छुरा (गंगा प्रकाश)। गरियाबंद जिले के छुरा नगर में भ्रष्टाचार का जाल गहराता जा रहा है। यहां कुछ बड़े व्यापारियों ने जीएसटी पंजीयन (GST Number) की आड़ लेकर वर्षो से करोड़ों का फर्जी बिलिंग कारोबार खड़ा कर लिया है। यही नहीं, इन व्यापारियों की सांठगांठ सीधे-सीधे ग्राम पंचायतों के सरपंच और सचिवों से है। सूत्र बताते हैं कि जनपद पंचायत के सीईओ भी इस खेल पर आंख मूंदे बैठे हैं, जिससे पूरे विकासखण्ड में योजनाएं सिर्फ कागजों पर ही पूरी हो रही हैं।

74 ग्राम पंचायतें — कागजों पर विकास, जमीनी हकीकत में भ्रष्टाचार
छुरा विकासखण्ड की कुल 74 ग्राम पंचायतों को शासन हर वर्ष करोड़ों रुपये ग्राम विकास योजनाओं के लिए उपलब्ध कराता है। लेकिन इन पैसों का सही उपयोग जनता तक नहीं पहुंच पा रहा।
- कई पंचायतों में सड़क, नाली, भवन, हैंडपंप और अन्य निर्माण कार्यों को कागजों पर पूर्ण दिखा दिया गया।
- वास्तविकता में न तो निर्माण हुआ और न ही सामग्री की खरीदी।
- जीएसटी नंबरधारी व्यापारियों से फर्जी खरीदी-बिक्री बिल बनाकर सरकारी धन का गबन किया जा रहा है।
मिलीभगत का बड़ा जाल
इस पूरे खेल में पंचायतों के सरपंच–सचिव और छुरा नगर के कुछ बड़े व्यापारी मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। शासन की योजनाओं को लागू करने के नाम पर सामग्री की खरीदी, बिल पासिंग और भुगतान का पूरा खेल मिलकर रचा जाता है। सूत्रों की मानें तो हर पंचायत का हिस्सा तय होता है और पैसा ऊपर तक पहुंचता है।
जनपद सीईओ की चुप्पी सवालों के घेरे में
स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस बड़े घोटाले की जानकारी जनपद पंचायत सीईओ को भी है। इसके बावजूद वे कार्रवाई के बजाय चुप्पी साधे बैठे हैं। जनता का कहना है कि सीईओ की चुप्पी साफ इशारा करती है कि पूरे मामले में प्रशासनिक मिलीभगत भी है।
क्या होनी चाहिए कार्रवाई?
- छुरा क्षेत्र के सभी जीएसटी नंबरधारी व्यापारियों की खरीदी–बिक्री की जांच हो।
- प्रत्येक पंचायत में हुए विकास कार्यों की वार्डवार व योजना-वार जांच हो।
- फर्जी बिलिंग और भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों–कर्मचारियों पर एफआईआर दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाए।
जनता का सवाल — आखिर विकास का पैसा कहां जा रहा है?
गांवों में विकास कार्य ठप पड़े हैं। सड़कों पर गड्ढे, टूटी नालियां, अधूरे भवन और बंद पड़े हैंडपंप इस बात के गवाह हैं कि शासन का पैसा जनता तक नहीं पहुंच पा रहा। वहीं, व्यापारी–सरपंच–सचिव और अधिकारी मिलकर जनता के हक पर डाका डाल रहे हैं।
यह मामला यदि ईमानदारी से जांचा जाए तो करोड़ों का भ्रष्टाचार सामने आ सकता है।