Cgbrekings news: पोड़ी उपरोड़ा में मनरेगा तकनीकी सहायक को नियमविरुद्ध कार्यक्रम अधिकारी की जिम्मेदारी, पारदर्शिता और जवाबदेही पर उठे सवाल

 

कोरबा/पोड़ी/उपरोड़ा (गंगा प्रकाश)। छत्तीसगढ़ के पोड़ी उपरोड़ा जनपद में मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) योजना से जुड़ी एक गंभीर प्रशासनिक लापरवाही उजागर हुई है, जहां एक तकनीकी सहायक को बिना निर्धारित प्रक्रिया के कार्यक्रम अधिकारी का दायित्व सौंप दिया गया है। यह मामला न सिर्फ विभागीय नियमों का उल्लंघन है, बल्कि योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही की बुनियाद को भी चुनौती देता है।

जनपद कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, तकनीकी सहायक दिलीप मेहता को कार्यक्रम अधिकारी का अस्थायी प्रभार सौंपा गया है। वे न केवल मनरेगा कार्यों का तकनीकी मूल्यांकन कर रहे हैं, बल्कि मजदूरी भुगतान जैसे वित्तीय कार्यों को भी स्वयं देख रहे हैं। इससे कार्यों की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं क्योंकि मूल्यांकन और भुगतान जैसी जिम्मेदारियाँ एक ही व्यक्ति को देना, हितों के टकराव (Conflict of Interest) का स्पष्ट उदाहरण है।

वर्तमान में पोड़ी उपरोड़ा ब्लॉक में 16 तकनीकी सहायक और जिले भर में 38 तकनीकी सहायक कार्यरत हैं। इसके बावजूद दिलीप मेहता को नियमविरुद्ध दोहरी जिम्मेदारी सौंपे जाने से यह संदेह गहराता है कि क्या यह निर्णय किसी रसूख या सिफारिश के दबाव में लिया गया है?

मनरेगा कार्यक्रम अधिकारी का कार्यक्षेत्र विशिष्ट होता है जिसमें कार्य योजना का आकलन, मजदूरों को समय पर रोजगार उपलब्ध कराना, भुगतान की प्रक्रिया की निगरानी, सामाजिक अंकेक्षण में भागीदारी और ग्राम पंचायतों से प्राप्त प्रस्तावों की समीक्षा शामिल होती है। वहीं तकनीकी सहायक का कार्य मुख्यतः कार्य की तकनीकी योजना, मापन, प्राकलन और गुणवत्ता परीक्षण तक सीमित होता है।

जानकारों का मानना है कि इस प्रकार की दोहरी जिम्मेदारी से मजदूरों को समय पर भुगतान, कार्य गुणवत्ता की निगरानी और योजना की पारदर्शिता प्रभावित हो सकती है। साथ ही यह प्रशासनिक प्रणाली में अव्यवस्था और पक्षपात को बढ़ावा देता है।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, जनपद में बगैर पंचायत प्रस्तावों के कार्यों की स्वीकृति, अघोषित ठेकेदारी प्रणाली और कागज़ों में चल रही योजनाओं जैसी गंभीर शिकायतें भी सामने आ रही हैं। ऐसे में तकनीकी सहायक को ही कार्यक्रम अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपना प्रशासन की मंशा और कार्यशैली पर सवाल खड़ा करता है।

जनता और जनप्रतिनिधियों की मांग है कि इस प्रकरण की स्वतंत्र जांच कराई जाए और यदि अनियमितता पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई सुनिश्चित हो। ताकि मनरेगा जैसी जन-हितैषी योजना में पारदर्शिता बनी रहे और लाभार्थियों को उनका अधिकार समय पर मिले।

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