पुजारी पारा में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया नवाखाई पर्व, ग्रामीणों ने एक-दूसरे को दी जुहार
ओम प्रकाश रजक
करपावंड (गंगा प्रकाश)। ग्राम पंचायत करपावंड के पुजारी पारा में 19 सितंबर 2026 को नंदकिशोर बघेल के निवास पर नवाखाई जुहार भेंट कार्यक्रम हर्षोल्लास और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुआ। नई फसल के स्वागत, प्रकृति के प्रति आभार और आपसी भाईचारे के प्रतीक नवाखाई पर्व को लेकर ग्रामीणों में विशेष उत्साह देखने को मिला। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने शामिल होकर पारंपरिक तरीके से नवाखाई पर्व की खुशियां साझा कीं।
नवाखाई पर्व क्षेत्र की महत्वपूर्ण पारंपरिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं में से एक माना जाता है। नई फसल के घर पहुंचने के बाद परिवार एवं समाज के लोग मिलकर इसे उत्साह के साथ मनाते हैं। इसी परंपरा के तहत पुजारी पारा में आयोजित जुहार भेंट कार्यक्रम में ग्रामीणों ने एक-दूसरे से मुलाकात कर नवाखाई की शुभकामनाएं दीं। इस दौरान सभी ने सुख, शांति, समृद्धि और अच्छी फसल की कामना की।
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कार्यक्रम के दौरान गांव में पारंपरिक उत्सव जैसा माहौल रहा। ग्रामीणों ने अपने सामाजिक रीति-रिवाजों का पालन करते हुए एक-दूसरे के घर पहुंचकर जुहार भेंट की। बुजुर्गों से आशीर्वाद लिया गया तथा परिवार और समाज के लोगों के बीच आपसी प्रेम एवं सद्भाव को मजबूत करने का संदेश दिया गया। महिलाओं ने भी कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई।
नवाखाई पर्व के अवसर पर ग्रामीणों ने नई फसल को सम्मान देने के साथ ही अपनी लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। ग्रामीणों का कहना रहा कि ऐसे पारंपरिक आयोजन समाज को एकजुट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पर्व के माध्यम से नई पीढ़ी को भी क्षेत्र की पुरानी परंपराओं, सामाजिक मूल्यों और आपसी भाईचारे से परिचित होने का अवसर मिलता है।
कार्यक्रम में सरपंच, पटेल, मांझी, गायता, जमीहार, पंचगण सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक, महिलाएं एवं ग्रामीण उपस्थित रहे। सभी ने एक-दूसरे को नवाखाई पर्व की शुभकामनाएं देते हुए क्षेत्र में सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
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पूरे कार्यक्रम के दौरान पुजारी पारा सहित आसपास के क्षेत्र में उत्साह और उल्लास का माहौल बना रहा। ग्रामीणों ने पारंपरिक संस्कृति और सामाजिक एकता को बनाए रखने के साथ आने वाली पीढ़ियों तक इन परंपराओं को पहुंचाने का संदेश दिया। नवाखाई जुहार भेंट कार्यक्रम आपसी सद्भाव, भाईचारे और सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण का प्रतीक बनकर सामने आया।
