पत्रकारिता का रणक्षेत्र बना—सवाल, सच और साहस पर हुआ सीधा संवाद
गरियाबंद (गंगा प्रकाश)। जब कलम चुप होती है, तब अन्याय बोलने लगता है… और जब कलम गरजती है, तब सत्ता को जवाब देना पड़ता है। शनिवार, 13 दिसंबर 2025 को गरियाबंद जिला विश्राम गृह में कुछ ऐसा ही नज़ारा देखने को मिला, जब पत्रकार महासंघ छत्तीसगढ़ (पंजीयन क्रमांक 11398) की वार्षिक बैठक एवं कार्यशाला में पत्रकारिता की असली ताकत खुलकर सामने आई। यह कोई औपचारिक बैठक नहीं, बल्कि चौथे स्तंभ को मजबूत करने का स्पष्ट ऐलान था।

प्रदेश अध्यक्ष सुनील कुमार यादव के मार्गदर्शन और जिला अध्यक्ष परमेश्वर यादव की अगुवाई में आयोजित इस कार्यक्रम ने साफ संदेश दिया—अब पत्रकार सिर्फ खबर नहीं लिखेगा, बल्कि सच के लिए खड़ा भी होगा। कार्यक्रम में अनुशासन समिति के प्रदेश उपाध्यक्ष शिव भीलेपरिया और प्रदेश मीडिया प्रभारी प्रकाश कुमार यादव की मौजूदगी ने चर्चा को और धारदार बना दिया।
प्रदेश अध्यक्ष सुनील कुमार यादव ने मंच से दो टूक कहा, पत्रकारिता सत्ता की सेवा नहीं, समाज की सेवा है। दबाव, डर और लालच—इन तीनों से ऊपर उठकर ही चौथा स्तंभ जिंदा रहता है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 के अंतिम चरण तक पूरे छत्तीसगढ़ में लगातार कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं, ताकि हर जिले का पत्रकार अपने अधिकार, जिम्मेदारी और ताकत को पहचाने। गरियाबंद की यह कार्यशाला उसी मुहिम का एक निर्णायक पड़ाव रही।
कार्यशाला में खबर बनाने की तकनीक से आगे बढ़कर “खबर बचाने” की बात हुई। कैसे फील्ड में सच्चाई तक पहुँचना है, कैसे आधी-अधूरी सूचना से बचना है, कैसे प्रशासनिक दबावों के बीच संतुलन बनाए रखना है—इन तमाम मुद्दों पर खुली और बेबाक चर्चा हुई। अधिकारियों, कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों से संवाद करते समय पत्रकार की भाषा, तेवर और मर्यादा कैसी हो—इस पर भी व्यावहारिक उदाहरणों के साथ प्रशिक्षण दिया गया।
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अनुशासन समिति के प्रदेश उपाध्यक्ष शिव भीलेपरिया ने कहा कि अगर संगठन मजबूत है, तो पत्रकार अकेला नहीं पड़ता। वहीं प्रदेश मीडिया प्रभारी प्रकाश कुमार यादव ने स्पष्ट किया कि खबर की प्रस्तुति जितनी मजबूत होगी, उसका असर उतना ही गहरा होगा। उन्होंने पत्रकारों को तथ्य, संतुलन और साहस—इन तीनों को साथ लेकर चलने का संदेश दिया।
गरियाबंद जिला इकाई की सक्रिय मौजूदगी ने इस आयोजन को जनआंदोलन जैसा स्वरूप दे दिया। खिलेश्वर गोश्वामी (जिला उपाध्यक्ष), ईमरान मेमन (जिला महासचिव), नेहरू साहू (जिला सचिव, राजिम), किरण कुमार साहू (ब्लॉक अध्यक्ष, फिंगेश्वर), नेहरू साहू (गरियाबंद), डोमन साहू, लीलाराम वर्मा, दिलीप नेताम, नूतन साहु, मोहित हरपाल सहित अनेक पत्रकारों ने अपने अनुभव साझा किए। ग्रामीण इलाकों में काम कर रहे पत्रकारों ने बताया कि किस तरह उन्हें दबाव, धमकी और उपेक्षा का सामना करना पड़ता है, और ऐसे में संगठन की भूमिका कितनी अहम हो जाती है।

कार्यक्रम के अंतिम चरण में संगठन ने बड़ा संदेश देते हुए नई जिम्मेदारियां सौंपीं। नेहरू साहू (गरियाबंद) को जिला कोषाध्यक्ष, जबकि दिलीप नेताम और नूतन साहु को जिला मीडिया प्रभारी नियुक्त किया गया। यह नियुक्तियां जिला इकाई की अनुशंसा पर प्रदेश अध्यक्ष सुनील कुमार यादव द्वारा की गईं। मंच से साफ कहा गया कि अब पद नहीं, प्रदर्शन देखा जाएगा—और संगठन के हित में काम ही पहचान बनेगा।
कार्यशाला का समापन तालियों के शोर के बीच हुआ, लेकिन संदेश गूंजता रहा—गरियाबंद से उठी यह आवाज अब पूरे प्रदेश में जाएगी। पत्रकार महासंघ छत्तीसगढ़ ने यह स्पष्ट कर दिया कि चौथा स्तंभ अब चुप नहीं बैठेगा। कलम चलेगी, सवाल उठेंगे और सच हर हाल में सामने आएगा।
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