गरियाबंद/फिंगेश्वर (गंगा प्रकाश)। विकासखंड में धरती माता बचाओ अभियान के अंतर्गत कृशि विभाग द्वारा किसानों को जागरूक करने का सतत प्रयास जारी है। इसी कड़ी में सेवा सहकारी समिति में एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें पराली प्रबंधन और इसके वैज्ञानिक उपयोग पर विस्तृत जानकारी दी गई। इस कार्यक्रम में उपसंचालक कृशि, सहायक संचालक कृशि, वरिश्ठ कृशि विकास अधिकारी उपस्थित रहे। उपसंचालक कृशि ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि पराली जलाना न केवल खेती के लिए हानिकारक है, बल्कि यह पर्यावरण और मानव जीवन पर भी गंभीर दुश्प्रभाव छोड़ता है। पराली जलाने के नुकसान बताए गए, कार्यक्रम में किसानों को बताया कि पराली जलाने से खेतों में मौजूद सूक्ष्म जीवन नश्ट हो जाते हैं, जो मिटटी की उर्वरता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वातावरण में कार्बन मोनोआक्साइड, मीथेन व अन्य हानिकारक गैसें फैलती है, जिससे वायु गुणवत्ता खराब होती है। मानव शरीर पर श्वसन रोग, आंखों में जलन, एलर्जी व अस्थमा जैसी बीमारिया बढ़ने का खतरा रहता है। पराली जलाना अपराध की श्रेणी में आता है। राजस्व अधिकारी द्वारा पराली जलाने पर खेत मालिक को 1 से 10 हजार जुर्माना करने का अधिकार दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने भी पराली जलाने पर कार्यवाही का निर्देश दिया है।
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