वन मार्ग की मजदूरी के मस्टर रोल और बिल-वाउचर मांगे तो डीएफओ कार्यालय ने दिया WPS 3707/2023 का हवाला, कोर्ट रिकॉर्ड में मामला सरकारी क्वार्टर के किराया-पेनल्टी से जुड़ा
गरियाबंद (गंगा प्रकाश)। वन विभाग में सरकारी कार्यों से जुड़े भुगतान की पारदर्शिता को लेकर सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी अब सवालों के घेरे में है। हिन्दी दैनिक समाचार पत्र ‘गंगा प्रकाश’ के प्रधान संपादक एवं पेशे से पत्रकार प्रकाश कुमार यादव ने सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 में वन विभाग द्वारा कराए गए वनमार्ग निर्माण कार्य में मजदूरों को किए गए भुगतान से संबंधित दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां मांगी थीं।
आवेदक ने विशेष रूप से दादरगांव से रूवाड़ वनमार्ग निर्माण कार्य में मजदूरों को किए गए भुगतान से संबंधित मस्टर रोल/मजदूरी भुगतान सूची की संपूर्ण प्रमाणित प्रति तथा दादरगांव से रूवाड़ वनमार्ग कार्य से संबंधित बिल एवं वाउचर की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराने की मांग की थी। वहीं एक अन्य आवेदन में गोड़मुड़ी से घोघरा वनमार्ग कार्य में मजदूरों को किए गए भुगतान से संबंधित अभिलेख मांगे गए थे।
वनमंडलाधिकारी गरियाबंद वनमंडल कार्यालय द्वारा 29 सितंबर 2026 को जारी जवाब में मांगी गई जानकारी देने से इनकार कर दिया गया। विभाग ने पत्र में कहा कि मांगी गई जानकारी में खाता नंबर अंकित होने के कारण वह व्यक्तिगत जानकारी है तथा आरटीआई अधिनियम की धारा 8(1)(j) के तहत जानकारी दिया जाना संभव नहीं है। इसी के साथ विभाग ने माननीय उच्च न्यायालय के WPS No. 3707/2023 में पारित निर्णय का भी हवाला दिया।

लेकिन हाईकोर्ट के असली आदेश ने खड़ा किया बड़ा सवाल
मामले में उपलब्ध 20 मार्च 2024 के छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के आदेश को देखने पर सामने आता है कि WPS No. 3707/2023 का विषय वन मार्ग निर्माण अथवा मजदूरों के भुगतान से संबंधित नहीं है।
हाईकोर्ट के आदेश में स्पष्ट रूप से दर्ज है कि WPS No. 3707/2023 तुलसी साहू बनाम राज्य शासन एवं अन्य से संबंधित है। तुलसी साहू ITI कोरबा में प्रशिक्षण अधिकारी के रूप में कार्यरत थीं और मामला उनके द्वारा सरकारी क्वार्टर के कथित अनधिकृत कब्जे, किराया एवं पेनल्टी की वसूली से संबंधित था। आदेश में 8,60,640 रु की वसूली तथा वेतन से 8,700 रु प्रतिमाह काटे जाने का उल्लेख है।
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आदेश में यह भी दर्ज है कि संबंधित याचिकाकर्ताओं के सरकारी क्वार्टर, किराया, पेनल्टी तथा क्वार्टर खाली कराने को लेकर विवाद था।
वन मार्ग की मजदूरी से कोर्ट के आदेश का संबंध कहां?
यहीं से पूरा मामला गंभीर सवाल खड़ा करता है। एक तरफ आरटीआई आवेदक ने सरकारी वन कार्य में मजदूरों को किए गए भुगतान के मस्टर रोल, भुगतान सूची और बिल-वाउचर मांगे, जबकि दूसरी तरफ जानकारी रोकने के लिए जिस हाईकोर्ट प्रकरण का हवाला दिया गया, उसके उपलब्ध आदेश में सरकारी क्वार्टर, किराया और पेनल्टी का विवाद दर्ज है।
हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार WPS No. 3707/2023 में सरकारी क्वार्टर से संबंधित वसूली और वेतन कटौती का मामला था। आदेश में वनमार्ग निर्माण, वन विभाग के मजदूरी भुगतान, मस्टर रोल अथवा वनमार्ग के बिल-वाउचर से संबंधित विषय दर्ज नहीं है।

पत्रकार प्रकाश कुमार यादव ने उठाए सवाल
आवेदक प्रकाश कुमार यादव, जो हिन्दी दैनिक ‘गंगा प्रकाश’ के प्रधान संपादक एवं पेशे से पत्रकार हैं, का कहना है कि उन्होंने किसी व्यक्ति की निजी बैंकिंग जानकारी प्राप्त करने के उद्देश्य से आरटीआई नहीं लगाई थी। उनका कहना है कि मांग का उद्देश्य सरकारी धन से कराए गए वन मार्ग निर्माण कार्य में वास्तविक मजदूरी भुगतान और उससे संबंधित सरकारी अभिलेखों की पड़ताल करना था।
श्री यादव का आरोप है कि वन विभाग के डीएफओ कार्यालय द्वारा उच्च न्यायालय के ऐसे आदेश का हवाला देकर आवेदन खारिज किया गया, जिसका विषय वन मार्ग निर्माण कार्य में मजदूरी भुगतान से अलग है। उनका आरोप है कि इससे उन्हें गुमराह किया गया और संभावित भ्रष्टाचार अथवा वित्तीय अनियमितता से जुड़े रिकॉर्ड को सामने आने से रोकने का प्रयास किया गया।
क्या निजी खाता नंबर के कारण पूरा रिकॉर्ड रोका जा सकता है?
वन विभाग ने धारा 8(1)(j) के तहत व्यक्तिगत जानकारी का हवाला दिया है। लेकिन आवेदक का सवाल है कि यदि मस्टर रोल या भुगतान दस्तावेजों में मजदूरों के बैंक खाता नंबर जैसी निजी जानकारी मौजूद है, तो क्या उस हिस्से को हटाकर शेष सरकारी अभिलेख उपलब्ध कराने पर विचार किया गया?
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आवेदक के अनुसार उनकी मांग का केंद्र सरकारी कार्य में स्वीकृत एवं किए गए भुगतान का सत्यापन था। मस्टर रोल में कितने मजदूर दर्ज हैं, कितने दिनों की मजदूरी दिखाई गई है, कितनी राशि का भुगतान दर्शाया गया है तथा बिल-वाउचर में किस मद में कितना भुगतान हुआ—ये वे तथ्य हैं जिनसे सरकारी कार्य में पारदर्शिता की पड़ताल की जा सकती है।
अब प्रथम अपील में सामने आएगा असली सवाल
वन विभाग के जवाब में आवेदक को असंतुष्ट होने की स्थिति में नियमानुसार शुल्क जमा कर 30 दिनों के भीतर प्रथम अपीलीय अधिकारी एवं मुख्य वन संरक्षक, रायपुर वृत्त के समक्ष अपील करने की जानकारी दी गई है।
अब प्रथम अपीलीय अधिकारी के समक्ष सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह होगा कि वनमार्ग निर्माण में मजदूरी भुगतान से संबंधित दस्तावेज रोकने के लिए WPS No. 3707/2023 के सरकारी क्वार्टर संबंधी आदेश को किस आधार पर लागू किया गया?
हाईकोर्ट के आदेश में स्वयं सरकारी क्वार्टर, किराया और पेनल्टी से संबंधित विवाद का उल्लेख है। कोर्ट ने संबंधित याचिकाकर्ताओं को सरकारी क्वार्टर खाली करने तथा किराया-पेनल्टी के संबंध में अपील/प्रतिनिधित्व का रास्ता भी दिया था।
अब सवाल दस्तावेजों से बड़ा—संदर्भ का है
सरकारी वन मार्ग निर्माण में मजदूरों को किए गए भुगतान का रिकॉर्ड सार्वजनिक करने के सवाल पर अब आरटीआई, पारदर्शिता और विभागीय जवाबदेही तीनों केंद्र में हैं। यदि विभाग के पास वनमार्ग निर्माण से संबंधित मस्टर रोल, भुगतान सूची और बिल-वाउचर मौजूद हैं, तो यह स्पष्ट होना बाकी है कि उनमें से कौन-सी सूचना धारा 8(1)(j) के तहत वास्तव में अपवर्जित है और किस आधार पर पूरे दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए।
सबसे बड़ा सवाल यही है— वन मार्ग की मजदूरी का हिसाब मांगा गया, तो सरकारी क्वार्टर और किराया-पेनल्टी वाले हाईकोर्ट आदेश का हवाला क्यों?
अब इस सवाल का जवाब विभागीय प्रथम अपील और आगे की कानूनी प्रक्रिया में तय होना है।





