दशहरा-दीपावली से पहले पटाखों के भंडारण और बिक्री को लेकर उठे सवाल, अस्थायी गोदामों के निरीक्षण की सूचना के बाद प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी निगाहें
छुरा (गंगा प्रकाश)। दीपावली के त्योहार से पहले छुरा नगर पंचायत क्षेत्र में पटाखा कारोबार को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है। एक ओर मोहल्लों के भीतर अस्थायी गोदाम बनाकर पटाखों के भंडारण की सूचना को लेकर गंगा प्रकाश में खबर प्रकाशित होने के बाद संबंधित अधिकारियों के निरीक्षण के लिए निकलने की जानकारी सामने आई है, वहीं दूसरी ओर लाइसेंसधारी पटाखा व्यापारियों ने किसानों और फैंसी दुकानों में कथित रूप से बिना वैध लाइसेंस पटाखों की बिक्री किए जाने का मुद्दा उठाया है। इस संबंध में 18 व्यापारियों ने 13 अक्टूबर 2026 को समस्त पत्रकार संघ, छुरा के नाम आवेदन सौंपकर मामले को सार्वजनिक करने और संबंधित विभागों से कार्रवाई की मांग की है।
दोनों घटनाक्रमों के सामने आने के बाद अब पटाखों के भंडारण, बिक्री की अनुमति और सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, गोदामों में अनियमितता या दुकानों में बिना लाइसेंस बिक्री की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
खबर प्रकाशित होने के बाद निरीक्षण की हलचल
छुरा नगर पंचायत के कुछ वार्डों में दशहरा और दीपावली को ध्यान में रखते हुए अस्थायी पटाखा गोदाम बनाए जाने तथा बड़ी मात्रा में पटाखे रखे जाने की सूचना सामने आई थी। रिहायशी इलाकों में पटाखों के भंडारण को लेकर सुरक्षा संबंधी सवाल उठाए जाने के बाद गंगा प्रकाश ने इस मुद्दे को प्रमुखता से प्रकाशित किया।
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खबर प्रकाशित होने के बाद संबंधित अधिकारियों के निरीक्षण के लिए निकलने की जानकारी सामने आई है। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि मौके पर क्या स्थिति मिलती है, संबंधित गोदामों के पास आवश्यक अनुमति है या नहीं और वहां निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा है या नहीं।
निरीक्षण के वास्तविक निष्कर्ष और किसी कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल सामने नहीं आई है। ऐसे में प्रशासनिक जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
18 व्यापारियों ने आवेदन देकर उठाया मुद्दा
इसी बीच छुरा विकासखंड के 18 लाइसेंसधारी पटाखा व्यापारियों ने समस्त पत्रकार संघ, छुरा के नाम आवेदन सौंपा है। व्यापारियों ने आरोप लगाया है कि क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर किसानों और फैंसी दुकानों के माध्यम से पटाखों की बिक्री की जा रही है। उनका दावा है कि यदि यह बिक्री आवश्यक लाइसेंस के बिना हो रही है, तो इससे नियमों के तहत कारोबार करने वाले व्यापारियों को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
व्यापारियों का कहना है कि लाइसेंसधारी विक्रेताओं को निर्धारित शर्तों और नियमों का पालन करना पड़ता है। ऐसे में सभी विक्रेताओं के लिए समान नियम लागू होने चाहिए। उन्होंने संबंधित विभागों से पटाखों की बिक्री करने वाले प्रतिष्ठानों की जांच कराने और यदि बिना वैध अनुमति बिक्री की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है।
हालांकि, आवेदन में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। संबंधित दुकानदारों और विभागीय अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
तीन-चार दिन के अस्थायी बाजार को लेकर भी सवाल
व्यापारियों ने अपने आवेदन में ग्राम पंचायतों द्वारा निर्धारित स्थानों पर तीन से चार दिनों के लिए अस्थायी पटाखा दुकानें लगाए जाने का भी उल्लेख किया है। आवेदन के अनुसार, इन स्थानों पर दुकानदारों को किराया, बिजली और पानी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।
व्यापारियों का दावा है कि स्थानीय बाजार में पटाखों की बिक्री प्रभावित हो रही है, क्योंकि ग्राहक अन्य दुकानों से भी पटाखे खरीद रहे हैं। उनका कहना है कि कारोबार में प्रतिस्पर्धा से उन्हें आपत्ति नहीं है, लेकिन यदि कोई विक्रेता आवश्यक लाइसेंस के बिना पटाखे बेच रहा है, तो उसके विरुद्ध भी नियमों के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
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यहां महत्वपूर्ण बात यह है कि किसानों या फैंसी दुकानों में पटाखे बेचना अपने-आप में अवैध नहीं माना जा सकता। बिक्री की वैधता संबंधित लाइसेंस, अनुमति, पटाखों की श्रेणी और लागू नियमों पर निर्भर करती है। इसलिए शिकायत के आधार पर तथ्यों का सत्यापन जरूरी है।
कारोबार के साथ सुरक्षा भी महत्वपूर्ण
पटाखों का भंडारण और बिक्री केवल व्यापारिक प्रतिस्पर्धा का मामला नहीं है, बल्कि इससे आम नागरिकों की सुरक्षा भी जुड़ी हुई है। विस्फोटक अधिनियम 1884 तथा विस्फोटक नियम 2008 के तहत लागू प्रावधानों के अनुरूप संबंधित अधिकारियों को भंडारण स्थल, पटाखों की मात्रा, लाइसेंस और सुरक्षा व्यवस्था की जांच करनी चाहिए।
विशेष रूप से रिहायशी इलाकों में बनाए गए अस्थायी गोदामों के मामले में यह देखना आवश्यक है कि संबंधित स्थल स्वीकृत है या नहीं, वहां आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम हैं या नहीं और भंडारण निर्धारित सीमा के अनुरूप किया जा रहा है या नहीं।
यदि जांच में नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित अधिकारियों को नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए। वहीं, वैध लाइसेंस के साथ कारोबार करने वाले व्यापारियों की शिकायतों का भी निष्पक्ष परीक्षण किया जाना चाहिए।
अब प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती
छुरा में सामने आए इन घटनाक्रमों के बाद प्रशासन के सामने दो महत्वपूर्ण विषय हैं। पहला, अस्थायी गोदामों में पटाखों के भंडारण की वैधता और सुरक्षा व्यवस्था की जांच करना। दूसरा, विभिन्न दुकानों में पटाखों की बिक्री के लिए आवश्यक अनुमति का सत्यापन करना।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या निरीक्षण के बाद गोदामों की वास्तविक स्थिति सामने आएगी और 18 व्यापारियों द्वारा सौंपे गए आवेदन पर संबंधित विभाग कार्रवाई करेंगे? दीपावली से पहले इन सवालों का जवाब मिलना जरूरी है, ताकि नियमों का पालन सुनिश्चित हो और नागरिकों की सुरक्षा के साथ वैध व्यापारियों के हितों की भी रक्षा हो सके।
फिलहाल निरीक्षण के निष्कर्षों, शिकायत पर विभागीय कार्रवाई और संबंधित पक्षों के आधिकारिक जवाब का इंतजार है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि मामले में नियमों का उल्लंघन हुआ है या नहीं।
गंगा प्रकाश की खबर के बाद पटाखा कारोबार से जुड़े दोनों मुद्दे चर्चा में हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन की जांच से क्या तथ्य सामने आते हैं और क्या कार्रवाई केवल निरीक्षण तक सीमित रहती है या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर आगे भी कदम उठाए जाते हैं।
