गरियाबंद (गंगा प्रकाश)।सुहागिनों ने रखा ,निर्जला व्रत पति की दीर्घायु की कामना : भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया। छत्तीसगढ़ की धरती मंगलवार को तीजा (हरितालिका तीज) के उल्लास और भक्ति से सराबोर रही। गरियाबंद जिला मुख्यालय के पुराना मंगल बाजार में आयोजित पारंपरिक कार्यक्रम में हजारों महिलाओं ने निर्जला व्रत रखकर शिव-पार्वती की पूजा-अर्चना की। सुहागिनों ने पति की दीर्घायु और अखंड सौभाग्य की कामना की, वहीं युवतियों ने मनपसंद वर की प्राप्ति का आशीर्वाद माँगा। पूरा नगर आस्था और लोकसंस्कृति के सुरों से गूंज उठा।

करुँ भात से निर्जला तपस्या तक
इस कठिन व्रत की शुरुआत एक दिन पहले करुँ भात (कड़वा और हल्का भोजन) से हुई, जिसे आत्मसंयम और तपस्या की तैयारी माना जाता है। बुधवार तड़के महिलाएँ श्रृंगार कर गौर माता और शिव-पार्वती की प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना में लीन रहीं। हल्दी-कुमकुम, बेलपत्र, मौसमी फल और सुहाग सामग्री अर्पित की गई। रातभर जागरण, तीजा गीत और एक-दूसरे को तिलक लगाकर सौभाग्य की शुभकामनाओं का सिलसिला चलता रहा।
सुबह होते ही गौर माता का विसर्जन सरोवरों में भक्तिभाव के साथ किया गया। महिलाओं की टोली गीत गाते और नृत्य करते हुए श्रद्धा और उल्लास के बीच विसर्जन यात्रा में शामिल हुई।
मंगल बाजार में उमड़ा आस्था का सैलाब
गरियाबंद का पुराना मंगल बाजार मंगलवार को तीजा महोत्सव का केंद्र बन गया। महिलाएँ हरे और लाल रंग की पारंपरिक साड़ियों, सुहाग चिन्हों, गहनों, मेहँदी और फूलों की सजावट से सजी-धजी दिखाई दीं। फुलेरा और दीयों की जगमगाहट, झूलों की झंकार और लोकगीतों की धुन ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
तीजा गीतों की गूंज सावन की ठंडी हवाओं में ऐसे रची-बसी मानो पूरा नगर शिव-पार्वती के प्रेम और अखंड मिलन का उत्सव मना रहा हो।
सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व
हरितालिका तीज केवल धार्मिक व्रत ही नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और पारिवारिक मेल-जोल का पर्व भी है। इस दिन महिलाएँ एकजुट होकर भक्ति और संस्कृति की धारा बहाती हैं। तीज के बहाने परिवार, समाज और रिश्तों में एकजुटता की भावना भी गहरी होती है।
श्रद्धा और श्रृंगार की कवितामयी व्याख्या
आयोजन में शामिल वरिष्ठ महिला लक्ष्मी सिन्हा ने तीज की महिमा को शब्दों में पिरोते हुए कहा— “शिव–पार्वती के प्रेम की धारा बहती झील जैसी है। मानसून की हरियाली में श्रृंगार के फूल जैसे खिलते हैं, वैसे ही करू भात की कड़वाहट और व्रत की पवित्रता से सजी महिलाएँ तीजा गीतों में अपनी आस्था पिरोती हैं। झूलों पर गूँजते गीत और हाथों की मेहँदी नई उम्मीदों का आह्वान करते हैं। यह पर्व न केवल भक्ति का प्रतीक है, बल्कि हर घर और हर मन को जोड़ने वाली सामूहिक लय भी है।”
वहीं, राधिका सिन्हा ने इसे नारी शक्ति और समर्पण का प्रतीक बताते हुए कहा— “वृंदावन की हरियाली तीजा का संदेश लाती है— प्रेम, व्रत और श्रद्धा की मिसाल बनकर। करू भात से निर्जला तपस्या तक यह पर्व आस्था का सुधा-झरना है, जो हर दिल को छू लेता है। झूलों की मधुर धुन, सावन की ठंडी बयार और गीतों की रागिनी से सजता यह उत्सव छत्तीसगढ़ की संस्कृति का जीवंत रूप है।”
महिलाओं की गरिमामयी उपस्थिति
पूजा-अर्चना और विसर्जन कार्यक्रम में मोहनी सिन्हा, संध्या सोनी, रेणुका सिन्हा, वंदना सिन्हा और रूपाली सोनी सहित सैकड़ों महिलाएँ शामिल हुईं। इनकी उपस्थिति ने आयोजन को और भी भव्य और उत्सवधर्मी बना दिया।
हरितालिका तीज का पर्व गरियाबंद में केवल धार्मिक श्रद्धा का ही नहीं, बल्कि महिलाओं की शक्ति, त्याग और समर्पण का उत्सव भी बनकर उभरा। मंगल बाजार की गलियाँ मंगलवार को सचमुच आस्था, श्रृंगार और लोकसंस्कृति का संगम बनीं।