CG Crime: छुरा की गोल्डन गर्ल संध्या ने की आत्महत्या, खेल और पढ़ाई में अव्वल रही छात्रा का दर्दनाक अंत
छुरा (गंगा प्रकाश)। छुरा नगर की ‘‘गोल्डन गर्ल’ कहे जाने वाली संध्या साहू ने मंगलवार को फांसी लगाकर जान दे दी। 21 वर्षीय संध्या राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर कई खेल प्रतियोगिताओं में पदक जीत चुकी थी। उसकी मौत ने पूरे नगर, खेल जगत और शिक्षकों को हिलाकर रख दिया है। किसी को यकीन नहीं हो रहा कि जो लड़की हर टूर्नामेंट से मुस्कुराते हुए मेडल लेकर लौटती थी, उसने अचानक जिंदगी की जंग हारने का फैसला क्यों किया।

कीचन में लगाई फांसी
घटना मगंलवार दोपहर की बताई जा रही है। संध्या छुरा नगर के आवासपारा क्षेत्र में अपने माता-पिता के साथ रहती थी। उसकी मां नहाने गई थीं। जब वापस लौटीं तो संध्या को कीचन में साड़ी के फंदे से लटका पाया। मां की चीख सुनकर आसपास के लोग घर में जमा हो गए। परिजनों ने तुरंत उसे फंदे से उतारकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र छुरा पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया।
पुलिस जांच में जुटी
घटना की सूचना मिलते ही छुरा पुलिस मौके पर पहुंची। शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। पुलिस ने मर्ग कायम कर लिया है और आत्महत्या के कारणों की जांच कर रही है। फोरेंसिक टीम को भी बुलाया गया, जिसने कीचन व कमरे से कुछ साक्ष्य जब्त किए हैं। पुलिस का कहना है कि संध्या के मोबाइल कॉल डिटेल, सोशल मीडिया और कॉलेज दोस्तों से पूछताछ की जा रही है, ताकि उसकी आत्महत्या के पीछे की वजह साफ हो सके।
चार गोल्ड सहित छह पदक जीते
संध्या साहू ने कम उम्र में ही कई बड़ी उपलब्धियां हासिल कर ली थीं। वह कचना धुरवा महाविद्यालय में ग्रेजुएशन कर रही थी। स्थानीय लोगों के अनुसार, उसने अब तक चार गोल्ड मेडल सहित कुल छह मेडल जीते थे। वह भुवनेश्वर, रायपुर, बालोद, गरियाबंद, कोलकाता और बीकानेर जैसे आयोजनों में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व कर चुकी थी। उसकी इस उपलब्धि के कारण लोग उसे ‘छुरा की गोल्डन गर्ल’ के नाम से पुकारते थे।
पढ़ाई में भी अव्वल थी
संध्या सिर्फ खेलों में ही नहीं, पढ़ाई में भी अव्वल रही। कॉलेज के शिक्षकों के मुताबिक, वह मेहनती और अनुशासित छात्रा थी। उसका सपना था कि खेल में करियर बनाकर परिवार का नाम रोशन करे और घर की आर्थिक स्थिति मजबूत करे। उसके पिता स्कूल बस के चालक हैं और परिवार सामान्य आर्थिक स्थिति में रहकर भी बेटी की पढ़ाई और खेल की जरूरतें पूरी करने की कोशिश करता रहा।
घर में पसरा मातम
घटना के बाद से पूरे परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। मां बार-बार बेसुध हो रही हैं। पिता गुमसुम बैठे हैं। रिश्तेदार और पड़ोसी लगातार उन्हें संभालने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन कोई शब्द उनके दुख को कम नहीं कर पा रहा। पड़ोस की महिलाएं कहती हैं – “इतनी अच्छी लड़की थी। हमेशा मुस्कुराती रहती थी। उसने ऐसा कदम क्यों उठाया, समझ नहीं आ रहा।”
सपनों का बोझ या सिस्टम की चुप्पी?
संध्या की मौत ने एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब खिलाड़ी मैदान में मेडल जीतते हैं तो मंच पर फोटो खिंचवाने के लिए नेता से लेकर अफसर तक पहुंच जाते हैं। लेकिन जब वही खिलाड़ी जिंदगी के तनाव से जूझते हैं, तब कोई उनका हाल नहीं पूछता। छोटे कस्बों और गांवों की बेटियों को खेल के साथ पढ़ाई, घर की जिम्मेदारी, आर्थिक परेशानी और समाज के ताने भी झेलने पड़ते हैं। कहीं यह आत्महत्या भी उन्हीं दबावों का नतीजा तो नहीं?
पूरा मोहल्ला स्तब्ध
संध्या की मौत के बाद से आवासपारा सहित पूरा छुरा नगर शोक में डूबा है। उसकी अंतिम यात्रा में सैकड़ों लोग शामिल हुए। लोगों की आंखों में एक ही सवाल तैरता रहा – “इतनी होनहार बेटी… आखिर क्यों चली गई?”
पुलिस ने कहा
छुरा थाना प्रभारी ने बताया कि प्राथमिक जांच में कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फोरेंसिक टीम की जांच के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी। हर पहलू से मामले की जांच की जा रही है।