koyala khoj : रायपुर। केंद्र सरकार ने देश में कोयला उत्पादन को गति देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। अब खदानों में कोयले की खोज (Exploration) के लिए निजी कंपनियों को आधिकारिक रूप से एंट्री दे दी गई है। सरकार का मानना है कि निजी क्षेत्र की भागीदारी से कोयला खोज की प्रक्रिया तेज होगी, तकनीकी दक्षता बढ़ेगी और अंततः देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।

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1957 के खनन अधिनियम के तहत जारी हुई अधिसूचना

कोयला मंत्रालय ने शुक्रवार को जारी एक औपचारिक बयान में बताया कि यह निर्णय खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 की धारा 4(1) के दूसरे प्रावधान के तहत लिया गया है। मंत्रालय ने बताया कि 26 नवंबर 2025 से भारतीय गुणवत्ता परिषद—राष्ट्रीय शिक्षा एवं प्रशिक्षण प्रत्यायन बोर्ड (NABET) द्वारा मान्यता प्राप्त निजी संस्थाओं को आधिकारिक रूप से मान्यता प्राप्त पूर्वेक्षण एजेंसियों (Recognised Exploration Agencies) के रूप में अधिसूचित किया गया है।

खुदाई और पूर्वेक्षण की प्रक्रिया में आएगी तेजी

अब तक कोयले की खोज का कार्य मुख्य रूप से सरकारी एजेंसियों या सरकारी उपक्रमों तक सीमित था, जिसके कारण कई बार प्रक्रियाएँ धीमी हो जाती थीं। निजी कंपनियों के आने से न केवल खोज की गति बढ़ेगी बल्कि इसमें आधुनिक तकनीक, डेटा-विश्लेषण, भू-वैज्ञानिक सर्वे और उन्नत मशीनरी का भी इस्तेमाल बढ़ने की संभावना है।

खान क्षेत्रों के विकास में मिलेगी बढ़त

विशेषज्ञों का कहना है कि नए बदलाव देश के खनन क्षेत्र में नई ऊर्जा भरेंगे। इससे—

  • नई खदानों की खोज में तेजी आएगी

  • उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी

  • ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी

  • कोयले के आयात पर निर्भरता घटेगी

देश में बढ़ती बिजली की मांग और औद्योगिक विकास को देखते हुए यह निर्णय समय की जरूरत माना जा रहा है।

निगरानी और गुणवत्ता मानकों पर विशेष ध्यान

कोयला मंत्रालय ने यह भी साफ किया है कि निजी कंपनियों की एंट्री के बावजूद गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों में कोई समझौता नहीं होगा। NABET द्वारा मान्यता प्राप्त एजेंसियों को निर्धारित प्रोटोकॉल और तकनीकी मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा। सरकार इन एजेंसियों की कार्यशैली की निरंतर निगरानी करेगी।

ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा सुधार माने जा रहा निर्णय

विश्लेषकों के मुताबिक, यह कदम ‘खनन क्षेत्र में निजी भागीदारी बढ़ाने’ की नीति के अनुरूप है। आने वाले वर्षों में इससे खनन निवेश, रोजगार और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

कुल मिलाकर, कोयला खोज के क्षेत्र में निजी कंपनियों की आधिकारिक एंट्री देश के ऊर्जा ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा और प्रभावशाली फैसला माना जा रहा है।


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