधीक्षक नरेंद्र सोनवानी वर्ष 2015 से छात्रावास संचालन से जुड़े बताए जा रहे हैं। उनके कार्यकाल के दौरान छात्रावास की व्यवस्थाओं और अन्य मामलों को लेकर पहले भी विवाद तथा शिकायतें सामने आने की जानकारी दी गई है। लकड़ी के बिल और भोजन व्यवस्था को लेकर पूर्व में समाचार प्रकाशित होने का भी उल्लेख है।
इसके अलावा, नौकरी दिलाने के नाम पर कथित रूप से पैसे लेने के आरोप भी पूर्व में समाचारों में सामने आए थे। उपलब्ध विवरण में कुछ व्यक्तियों से दैनिक वेतनभोगी पद पर नियुक्ति दिलाने के नाम पर 10-10 हजार रुपये लेने तथा अन्य नियुक्तियों के संबंध में तीन से चार लाख रुपये तक लेने के आरोपों का उल्लेख किया गया था।
हालांकि, इन आरोपों की वर्तमान स्थिति, उनकी पुष्टि और किसी आधिकारिक जांच के अंतिम निष्कर्ष की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। आरोपों को प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता। संबंधित पक्ष का जवाब और जांच के दस्तावेज सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।

जांच में क्या निकला? हटाने की प्रक्रिया की चर्चा, लेकिन आधिकारिक तस्वीर बाकी
वर्तमान घटनाक्रम में साफ-सफाई और भोजन व्यवस्था की शिकायतों के बाद विभागीय जांच किए जाने की जानकारी सामने आई है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, व्यवस्थाओं में गड़बड़ियां पाए जाने और अधीक्षक को हटाकर दूसरे व्यक्ति को प्रभार सौंपने की प्रक्रिया का उल्लेख किया गया है। हालांकि, जांच रिपोर्ट, आधिकारिक आदेश और कार्रवाई की मौजूदा स्थिति की पुष्टि होना बाकी है।
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यदि जांच में अनियमितताएं प्रमाणित हुई हैं, तो जिम्मेदारी तय करना आवश्यक होगा। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि छात्रावास में सुधार के लिए क्या कदम उठाए गए हैं और विद्यार्थियों की समस्याओं का निराकरण हुआ या नहीं।
अब सबसे बड़ा सवाल—विद्यार्थियों की मांग के पीछे क्या थी वजह?
इस पूरे मामले में तीन सवाल सबसे अहम हैं। पहला, सीएम पोर्टल पर शिकायत के बाद जांच में क्या सामने आया? दूसरा, 95 से अधिक विद्यार्थियों ने जनदर्शन पहुंचकर अधीक्षक को वर्तमान सत्र तक बनाए रखने की मांग किन परिस्थितियों में की? और तीसरा, छात्रावास की बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी शिकायतों पर विभाग ने अब तक क्या कार्रवाई की?
इन सवालों के जवाब सामने आने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की तस्वीर साफ हो सकेगी। फिलहाल, गरियाबंद के इस छात्रावास में विद्यार्थियों की सुविधाएं, शिकायतों की निष्पक्ष जांच और अधीक्षक के संबंध में विभागीय निर्णय चर्चा के केंद्र में हैं।

अब देखना यह है कि प्रशासन विद्यार्थियों की शिकायतों और जनदर्शन में रखी गई मांग—दोनों की जांच कर क्या निष्कर्ष सामने लाता है।




