वीडियो वायरल होने के बाद विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की, वहीं महिला संगठनों और सामाजिक संगठनों ने भी मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है। सरकार का कहना है कि आरोप बेहद गंभीर हैं और पुलिस विभाग की गरिमा तथा जनता के विश्वास को बनाए रखने के लिए यह कदम उठाना जरूरी था।
सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने मामले की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित करने पर भी विचार शुरू कर दिया है। जांच में यह देखा जाएगा कि वायरल वीडियो की सत्यता क्या है, वीडियो कब और किन परिस्थितियों में रिकॉर्ड किए गए, और इसके पीछे किसी साजिश की भूमिका है या नहीं।
वहीं, सस्पेंड किए गए डीजीपी के. रामचंद्र राव ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने कहा है कि उन्हें जानबूझकर फंसाया जा रहा है और यह उनकी छवि खराब करने की साजिश है। राव का दावा है कि वीडियो से छेड़छाड़ की गई है और वे जांच में पूरा सहयोग करेंगे। और नए प्रभारी की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
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