कृषि भूमि को नियमों के खिलाफ काटे गए प्लाट, जिम्मेदार विभागों की चुप्पी पर उठे गंभीर सवाल
छुरा (गंगा प्रकाश)। छुरा तहसील क्षेत्र के ग्राम पंचायत खरखरा के आश्रित ग्राम, पटवारी हल्का नंबर 25 स्थित खसरा नंबर 84 की कृषि भूमि पर चल रही अवैध प्लाटिंग ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। नगर पंचायत से लगी इस बहुमूल्य भूमि को खुलेआम प्लाटों में काटकर बिक्री की तैयारी चल रही है, जबकि भूमि आज भी सरकारी अभिलेखों में कृषि भूमि के रूप में दर्ज है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह पूरा खेल लंबे समय से चल रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभागों ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, जिससे भूमाफियाओं के हौसले बुलंद हो गए हैं।

खुलेआम काटे गए दर्जनों प्लाट, कोई रोकने वाला नहीं
करीब 0.6200 हेक्टेयर भूमि को लगभग 38 प्लाटों में विभाजित कर दिया गया है। मौके पर सड़क के नाम पर मुरम बिछाई जा चुकी है और प्लाटों के सीमांकन के लिए पोल भी लगा दिए गए हैं। यह पूरा काम खुलेआम चल रहा है, जिससे स्पष्ट है कि कार्रवाई का कोई भय नजर नहीं आ रहा।
ग्रामीणों का कहना है कि कृषि भूमि को कॉलोनी का रूप दिया जा रहा है, जबकि इसके लिए आवश्यक अनुमति तक नहीं ली गई।
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ग्राहक बनकर सामने आया प्लाट बिक्री का नेटवर्क
जब हमारे संवाददाता ने ग्राहक बनकर जानकारी जुटाई तो पता चला कि जमीन बेचने के लिए बाकायदा लोगों की टीम बनाई गई है, जो ग्राहकों को भविष्य में कीमत बढ़ने का लालच देकर प्लाट बुक करा रही है। लोगों को यह भी बताया जा रहा है कि जल्द ही यह क्षेत्र नगर विस्तार में शामिल हो सकता है।
इस तरह भोले-भाले लोगों को निवेश के नाम पर जोखिम में डाला जा रहा है।

डायवर्शन और रेरा नियमों की खुलेआम अनदेखी
राजस्व नियमों के अनुसार कृषि भूमि को आवासीय उपयोग में बदलने से पहले डायवर्शन अनिवार्य है, लेकिन संबंधित भूमि का डायवर्शन नहीं कराया गया है। इसके बावजूद प्लाटिंग कर बिक्री की तैयारी जारी है।
इसी तरह रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) अधिनियम 2016 के तहत प्लाटिंग परियोजना का पंजीयन भी अनिवार्य है, ताकि खरीदारों के हित सुरक्षित रहें। लेकिन यहां बिना रेरा पंजीयन के ही प्लाट बेचे जाने की तैयारी हो रही है। यह स्थिति सीधे तौर पर कानून की अवहेलना को दर्शाती है।
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संरक्षण के बिना संभव नहीं इतना बड़ा खेल?
स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि इस प्लाटिंग में प्रभावशाली लोगों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं की कथित भूमिका हो सकती है। ग्रामीणों का कहना है कि बिना संरक्षण के इतने बड़े पैमाने पर अवैध गतिविधि संभव नहीं लगती। लोगों के बीच सवाल है कि आखिर किसके भरोसे यह पूरा कारोबार चल रहा है?
https://youtu.be/tqbqlcUqOrc?si=PUlxLnHMyom95ftO
प्रशासन की चुप्पी से बढ़ी नाराजगी
नगर पंचायत सीमा से लगे क्षेत्र में लंबे समय से चल रही इस गतिविधि पर अब तक कोई सख्त कदम न उठाए जाने से प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो अवैध कॉलोनियों की भरमार हो जाएगी।
खरीदारों के साथ भी बड़ा धोखा संभव
भूमि जानकारों का कहना है कि ऐसे प्लाट खरीदने वाले लोग भविष्य में कानूनी झंझट में फंस सकते हैं। कई मामलों में अवैध कॉलोनियों में निर्माण भी रोक दिया जाता है, जिससे लोगों की जीवनभर की कमाई डूब जाती है।
एसडीएम ने जांच का दिया भरोसा
मामले में जब अनुविभागीय अधिकारी (SDM) अंजली खलखो से पक्ष जानना चाहा गया तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस मामले की जानकारी मीडिया के माध्यम से मिली है और शिकायत के आधार पर जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
अब कार्रवाई या फिर ढाक के तीन पात?
अब पूरे इलाके में चर्चा है कि क्या प्रशासन इस अवैध जमीन कारोबार पर सख्त कार्रवाई करेगा या फिर पहले की तरह मामला ठंडे बस्ते में चला जाएगा। फिलहाल भूमाफियाओं की गतिविधियां जारी हैं और लोग कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।https://youtu.be/tqbqlcUqOrc?si=PUlxLnHMyom95ftO
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