पाली में शासकीय भूमि पर कब्जा, किसानों के खेत का रास्ता खोदकर बंद – प्रशासन की चुप्पी से उबले किसान, भूख हड़ताल की चेतावनी

 

कोरबा/पाली (गंगा प्रकाश)। पाली में शासकीय भूमि पर कब्जा: प्रदेश में जहां मुख्यमंत्री खुद अतिक्रमण विरोधी अभियान को लेकर सख्ती बरतने का संदेश दे रहे हैं, वहीं जमीनी स्तर पर प्रशासनिक अमला इस मंशा पर पानी फेरता दिख रहा है। ऐसा ही मामला पाली ब्लॉक के ग्राम पंचायत पोड़ी में सामने आया है, जहां शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा कर किसानों के खेत तक जाने वाला रास्ता बलपूर्वक बंद कर दिया गया। इससे नाराज़ किसान अब परिवार समेत भूख हड़ताल पर बैठने की चेतावनी दे रहे हैं।

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किसका है मामला?

ग्राम पोड़ी में निवासरत महेतरीन बाई पति तुलसिंह और शिक्षक शैलेन्द्र कश्यप पिता स्व. बंशीलाल पर आरोप है कि दोनों ने मिलकर कई एकड़ शासकीय भूमि पर कब्जा कर लिया और किसानों के खेत जाने के रास्ते पर करीब 5 फीट गहरी खोदाई करवा दी। इस जबरन की गई खुदाई से गांव के कई परिवारों का खेती कार्य पूरी तरह ठप हो गया है। किसान अब अपने खेत तक भी नहीं पहुंच पा रहे हैं।

पीड़ितों ने क्या कहा?

ग्रामीण किसान शिवदुलारी साहू ने बताया कि उनके पूर्वजों के समय से लगभग 12 एकड़ खेत में आवागमन के लिए शासकीय भूमि से रास्ता था। इसी रास्ते से खेत में बोवाई, बंटाई, खाद-बीज ले जाने का काम होता रहा है। लेकिन महेतरीन बाई और शैलेन्द्र कश्यप ने न सिर्फ इस रास्ते पर कब्जा कर लिया बल्कि बलपूर्वक खोदाई कर आवागमन भी रोक दिया। शिवदुलारी कहती हैं,

“रास्ता नहीं होगा तो खेत तक बीज, खाद, ट्रैक्टर कुछ भी नहीं जा सकेगा। इस साल खेती चौपट हो जाएगी।”

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कलेक्टर से लेकर एसडीएम तक गुहार बेअसर

पीड़ित किसानों ने 9 जून को कलेक्टर जनदर्शन, 16 जून को पाली तहसीलदार, और 23 जून को एसडीएम पाली से शिकायत कर रास्ता दिलाने की मांग की, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। इससे कब्जाधारियों के हौसले और बुलंद हो गए हैं। किसान भागीरथी, गणेशराम और शिवरतन का कहना है,

“हमने प्रशासन से बार-बार कहा कि अवैध कब्जा हटाएं, रास्ता दिलाएं। लेकिन सुनवाई नहीं हो रही। अब खेतों में काम कैसे करें?”

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पुलिस के पास भी मामला पहुंचा, लेकिन…

किसानों ने जब पुलिस में शिकायत की तो महेतरीन बाई ने पलटकर आदिवासी महिला को प्रताड़ित करने का झूठा आरोप लगा दिया। पुलिस जांच में यह शिकायत फर्जी पाई गई। पुलिस ने महिला को समझाइश दी कि झूठी शिकायत न करे और किसानों को रास्ता दे, लेकिन कब्जाधारी अपने रुख पर अड़े हैं। अब गांव में माहौल तनावपूर्ण है।

प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल

यह मामला कई बड़े सवाल खड़े करता है:

  • मुख्यमंत्री के आदेशों के बाद भी अतिक्रमण क्यों नहीं हटाया जा रहा?
  • शासकीय भूमि पर कब्जा करने वालों पर अब तक एफआईआर क्यों नहीं हुई?
  • गरीब किसानों के खेत तक पहुंच बंद होने से उनका भविष्य कौन संवारेगा?

भूख हड़ताल की चेतावनी

अब किसानों ने कहा है कि यदि प्रशासन ने जल्द कार्रवाई नहीं की तो वे परिवार सहित भूख हड़ताल पर बैठेंगे। शिवदुलारी साहू ने कहा,

 “हमारे परिवार का पेट खेत से चलता है। रास्ता नहीं होगा तो खेत भी नहीं बचेगा। भूखे मरने से अच्छा है कि हड़ताल पर बैठ जाएं ताकि सरकार सुन सके।”

ग्रामीणों में रोष, अतिक्रमणकारी बेखौफ

गांव के वरिष्ठ किसान कहते हैं कि शासन की मंशा अच्छी है, लेकिन प्रशासनिक लापरवाही और प्रभावशाली कब्जाधारियों का गठजोड़ किसानों की जिंदगी पर भारी पड़ रहा है। फिलहाल किसानों की खेती का समय निकलता जा रहा है और रास्ता नहीं खुला तो उनकी आजीविका पूरी तरह खत्म हो जाएगी।


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