खेमेन्द्र सिंह ठाकुर
जगदलपुर(गंगा प्रकाश)। शिक्षा हासिल कर बेहतर भविष्य का सपना देखने वाले युवाओं के सामने रोजगार की चुनौती लगातार गंभीर होती जा रही है। कॉलेज और विश्वविद्यालय से डिग्री हासिल करने के बाद भी बड़ी संख्या में युवा नौकरी की तलाश में भटक रहे हैं। हाथ में शैक्षणिक योग्यता और आंखों में सुनहरे भविष्य का सपना होने के बावजूद रोजगार का अवसर नहीं मिलने से युवाओं में निराशा और भविष्य को लेकर असुरक्षा की भावना बढ़ रही है।
ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरों तक बड़ी संख्या में युवा सरकारी नौकरी की तैयारी में जुटे हैं। कई युवा वर्षों से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। सीमित पदों के मुकाबले आवेदकों की संख्या लगातार बढ़ने से प्रतियोगिता कठिन होती जा रही है। परीक्षा की तैयारी, आवेदन और परिणाम के लंबे इंतजार के बीच युवाओं की उम्र निकलती जा रही है। वहीं दूसरी ओर निजी क्षेत्र में स्थानीय स्तर पर पर्याप्त रोजगार उपलब्ध नहीं होने के कारण कई युवाओं को रोजगार की तलाश में बड़े शहरों की ओर पलायन करना पड़ रहा है।
डिग्री के बाद भी रोजगार की तलाश
युवाओं का कहना है कि पढ़ाई पूरी करने के बाद सबसे बड़ी चिंता रोजगार की होती है। सरकारी नौकरी को सुरक्षित भविष्य का माध्यम मानकर अनेक युवा लगातार प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन सीमित रिक्तियों के कारण सभी को अवसर नहीं मिल पाता। लंबे समय तक तैयारी करने के दौरान परिवार पर आर्थिक निर्भरता भी युवाओं के लिए चिंता का कारण बनती है।
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कई परिवार अपने बच्चों की पढ़ाई, कोचिंग, किताबों और प्रतियोगी परीक्षाओं के आवेदन का खर्च उठाने के लिए आर्थिक दबाव झेल रहे हैं। ऐसे में नौकरी नहीं मिलने पर युवाओं में हताशा बढ़ना स्वाभाविक है।
बेरोजगारी के साथ नशे का खतरा
बेरोजगारी का प्रभाव केवल आर्थिक स्थिति तक सीमित नहीं रहता। लंबे समय तक रोजगार नहीं मिलने पर कुछ युवाओं में तनाव, निराशा और अकेलेपन की भावना पैदा हो सकती है। खाली समय और गलत संगत के कारण कुछ युवा नशे जैसी बुरी आदतों की ओर भी आकर्षित हो सकते हैं।
हालांकि यह कहना उचित नहीं होगा कि हर बेरोजगार युवा नशे की गिरफ्त में जाता है, लेकिन युवाओं को सकारात्मक गतिविधियों, खेल, कौशल विकास, स्वरोजगार और रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है। समय रहते युवाओं को सही दिशा नहीं मिलने पर सामाजिक स्तर पर इसके दूरगामी प्रभाव सामने आ सकते हैं।
योजनाओं का लाभ युवाओं तक पहुंचाना चुनौती
सरकार की ओर से कौशल विकास, स्वरोजगार, रोजगार मेले और विभिन्न रोजगारपरक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन योजनाओं के माध्यम से युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। बावजूद इसके जमीनी स्तर पर इन योजनाओं का वास्तविक लाभ कितने युवाओं तक पहुंच रहा है, यह महत्वपूर्ण सवाल बना हुआ है।
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युवाओं का कहना है कि केवल प्रशिक्षण और योजनाओं की घोषणा से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। स्थानीय स्तर पर रोजगार के वास्तविक अवसर तैयार करने की आवश्यकता है। गांव और विकासखंड स्तर पर छोटे उद्योग, स्थानीय व्यवसाय, स्वरोजगार तथा निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ाए जाएं तो युवाओं को रोजगार के लिए अपना क्षेत्र छोड़ने की मजबूरी कम हो सकती है।
रोजगार के साथ सकारात्मक माहौल भी जरूरी
युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने के साथ-साथ खेल, सांस्कृतिक गतिविधियों, कौशल प्रशिक्षण और स्वरोजगार को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। युवाओं को अपनी योग्यता के अनुरूप रोजगार मिले, इसके लिए स्थानीय स्तर पर उद्योगों और निजी संस्थानों को प्रोत्साहित करने की दिशा में भी पहल जरूरी है।
युवाओं की मांग है कि सरकार रोजगार मेलों को प्रभावी बनाए, स्थानीय उद्योगों में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देने की व्यवस्था करे तथा कौशल प्रशिक्षण के बाद रोजगार या स्वरोजगार से जोड़ने की ठोस व्यवस्था विकसित करे।
आज आवश्यकता केवल युवाओं को डिग्री दिलाने की नहीं, बल्कि डिग्री के बाद सम्मानजनक रोजगार और आत्मनिर्भरता का रास्ता उपलब्ध कराने की है। यदि शिक्षित युवा अपनी योग्यता के अनुरूप अवसर प्राप्त कर सकें तो न केवल उनका भविष्य बेहतर होगा, बल्कि समाज को भी नशे और गलत संगत जैसी समस्याओं से बचाने में मदद मिलेगी।
नोट – उक्त विषय में प्रकाशित खबर जो फोटो उपयोग किया गया है वह फाइल फोटो है।
