ग्राफ्टेड बैंगन की खेती ने बदली किसान कंदर्प नायक की किस्मत, अब बेटे को आईसीएआर नई दिल्ली में दिला रहे उच्च शिक्षा
गरियाबंद/देवभोग (गंगा प्रकाश)। कभी धान की पारंपरिक खेती कर सीमित आय में परिवार का पालन-पोषण करने वाले देवभोग विकासखंड के ग्राम करचिया निवासी प्रगतिशील किसान कंदर्प नायक आज आधुनिक उद्यानिकी खेती की बदौलत सफलता की नई मिसाल बन चुके हैं। ग्राफ्टेड बैंगन की वैज्ञानिक खेती ने न केवल उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया, बल्कि उनके परिवार के सपनों को भी नई उड़ान दी है।

करीब 12 वर्ष पहले तक कंदर्प नायक की आजीविका पूरी तरह धान की खेती पर निर्भर थी। बढ़ती लागत और कम आमदनी के कारण परिवार की जरूरतों को पूरा करना भी चुनौती बन गया था। ऐसे समय में उद्यानिकी विभाग के संपर्क में आने के बाद उन्होंने खेती में बदलाव का निर्णय लिया। विभाग के मार्गदर्शन में उन्होंने राष्ट्रीय कृषि विकास योजना का लाभ उठाते हुए ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग और ग्राफ्टेड बैंगन की खेती अपनाई।
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नई तकनीकों के इस्तेमाल से सिंचाई के लिए पानी की खपत कम हुई, पौधों में रोगों का प्रभाव घटा और उत्पादन पहले की तुलना में काफी बढ़ गया। कम लागत में बेहतर उत्पादन मिलने से उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। वर्तमान में वे एक एकड़ भूमि में ग्राफ्टेड बैंगन की सफल खेती कर रहे हैं और लगातार अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं।

कंदर्प नायक बताते हैं कि उद्यानिकी विभाग द्वारा समय-समय पर दिए गए प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन ने उनकी खेती को नई दिशा दी। इसी का परिणाम है कि आज वे खेती से होने वाली आय के बल पर अपने बेटे को आईसीएआर, नई दिल्ली में उच्च शिक्षा दिला रहे हैं।
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उनकी सफलता यह साबित करती है कि यदि किसान पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक तकनीकों और सरकारी योजनाओं का सही उपयोग करें तो खेती को लाभ का व्यवसाय बनाया जा सकता है। कंदर्प नायक की यह प्रेरक यात्रा आज क्षेत्र के किसानों के लिए बदलाव और आत्मनिर्भरता का संदेश बन गई है।




