छुरा (गंगा प्रकाश)। प्रदेश में आज भी गौपालन एक बड़ा लघु उद्योग है। घर–घर दूध पहुंचाने वाले परंपरागत पशुपालक और छोटी डेयरियां खासकर ग्रामीण व शहरी इलाकों में दुग्ध आपूर्ति की रीढ़ मानी जाती हैं। लेकिन हाल के दिनों में दूध उत्पाद से जुड़ी एक बड़ी कंपनी द्वारा जारी प्रचार पत्रक (पंपलेट) ने पूरे प्रदेश में विवाद खड़ा कर दिया है। इसे लेकर परंपरागत दुग्ध व्यवसाय से जुड़े लोगों में गहरी नाराजगी और पीड़ा देखने को मिल रही है।

*वचन कंपनी का पंपलेट बना विवाद की जड़*

गौपालकों के अनुसार, वचन कंपनी दूध डेयरी द्वारा रायपुर सहित अन्य क्षेत्रों में घर–घर पंपलेट बांटे गए हैं। इन पंपलेट्स में गांव से आने वाले दूध को दूषित बताने का दावा किया गया है। इसमें कहा गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों की गायें जमीन पर बैठती हैं, गंदे वातावरण में रहती हैं, दूध दुहने का स्थान अस्वच्छ होता है, जंग लगे व गंदे डिब्बों में दूध रखा जाता है, दूध में दूषित पानी की मिलावट होती है और खुला व असुरक्षित वितरण किया जाता है। पंपलेट में लोगों से ऐसे दूध को न खरीदने की अपील की गई है।
इस प्रचार को परंपरागत पशुपालक अपने व्यवसाय पर सीधा हमला मान रहे हैं। उनका कहना है कि वर्षों से वे शुद्ध दूध की आपूर्ति करते आ रहे हैं और इस तरह के दुष्प्रचार से उनकी आजीविका पर संकट खड़ा किया जा रहा है।

*लघु व्यवसायों पर प्रहार – रमेश यदु*

इस मामले में सर्व यादव समाज के प्रदेश अध्यक्ष रमेश यदु ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यह कृत्य लघु एवं छोटे दुग्ध व्यवसायों पर सीधा प्रहार है और बहुराष्ट्रीय कंपनियों को लाभ पहुंचाने की साजिश प्रतीत होती है।
रमेश यदु के अनुसार, इस तरह के भ्रमजाल फैलाकर परंपरागत गौपालकों की छवि खराब करने का प्रयास अत्यंत निंदनीय है।

*प्रदेशभर में आंदोलन की तैयारी*

विवाद के बाद बिलासपुर, रायपुर, भाटापारा और बलौदा बाजार क्षेत्रों में पशुपालकों की बैठकों का दौर शुरू हो गया है। इसी कड़ी में भाटापारा में आयोजित बैठक में वचन कंपनी के पंपलेट की कड़ी निंदा की गई। बैठक में निर्णय लिया गया कि 24 दिसंबर को भाटापारा सहड़ा देव स्थल से पशुपालकों की विशाल रैली निकाली जाएगी, जो एसडीएम कार्यालय भाटापारा पहुंचकर मुख्यमंत्री, पशुपालन मंत्री और कलेक्टर बलौदा बाजार के नाम ज्ञापन सौंपेगी।
इसके अलावा 26 दिसंबर को प्रदेशभर में सभी कलेक्टरों और तहसीलदारों को ज्ञापन सौंपकर दुष्प्रचार करने वाली कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाएगी।

*पशुपालकों में रोष, कार्रवाई की मांग*

पशुपालकों का कहना है कि यदि समय रहते इस तरह के भ्रामक प्रचार पर रोक नहीं लगी, तो लाखों ग्रामीण परिवारों की आजीविका प्रभावित होगी। उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष जांच और दोषी कंपनी के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग की है।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस विवाद पर क्या रुख अपनाता है और परंपरागत गौपालकों की चिंता का समाधान कैसे किया जाता है।


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