खबर के बाद हरकत में आया प्रशासन, क्षतिग्रस्त आहते के पुनर्निर्माण की जिम्मेदारी ठेकेदार पर; नाली निर्माण में देरी पर नोटिस की तैयारी
गरियाबंद (गंगा प्रकाश)। वार्ड क्रमांक 7 रावणभाटा में नाली निर्माण के लिए लंबे समय से की गई खुदाई के चलते मकान का आहता भरभराकर गिरने के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। घटना की खबर सामने आने के बाद नगरपालिका प्रशासन हरकत में आया है। नगरपालिका के मुख्य नगरपालिका अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि क्षतिग्रस्त आहते का पुनर्निर्माण नाली निर्माण कर रहे ठेकेदार द्वारा ही कराया जाएगा। वहीं निर्माण कार्य में हो रही देरी को लेकर संबंधित ठेकेदार को नोटिस जारी करने की बात भी कही गई है।
दरअसल, गत रविवार सुबह नाली के समीप स्थित प्रवीण बघेल के घर का आहता अचानक भरभराकर गिर गया था। लगातार बारिश के बीच नाली निर्माण के लिए की गई खुदाई से मिट्टी कमजोर होने को घटना की प्रमुख वजह माना जा रहा है। गनीमत रही कि हादसे में किसी तरह की जनहानि नहीं हुई, लेकिन मकान मालिक को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। आहता गिरने के बाद मलबा सड़क पर फैल गया, जिससे कुछ समय के लिए आवागमन भी प्रभावित हुआ।
खबर के बाद उठा जवाबदेही का सवाल
घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा हुआ कि निर्माण कार्य के लिए गड्ढा खोदने के बाद उसे लंबे समय तक अधूरा क्यों छोड़ा गया? यदि खुदाई के कारण किसी मकान या आहते को नुकसान पहुंचता है तो उसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी?
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अब नगरपालिका सीएमओ के बयान के बाद क्षतिग्रस्त आहते के पुनर्निर्माण की जिम्मेदारी ठेकेदार पर तय होती दिखाई दे रही है। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि मामला केवल आहता बनवाने तक सीमित नहीं है। बारिश के मौसम में खुले गड्ढे और कमजोर होती मिट्टी आसपास रहने वाले लोगों के लिए भी खतरा बनी हुई है।
नोटिस के बाद बढ़ेगी निर्माण की रफ्तार?
नगरपालिका ने नाली निर्माण में देरी को लेकर ठेकेदार को नोटिस जारी करने की बात कही है। ऐसे में अब निगाहें इस बात पर हैं कि नोटिस के बाद निर्माण कार्य कितनी तेजी पकड़ता है।
स्थानीय रहवासियों की मांग है कि नगरपालिका अधिकारी निर्माण स्थल का तत्काल निरीक्षण करें। खुले गड्ढों के आसपास सुरक्षा के इंतजाम किए जाएं, सड़क पर पड़े मलबे को हटाया जाए और अधूरे नाली निर्माण को जल्द पूरा कराया जाए।
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नगरवासियों का कहना है कि नाली निर्माण शहर के लिए जरूरी विकास कार्य है और उन्हें विकास कार्य से कोई आपत्ति नहीं है। सवाल केवल कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर है। अब नगरपालिका के सामने एक ओर क्षतिग्रस्त आहते का पुनर्निर्माण कराने की चुनौती है, वहीं दूसरी ओर अधूरे नाली निर्माण को पूरा कराने की जिम्मेदारी भी है।
अब देखना होगा कि प्रशासन की कार्रवाई जमीन पर कितनी जल्दी दिखाई देती है।
