गरियाबंद में महिला मंडल विवाद के बीच तिरंगे का अपमान — भाजपा पार्षद पर गंभीर आरोप, फोटो सोशल मीडिया पर वायरल
गरियाबंद (गंगा प्रकाश)। गरियाबंद में महिला मंडल विवाद के बीच तिरंगे का अपमान — जिला मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर जहां पूरे देश में तिरंगे के सम्मान और शान के साथ ध्वजारोहण किया जा रहा था, वहीं गरियाबंद में महिला मंडल भवन के बाहर एक घटना ने राष्ट्रीय गौरव को ठेस पहुंचा दी। आरोप है कि भाजपा की वार्ड नं. 13 की पार्षद बिंदु सिन्हा ने महिला मंडल भवन में ध्वजारोहण के दौरान जल्दबाजी और जबरदस्ती में राष्ट्रीय ध्वज को इतनी जोर से खींचा कि वह खंभे से टूटकर सीधे जमीन पर गिर गया।

गवाहों के मुताबिक, यह नज़ारा कुछ सेकंड का था लेकिन उसका असर लंबे समय तक रहेगा। मौके पर मौजूद लोगों ने देखा कि झंडा गिरने के बाद भी पार्षद कुछ देर तक मूकदर्शक बनी रहीं और उसे तुरंत उठाने का प्रयास नहीं किया। कई लोगों ने इस घटना की तस्वीरें खींचकर सोशल मीडिया पर साझा कर दीं, जो अब वायरल हो रही हैं।
जानकारों का कहना है कि यह कृत्य राष्ट्रीय ध्वज संहिता और राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम की धारा 2 की कंडिका 10 व 2.2 की कई धाराओं के अंतर्गत राष्ट्रीय ध्वज का अपमान की श्रेणी में आता है। तिरंगे को भूमि पर रखना या गिरने देना सीधा-सीधा उसके सम्मान के विपरीत है।
महिला मंडल विवाद की पृष्ठभूमि
गरियाबंद के महिला मंडल भवन को लेकर महीनों से दो गुटों में तनातनी चल रही है। बताया जा रहा है कि भाजपा के सत्ता में आने के बाद पार्टी समर्थित कुछ महिलाएं इस भवन पर अपना वर्चस्व कायम करने की कोशिश कर रही हैं। इसी विवाद के चलते 15 अगस्त को माहौल और गरम हो गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पार्षद बिंदु सिन्हा स्कूटी से तेजी से पहुंचीं और बिना औपचारिक प्रक्रिया के झटके से ध्वजारोहण करने लगीं। इसी जल्दबाजी में तिरंगा गिर पड़ा।
पार्षद का बचाव, लेकिन कानूनी पेंच फंसा
जब इस बारे में पार्षद बिंदु सिन्हा से सवाल किया गया तो उन्होंने सफाई दी कि “झंडा गिरा नहीं, बल्कि ध्वजारोहण की तैयारी के लिए जमीन पर रखा गया था।”
हालांकि, कानूनी जानकारों और राष्ट्रीय ध्वज संहिता के मुताबिक, तिरंगे को जमीन पर रखना भी उसके सम्मान के खिलाफ है, चाहे वह किसी भी तैयारी का हिस्सा क्यों न हो।
भाजपा की ‘हर घर तिरंगा’ मुहिम पर सवाल
देशभर में भाजपा ने ‘हर घर तिरंगा’ अभियान चलाया, लेकिन इसी पार्टी की पार्षद द्वारा तिरंगे के सम्मान में लापरवाही ने विरोधियों को हमला बोलने का मौका दे दिया है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल अब इसे मुद्दा बनाकर भाजपा पर निशाना साध सकते हैं।
अब सवाल यह है कि—
- क्या इस मामले में प्रशासन राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई करेगा?
- या यह मामला भी राजनीतिक रस्साकशी में दब जाएगा?
गरियाबंद में इस घटना ने न सिर्फ महिला मंडल विवाद को और भड़का दिया है, बल्कि तिरंगे के सम्मान पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।