वट सावित्री व्रत पर नगर से गांव तक दिखी आस्था की अनूठी छटा, मंदिरों और वट वृक्ष स्थलों पर उमड़ी महिलाओं की भीड़
छुरा (गंगा प्रकाश)। नगर सहित आसपास के ग्रामीण अंचलों में शनिवार को वट सावित्री व्रत श्रद्धा, आस्था और पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया गया। सुबह सूर्योदय से ही सुहागिन महिलाओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। महिलाओं ने निर्जला व्रत रखकर अपने पति की दीर्घायु, अखंड सौभाग्य, सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की। नगर के मंदिरों, तालाब किनारे स्थित प्राचीन वट वृक्षों तथा विभिन्न पूजा स्थलों पर सुबह से ही महिलाओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।
पारंपरिक परिधानों में सजी-धजी महिलाएं सोलह श्रृंगार कर पूजा स्थलों पर पहुंचीं, जहां पूरे विधि-विधान एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ वट वृक्ष की पूजा-अर्चना की गई। महिलाओं ने जल, रोली, अक्षत, फूल, फल एवं पूजन सामग्री अर्पित कर वट वृक्ष के चारों ओर कच्चा धागा लपेटते हुए परिक्रमा की। पूजा के दौरान महिलाओं ने सावित्री-सत्यवान की पौराणिक कथा का श्रवण किया और परिवार की सुख-शांति एवं समृद्धि के लिए प्रार्थना की।
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पूजा स्थलों पर दिनभर भक्तिमय वातावरण बना रहा। कहीं महिलाएं सामूहिक रूप से भजन-कीर्तन करती नजर आईं तो कहीं पारंपरिक गीतों की मधुर स्वर लहरियों से माहौल आध्यात्मिक रंग में रंग गया। नगर के प्रमुख मंदिरों एवं वट वृक्ष स्थलों पर महिलाओं ने एक-दूसरे को वट सावित्री पर्व की शुभकामनाएं देते हुए मंगलमय वैवाहिक जीवन की कामना की।
महिलाओं ने बताया कि वट सावित्री व्रत भारतीय संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों और पति-पत्नी के अटूट प्रेम एवं विश्वास का प्रतीक माना जाता है। यह पर्व केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि परिवार की एकता, समर्पण और संस्कारों को भी मजबूत करने का संदेश देता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार माता सावित्री ने अपने अटल संकल्प, तपस्या और पतिव्रता धर्म के बल पर यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे। उसी पौराणिक आस्था और विश्वास के साथ सुहागिन महिलाएं यह व्रत रखती हैं तथा अखंड सौभाग्य और पति की लंबी आयु की कामना करती हैं।
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छुरा नगर के अलावा आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी वट सावित्री पूजा को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला। गांव-गांव में महिलाओं ने सामूहिक रूप से पूजा कर परंपराओं का निर्वहन किया। सुबह से लेकर देर दोपहर तक पूजा स्थलों पर महिलाओं की आवाजाही लगातार बनी रही।
पूरे दिन नगर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में धार्मिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक वातावरण बना रहा। महिलाओं ने एक-दूसरे के सुखद वैवाहिक जीवन और परिवार की खुशहाली की कामना करते हुए इस पावन पर्व को श्रद्धा, उल्लास और भक्ति भाव के साथ संपन्न किया।
