दाँतबायकला में धन्वन्तरि बायोसाइंस के शिविर पर ग्रामीणों ने उठाए सवाल, टाटा पंच से रवाना हुए चार कर्मचारी
गरियाबंद (गंगा प्रकाश)। जिले के ग्राम पंचायत दाँतबायकला में निःशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर के नाम पर ग्रामीणों से कथित तौर पर राशि मांगने का मामला सामने आया है। धन्वन्तरि बायोसाइंस के नाम से लगाए गए इस शिविर में ग्रामीणों को निःशुल्क स्वास्थ्य जांच की जानकारी देकर बुलाए जाने की बात सामने आई है। हालांकि जांच के बाद मरीजों से कथित रूप से भुगतान की मांग किए जाने की शिकायत के बाद ग्रामीणों में नाराजगी फैल गई। मामला स्वास्थ्य विभाग तक पहुंचा तो विभागीय टीम मौके पर पहुंचने वाली थी, लेकिन टीम के पहुंचने से पहले ही शिविर में मौजूद कर्मचारी कथित तौर पर वहां से रवाना हो गए। इस घटनाक्रम ने पूरे शिविर की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मुनादी कराकर ग्रामीणों को दी गई थी शिविर की जानकारी
ग्रामीणों के अनुसार गांव में स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित करने के लिए ग्राम पंचायत के सरपंच से अनुमति ली गई थी। इसके साथ ही शिविर की जानकारी ग्रामीणों तक पहुंचाने के लिए कोतवाल के माध्यम से मुनादी भी कराई गई थी। मुनादी के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण स्वास्थ्य जांच कराने शिविर स्थल पर पहुंचे। ग्रामीणों का कहना है कि मुनादी और शिविर की जानकारी के चलते लोगों को यह भरोसा था कि जांच निःशुल्क होगी।
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शिविर में ग्रामीणों की स्वास्थ्य संबंधी जांच की जा रही थी। इसी दौरान कुछ मरीजों से जांच अथवा उपचार के नाम पर राशि मांगे जाने की बात सामने आई। इसके बाद वहां मौजूद लोगों में असमंजस की स्थिति निर्मित हो गई।
मरीज की पत्नी ने जताई आपत्ति, फिर बढ़ा मामला
ग्रामीणों के मुताबिक शिविर में जांच कराने पहुंचे एक मरीज की पत्नी ने जांच के बाद भुगतान की मांग पर आपत्ति जताई। इसके बाद शिविर में मौजूद कर्मचारियों से इस संबंध में सवाल-जवाब शुरू हो गया। देखते ही देखते यह बात अन्य ग्रामीणों तक भी पहुंच गई और ग्रामीणों ने निःशुल्क जांच के नाम पर राशि मांगने के आरोपों को लेकर सवाल उठाना शुरू कर दिया।
मामले की सूचना स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को दी गई। बताया जा रहा है कि विभाग की टीम शिविर स्थल पर पहुंचकर पूरे मामले की जानकारी लेने वाली थी।
स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंचती, उससे पहले ही खाली हो गया शिविर
ग्रामीणों का दावा है कि स्वास्थ्य विभाग की टीम के आने की जानकारी मिलते ही शिविर में मौजूद कर्मचारी वहां से सामान समेटकर रवाना हो गए। ग्रामीणों के अनुसार शिविर में कुल चार कर्मचारी मौजूद थे, जिनमें दो पुरुष कर्मचारी भी शामिल थे। सभी कथित तौर पर टाटा पंच वाहन क्रमांक CG 07 DC 9193 से वहां से चले गए।
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स्वास्थ्य विभाग की टीम के पहुंचने से पहले ही कर्मचारियों के चले जाने की घटना को लेकर ग्रामीणों में कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, कर्मचारियों के वहां से जाने का वास्तविक कारण क्या था, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
पंचायत की अनुमति से लेकर मुनादी तक पर उठे सवाल
पूरे मामले में यह भी सवाल उठ रहा है कि यदि स्वास्थ्य शिविर किसी निजी संस्था द्वारा लगाया गया था, तो इसके लिए किस स्तर से अनुमति ली गई थी। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत की अनुमति और गांव में मुनादी होने के कारण उन्हें शिविर के अधिकृत होने का भरोसा हुआ।
ग्रामीणों ने प्रशासन से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि धन्वन्तरि बायोसाइंस को शिविर लगाने की अनुमति किस आधार पर दी गई थी। शिविर में कौन-कौन सी जांच की जा रही थी और जांच के नाम पर मरीजों से राशि मांगने या लेने का कोई प्रावधान था या नहीं, इसकी भी जांच की मांग की गई है।
जांच के बाद ही सामने आएगी वास्तविक तस्वीर
ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा है कि स्वास्थ्य जांच शिविर के नाम पर ग्रामीणों को किसी प्रकार की गलत जानकारी नहीं दी जानी चाहिए। विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में लोग निःशुल्क स्वास्थ्य शिविरों को सरकारी अथवा अधिकृत स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़कर देखते हैं।
फिलहाल मामले की वास्तविक स्थिति स्वास्थ्य विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। जांच में यह देखा जाना जरूरी होगा कि शिविर आयोजित करने वाली संस्था के पास आवश्यक अनुमति थी या नहीं, वहां कौन-कौन सी जांच की जा रही थी तथा मरीजों से किसी प्रकार की राशि मांगी अथवा ली गई थी या नहीं।
वहीं धन्वन्तरि बायोसाइंस की ओर से मामले में फिलहाल कोई आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है।
