लता बाई का सवाल—आखिर गरीबों का भला कब करेगी सरकार? प्रधानमंत्री आवास से लेकर नल-जल तक का लाभ नहीं मिलने का आरोप, कमार विकास अभिकरण की भूमिका पर भी उठे सवाल
छुरा (गंगा प्रकाश)। सरकार विशेष पिछड़ी जनजातियों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने और उनके जीवन स्तर में सुधार लाने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित कर रही है। लेकिन इन योजनाओं का लाभ जरूरतमंद परिवारों तक कितना पहुंच रहा है, इसकी जमीनी हकीकत जनपद पंचायत छुरा की ग्राम पंचायत देवरी के आश्रित ग्राम बिरोडार में सामने आई है। यहां कमार विशेष पिछड़ी जनजाति की लता बाई पति पुनीत राम का परिवार आज भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जीवन गुजारने को मजबूर होने का दावा कर रहा है। परिवार की परेशानी केवल आवास तक सीमित नहीं है, बल्कि पेयजल और अन्य सरकारी सुविधाओं को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
लता बाई का कहना है कि सरकार गरीबों के कल्याण और विशेष पिछड़ी जनजातियों के उत्थान की बात करती है, लेकिन उनके परिवार को आज तक प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिला है। पक्के मकान की सुविधा नहीं मिलने से परिवार की मुश्किलें बनी हुई हैं। ऐसे में लता बाई का सवाल है कि आखिर गरीबों और कमार जनजाति जैसे विशेष पिछड़े समुदायों के परिवारों का भला कब होगा? क्या सरकारी योजनाओं का लाभ पाने के लिए जरूरतमंद परिवारों को इसी तरह इंतजार करना पड़ेगा?

पांच बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए छात्रावास का सहारा
आर्थिक तंगी के बीच भी लता बाई अपने बच्चों की पढ़ाई को लेकर पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने बताया कि अपने पांचों बच्चों को शिक्षा दिलाने के लिए गरियाबंद और केशोडार के छात्रावासों में भर्ती कराया है। बच्चे छात्रावासों में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं, ताकि उनका भविष्य बेहतर बन सके।
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एक ओर सीमित संसाधनों के बीच परिवार का भरण-पोषण करने की चुनौती है, तो दूसरी ओर बच्चों को शिक्षित करने की जिम्मेदारी। इसके बावजूद मां अपने बच्चों के भविष्य के लिए संघर्ष कर रही है। सवाल यह है कि जब सरकार विशेष पिछड़ी जनजातियों के बच्चों की शिक्षा और परिवारों के सामाजिक-आर्थिक उत्थान के लिए योजनाएं चला रही है, तो ऐसे परिवारों की परिस्थितियों का आकलन कर उन्हें पात्रतानुसार सहायता उपलब्ध कराने की पहल कितनी प्रभावी है?
राशन में चावल मिल रहा, चना बंद होने की बात
लता बाई के मुताबिक, उन्हें उचित मूल्य की राशन दुकान से निःशुल्क चावल मिलता है, लेकिन चना मिलना बंद हो गया है। उनका कहना है कि चावल के अलावा परिवार को किसी अन्य प्रकार की सरकारी सहायता का लाभ नहीं मिला है। सीमित संसाधनों में परिवार की जरूरतें पूरी करना उनके लिए मुश्किल बना हुआ है।
हालांकि राशन में चना नहीं मिलने के कारणों और परिवार को अन्य योजनाओं के तहत सहायता की पात्रता की स्थिति की संबंधित विभाग से जांच किया जाना आवश्यक है, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।

नल-जल योजना का लाभ भी नहीं मिलने का दावा
गांव में पेयजल की सुविधा को लेकर भी लता बाई ने अपनी परेशानी बताई है। उनका कहना है कि नल-जल योजना के तहत उनके घर तक पानी का कनेक्शन पहुंचा है पर उस कनेक्शन पानी ही नहीं आ रही है। इसके कारण परिवार को दूर से पानी लाना पड़ता है। पेयजल जैसी बुनियादी जरूरत के लिए परेशानी उठानी पड़ना ग्रामीण क्षेत्रों में योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े करता है।
यदि गांव में नल-जल योजना का कार्य पूरा हो चुका है, तो यह जांच का विषय है कि संबंधित परिवार तक पानी क्यों नहीं पहुंचा। वहीं, यदि कार्य अधूरा है, तो जिम्मेदार विभाग को इसकी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
कमार विकास अभिकरण की भूमिका पर सवाल
कमार जनजाति के उत्थान और विकास के उद्देश्य से गठित कमार विकास अभिकरण की भूमिका को लेकर भी लता बाई ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि गांव में कमार परिवारों की वास्तविक स्थिति जानने और उनकी समस्याओं का समाधान करने के लिए अब तक कोई अधिकारी-कर्मचारी नहीं पहुंचा है।
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विशेष पिछड़ी जनजाति के परिवारों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति का आकलन करना, उनकी जरूरतों को संबंधित विभागों तक पहुंचाना और पात्र हितग्राहियों को योजनाओं से जोड़ने के प्रयास महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में बिरोडार के इस परिवार की स्थिति यह सवाल खड़ा करती है कि कमार विकास अभिकरण और संबंधित विभाग जमीनी स्तर पर जरूरतमंद परिवारों तक किस तरह पहुंच रहे हैं।
जिम्मेदारों से संपर्क की कोशिश, नहीं मिल सका पक्ष
मामले में संबंधित अधिकारियों का पक्ष जानने के लिए ग्राम पंचायत देवरी के सचिव लेखराम ध्रुव से बार-बार फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। वहीं, जनपद पंचायत के प्रभारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) का मोबाइल नंबर पिछले एक सप्ताह से लगातार व्यस्त बताया जा रहा है। इस कारण खबर तैयार किए जाने तक उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका।

अब किसकी पहल से बदलेगी लता बाई के परिवार की तस्वीर?
बिरोडार की लता बाई की परेशानी केवल एक परिवार की समस्या नहीं, बल्कि सरकारी योजनाओं के लाभ की वास्तविक पहुंच की पड़ताल करने का विषय है। पांच बच्चों को छात्रावास में भेजकर पढ़ाने का प्रयास कर रही मां को यदि अब भी आवास और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए इंतजार करना पड़ रहा है, तो संबंधित विभागों की जिम्मेदारी और जवाबदेही तय होना जरूरी है।
अब देखना होगा कि जिला प्रशासन, जनपद पंचायत छुरा, ग्राम पंचायत देवरी और कमार विकास अभिकरण इस परिवार की वास्तविक स्थिति का जायजा लेने के लिए कब पहल करते हैं। क्या लता बाई के परिवार को प्रधानमंत्री आवास योजना, नल-जल योजना और अन्य पात्र शासकीय योजनाओं का लाभ मिल पाएगा, या फिर सरकारी सहायता की उम्मीद में यह परिवार यूं ही इंतजार करता रहेगा?
फिलहाल लता बाई का सवाल बरकरार है—गरीबों का भला आखिर कब करेगी सरकार?




