छुरा जनपद पंचायत में अवमानना का बड़ा मामला, जनप्रतिनिधियों में नाराज़गी, जिला प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल

 

छुरा (गंगा प्रकाश)। छुरा जनपद पंचायत प्रशासन में पिछले आठ माह से चल रहा विवाद आखिरकार मीडिया रिपोर्ट के बाद सुर्खियों में आ गया है। मामला इतना गंभीर है कि इसमें छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के आदेश की अवमानना तक कर दी गई। लेकिन जब  गंगा प्रकाश में खबर प्रमुखता से प्रकाशित हुई तो आनन-फानन में प्रभारी सीईओ सतीष चन्द्रवंशी ने हाईकोर्ट का “सम्मान” करते हुए कार्रवाई का नाटक रच डाला।

मामला दरअसल जनपद पंचायत छुरा के सहायक ग्रेड-03 पद से जुड़ा है। इस पद पर पहले पुनेश्वर सेन कार्यरत थे। लेकिन एक अक्टूबर 2024 को सामान्य प्रशासन सभा की बैठक में अचंभित करने वाला निर्णय लिया गया — नागेश साहू को सहायक ग्रेड-03 के रूप में नियुक्त कर दिया गया और पुनेश्वर सेन को सेवा से मुक्त करने का प्रस्ताव पारित कर दिया गया। बैठक में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सभापति, प्रभारी सीईओ, एडीईओ , नागेश साहू मौजूद थे।

बताया गया कि इस बैठक में नागेश साहू द्वारा जनपद पदाधिकारियों का सम्मान  भी किया गया और कुकदा बांध के अतिथि गृह में हुई इस सभा में निर्णय को अंतिम रूप दिया गया। इसके बाद 25 अक्टूबर 2024 को पुनेश्वर सेन को औपचारिक रूप से सेवा मुक्त करने का आदेश जारी कर दिया गया।

हाईकोर्ट का दखल – न्यायालय ने किया निर्णय को अवैधानिक घोषित

पुनेश्वर सेन ने इस मामले को लेकर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर में याचिका दायर की। अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए साफ कहा कि नागेश साहू की नियुक्ति अवैधानिक है तथा पुनेश्वर सेन को पुनः उनके पद पर बहाल किया जाए।

हाईकोर्ट का यह आदेश लगभग आठ माह पूर्व जारी हुआ था, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि प्रभारी सीईओ सतीष चन्द्रवंशी ने इतने लंबे समय तक आदेश को लागू नहीं किया, और न ही जनपद सदस्यों या जनप्रतिनिधियों को न्यायालय के आदेश की जानकारी दी गई।

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अवमानना का आरोप — जिला प्रशासन पर भी उठे सवाल

सूत्र बताते हैं कि प्रभारी सीईओ सतीष चन्द्रवंशी द्वारा हाईकोर्ट के आदेश को दबाकर रखा गया, जिससे न केवल प्रशासनिक व्यवस्था की धज्जियां उड़ीं बल्कि जनपद पंचायत को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा।

कई जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया है कि सीईओ का रवैया मनमाना और गैर-जवाबदेह हो चुका है। उच्च न्यायालय के आदेश को आठ महीने तक दबाए रखना न्यायालय की सीधी अवमानना है, जिसके लिए सतीष चन्द्रवंशी के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए।

गंगा प्रकाश में प्रकाशित खबर के बाद आनन-फानन में नागेश साहू को सेवा से मुक्त करने का आदेश जारी कर दिया।

जनपद के सदस्यों ने सवाल उठाया कि जब न्यायालय ने नागेश साहू की नियुक्ति अवैधानिक क़रार दिया तो प्रभारी सीईओ ने उसे जनपद की सामान्य सभा के सामने क्यों नहीं रखा ?

जनपद के भीतर अब गहरी नाराजगी है और सदस्य मांग कर रहे हैं कि इस मामले में सतीष चन्द्रवंशी से हुए नुकसान की वसूली उनके वेतन से की जाए।

प्रशासन की चुप्पी से बढ़ी शंका

जिला प्रशासन की चुप्पी ने भी इस पूरे प्रकरण पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सूत्रों के अनुसार, सतीष चन्द्रवंशी के विरुद्ध कार्रवाई न होने से यह संकेत मिल रहा है कि या तो उन्हें संरक्षण प्राप्त है या फिर अधिकारी-जनप्रतिनिधि गठजोड़ की बू इस पूरे मामले से आ रही है।

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अब खुद फंसे प्रभारी सीईओ — हाईकोर्ट में याचिका दाखिल

जानकारी के अनुसार, प्रभारी सीईओ सतीष चन्द्रवंशी के खिलाफ अवमानना याचिका अब हाईकोर्ट बिलासपुर में दाखिल की गई है। इस याचिका में जिला स्तर के एक अधिकारी को भी पार्टी बनाया गया है। इससे यह साफ है कि अब मामला केवल जनपद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर भी जवाबदेही तय करनी पड़ेगी।

सीईओ से संपर्क की कोशिश बेअसर

जब इस मामले पर सतीष चन्द्रवंशी का पक्ष जानने के लिए उनके मोबाइल पर टेक्स्ट और व्हाट्सएप संदेश भेजे गए, तो कोई उत्तर प्राप्त नहीं हुआ और कॉल का जवाब नहीं दिए। इससे यह प्रतीत होता है कि या तो वे जवाब देने से बच रहे हैं, या फिर पूरी तरह से चुप्पी साधे हुए हैं।

जनता और जनप्रतिनिधियों की मांग — कार्रवाई नहीं तो आंदोलन

छुरा जनपद के कई जनप्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि जिला प्रशासन ने शीघ्र ही सीईओ के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की, तो वे जन आंदोलन शुरू करेंगे। यह मामला अब केवल एक कर्मचारी की बहाली का नहीं, बल्कि न्यायालय की गरिमा और प्रशासनिक ईमानदारी का प्रश्न बन चुका है।

जब अधिकारी ही न्यायालय के आदेशों को ठंडे बस्ते में डाल दें, तो आम जनता न्याय की उम्मीद किससे करे? — जनपद के एक वरिष्ठ सदस्य की यह टिप्पणी छुरा प्रशासन की मौजूदा हालत का सटीक चित्रण करती है।

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