अस्पताल के गेट से 100 मीटर पहले घुटनों तक गंदा पानी, मरीजों की मजबूरी पर जिम्मेदारों की चुप्पी भारी; टीएल बैठक में मुद्दा उठने के बाद भी स्थायी समाधान का इंतजार
गरियाबंद (गंगा प्रकाश)। गरियाबंद जिला मुख्यालय में स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए पहुंचने वाले मरीजों की परेशानी अस्पताल के भीतर नहीं, बल्कि उसके प्रवेश द्वार से करीब 100 मीटर पहले ही शुरू हो जाती है। जिला अस्पताल तक पहुंचने वाली सड़क पर जमा गंदा पानी अब आम लोगों के लिए मुसीबत का रास्ता बन चुका है। हालात ऐसे हैं कि मरीजों, बुजुर्गों, महिलाओं और उनके परिजनों को घुटनों से नीचे तक भरे पानी के बीच से गुजरकर अस्पताल पहुंचना पड़ रहा है। सबसे गंभीर सवाल यह है कि जब समस्या करीब चार साल से बनी हुई है और प्रशासनिक बैठकों में भी उठ चुकी है, तो आखिर इसका स्थायी समाधान अब तक क्यों नहीं हो पाया?
इलाज से पहले गंदे पानी की परीक्षा !
जिला अस्पताल जैसे महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संस्थान तक पहुंचने वाले मार्ग की यह स्थिति व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। इलाज कराने आ रहे मरीजों को पहले गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ता है। कई बार परिजनों को मरीजों को संभालते हुए पानी पार कराना पड़ता है। बुजुर्गों और चलने-फिरने में परेशानी झेल रहे लोगों के लिए यह रास्ता किसी चुनौती से कम नहीं है।
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महिलाओं और बच्चों को भी इसी परेशानी का सामना करना पड़ता है। गंदे पानी में उतरने से कपड़े खराब होने, फिसलकर गिरने और दूषित पानी के संपर्क में आने का खतरा बना रहता है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि जिस अस्पताल में लोग स्वास्थ्य लाभ लेने पहुंचते हैं, वहां तक पहुंचने के रास्ते को सुरक्षित और सुगम बनाना जिम्मेदारों की प्राथमिकता में क्यों नहीं है?

चार साल से पानी का ठहराव, निकासी का इंतजाम नाकाम !
स्थानीय लोगों के मुताबिक, इस स्थान पर जलभराव की समस्या पिछले करीब चार वर्षों से बनी हुई है। यह महज बारिश के दिनों में पैदा होने वाली अस्थायी परेशानी नहीं, बल्कि पानी की निकासी की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करने वाली स्थिति है। मौसम बदलने के बाद भी पानी जमा रहने की शिकायत सामने आती रही है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, आसपास की राइस मिल से निकलने वाला पानी, अस्पताल परिसर की निस्तारी तथा आसपास के क्षेत्र का पानी यहां एकत्रित होता है। समुचित निकासी व्यवस्था नहीं होने के कारण पानी लंबे समय तक जमा रहता है। यदि पानी के स्रोत और निकासी मार्ग की तकनीकी जांच कर समय रहते व्यवस्था बनाई गई होती, तो संभवतः लोगों को इतनी लंबी अवधि तक परेशानी नहीं झेलनी पड़ती।
निर्माण हुए, लेकिन पानी की निकासी की योजना कहां गई?
इस समस्या के पीछे क्षेत्र की जल निकासी व्यवस्था और पुराने प्राकृतिक बहाव मार्ग को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर बताया जाता है कि नगरीय निकाय बनने से पहले राष्ट्रीय राजमार्ग-130C पर पेट्रोल पंप के पास एक निम्न रपटा हुआ करता था। समय के साथ आसपास निर्माण कार्य बढ़े, लेकिन पानी की निकासी के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं बन पाने से प्राकृतिक बहाव प्रभावित होने की बात कही जा रही है।
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अब जरूरत इस बात की है कि संबंधित विभाग पुराने जलप्रवाह मार्ग, वर्तमान जलभराव के स्रोत और निकासी की संभावनाओं का तकनीकी परीक्षण कराएं। केवल अस्थायी उपायों से समस्या का समाधान होने वाला नहीं है। स्थायी निकासी व्यवस्था के बिना हर साल यही स्थिति दोहराए जाने की आशंका बनी रहेगी।

पालिका को समस्या की जानकारी, फिर कार्रवाई में देरी क्यों?
मामले में नगर पालिका की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। अस्पताल प्रबंधन की ओर से समस्या को नगर पालिका से जुड़ा बताया जाता है। वहीं, पालिका की ओर से समस्या के समाधान के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग क्षेत्र में नाली निर्माण शुरू कराने का दावा किए जाने की बात सामने आई है।
यदि नाली निर्माण ही समस्या का स्थायी समाधान है, तो अब तक काम शुरू क्यों नहीं हुआ? निर्माण के लिए जिम्मेदार विभाग कौन-सा है? क्या तकनीकी स्वीकृति, बजट या विभागीय समन्वय में कोई बाधा है? इन सवालों का स्पष्ट जवाब सामने आना जरूरी है, ताकि लोगों को यह पता चल सके कि समस्या के समाधान में वास्तविक अड़चन कहां है।
टीएल बैठक में उठा मुद्दा, निरीक्षण भी हुआ—फिर नतीजा कब?
बताया जाता है कि जिला प्रशासन की टीएल बैठकों में भी इस समस्या का मुद्दा कई बार उठाया जा चुका है। अधिकारियों द्वारा मौके का निरीक्षण किए जाने और राष्ट्रीय राजमार्ग क्षेत्र में नाली निर्माण के लिए संबंधित विभाग से सहयोग लेने की बात भी सामने आई है।
इसके बावजूद यदि अस्पताल पहुंच मार्ग पर गंदा पानी जमा है, तो यह प्रशासनिक समन्वय और कार्यवाही की समयसीमा पर सवाल खड़े करता है। निरीक्षण और बैठकों का वास्तविक लाभ तभी होगा, जब जमीन पर काम दिखाई दे और मरीजों को राहत मिले।
अब दावों से नहीं, काम से मिलेगी राहत
गरियाबंद जिला अस्पताल तक पहुंचने वाले मार्ग की बदहाली केवल सड़क या नाली का मामला नहीं है, बल्कि आम नागरिकों की सुविधा, स्वच्छता और स्वास्थ्य से जुड़ा विषय है। जिला अस्पताल में उपचार के लिए आने वाले लोगों को रास्ते में ही गंदे पानी से जूझना पड़े, तो व्यवस्था की प्राथमिकताओं पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
अब जिला प्रशासन, नगर पालिका और राष्ट्रीय राजमार्ग से संबंधित विभाग को आपसी समन्वय से जलभराव का स्थायी समाधान निकालने की जरूरत है। साथ ही, नाली निर्माण की समयसीमा और जिम्मेदार विभाग की स्थिति सार्वजनिक की जानी चाहिए।
सबसे बड़ा सवाल अब भी कायम है—चार साल से समस्या की जानकारी होने, बैठकों में मुद्दा उठने और समाधान का भरोसा मिलने के बाद भी जिला अस्पताल का रास्ता कब साफ होगा? मरीजों को राहत देने के लिए जिम्मेदार विभागों को आखिर और कितना इंतजार करना पड़ेगा?





