छुरा (गंगा प्रकाश)। जंगल की जमीन पर वर्षों से पसरे कब्जों पर आखिरकार वन विभाग का डंडा चल गया। गरियाबंद वन मंडल के अमेठी सर्कल अंतर्गत ग्राम अमलोर में रविवार को वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 9.377 हेक्टेयर वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराकर दोबारा अपने कब्जे में ले लिया। कार्रवाई के दौरान पूरे गांव में हलचल का माहौल रहा और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर मौजूद रहे।
मुख्य वन संरक्षक रायपुर वृत्त के निर्देश एवं वन मंडलाधिकारी गरियाबंद के मार्गदर्शन में उप वन मंडलाधिकारी राजिम विकास चंद्राकर तथा वन परिक्षेत्र अधिकारी छुरा लवकुश पांडे के नेतृत्व में गठित टीम ग्राम अमलोर पहुंची। वन विभाग ने पहले अतिक्रमित भूमि का सत्यापन किया, इसके बाद बेदखली की कार्रवाई करते हुए भूमि का समतलीकरण कराया।

वन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार ग्राम अमलोर में कई लोगों द्वारा वन भूमि पर कब्जा कर खेती और अन्य उपयोग किए जाने की जानकारी मिली थी। जांच उपरांत दशरथ द्वारा 0.550 हेक्टेयर, परेश द्वारा 1.600 हेक्टेयर, हेमलाल द्वारा 3.107 हेक्टेयर, प्रभु द्वारा 2.600 हेक्टेयर तथा रामलाल द्वारा 1.520 हेक्टेयर भूमि पर अतिक्रमण पाया गया। कुल मिलाकर 9.377 हेक्टेयर वन भूमि को कब्जामुक्त कराया गया।
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कार्रवाई के दौरान सरपंच, उपसरपंच, वन प्रबंधन समिति के अध्यक्ष सहित ग्रामीणों की उपस्थिति में पूरी प्रक्रिया संपन्न हुई। वन विभाग की टीम ने स्पष्ट किया कि वन भूमि पर अवैध कब्जा कानूनन अपराध है और भविष्य में भी ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

बेदखली अभियान में सहायक परिक्षेत्र अधिकारी अमेठी कमल नेताम, परिसर रक्षक घनश्याम ध्रुव, युवराज नेताम, रामध्वज मौर्य तथा सुरक्षा श्रमिक राधेश्याम साहू, घनश्याम पटेल, भोलाराम साहू, राकेश टोडर, राम यादव और खिलावन पटेल ने सक्रिय भूमिका निभाई।
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जंगल की जमीन वापस, संरक्षण की उम्मीद मजबूत
वन विभाग की इस कार्रवाई को केवल अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि जंगलों को बचाने की मुहिम के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि वन क्षेत्र में अवैध कब्जों को समाप्त कर प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करना विभाग की प्राथमिकता है। कब्जामुक्त कराई गई भूमि पर अब विभाग संरक्षण और वृक्षारोपण संबंधी गतिविधियां संचालित करेगा, जिससे क्षेत्र में हरित आवरण को बढ़ावा मिल सके।




