एक साल बीता, सड़क अधूरी — मिट्टी पूरी, जांच की उठी मांग
गरियाबंद (गंगा प्रकाश)। प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय अभियान के तहत आदिवासी और विशेष पिछड़ी जनजाति बाहुल्य वनांचल क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से बनाई जा रही कोटरी छापर से भुइयाडेरा सड़क अब विकास का प्रतीक बनने के बजाय गंभीर आरोपों का केंद्र बन गई है। करोड़ों रुपये की लागत से बन रही इस सड़क में मिट्टी और मुरम के बड़े पैमाने पर अवैध उत्खनन और परिवहन का मामला सामने आया है। आरोप है कि सड़क निर्माण के नाम पर आसपास के खेतों और जंगल क्षेत्रों से बिना वैधानिक अनुमति हजारों ट्रैक्टर मिट्टी-मुरम उठाकर उपयोग की गई, जिससे शासन को लाखों रुपये की रॉयल्टी का नुकसान हुआ है।
यह सड़क जिला मुख्यालय से लगभग 10 किलोमीटर दूर जंगल के बीचोबीच बनाई जा रही है। शासन ने इसके लिए 1 करोड़ 11 लाख 40 हजार रुपये की लागत स्वीकृत की है। कार्य प्रारंभ की तिथि 18 जनवरी 2025 तय की गई थी और पूर्णता की समय-सीमा 18 जनवरी 2026 निर्धारित है। लेकिन लगभग एक वर्ष बीत जाने के बावजूद सड़क का काम आधा भी पूरा नहीं हो पाया है। अब तक केवल करीब ढाई किलोमीटर हिस्से में मिट्टी और मुरम डालने का कार्य हुआ है। न तो गिट्टी का काम पूरी तरह शुरू हुआ है और न ही डामरीकरण की प्रक्रिया।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि जिस रफ्तार से काम चल रहा है, उससे तय समय-सीमा में सड़क का पूर्ण होना मुश्किल दिखाई दे रहा है। इससे भी ज्यादा गंभीर चिंता इस बात की है कि जो मिट्टी और मुरम सड़क में डाली जा रही है, वह कहां से लाई जा रही है और किस वैधानिक प्रक्रिया के तहत लाई जा रही है।
हजारों ट्रिप, लेकिन रॉयल्टी का कोई हिसाब नहीं
क्षेत्रीय लोगों और सूत्रों के अनुसार सड़क निर्माण के लिए अब तक हजारों ट्रिप मिट्टी और मुरम का परिवहन किया जा चुका है। आरोप है कि यह सामग्री जिले में स्वीकृत खदानों से नहीं, बल्कि आसपास के खेतों, जंगलों और अन्य स्थलों से अवैध रूप से खुदाई कर लाई गई है। जबकि जिले में शासन द्वारा कई मुरम खदानों को वैधानिक स्वीकृति दी गई है, जहां से सामग्री लेने पर नियमानुसार रॉयल्टी जमा होती है। इसके विपरीत, यहां उपयोग की जा रही मिट्टी-मुरम के साथ न तो रॉयल्टी पर्ची दिखाई दे रही है और न ही खनिज विभाग से संबंधित कोई स्पष्ट अनुमति सार्वजनिक रूप से सामने आई है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि हजारों ट्रिप सामग्री बिना रॉयल्टी के उपयोग हुई है, तो इससे शासन को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान होना तय है। यह न केवल खनिज नियमों का उल्लंघन है, बल्कि सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है।

खेत और जंगल हो रहे छलनी
अवैध खुदाई को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। लोगों का आरोप है कि खेतों और जंगल क्षेत्रों से मुरम और मिट्टी निकालने से कई जगह बड़े गड्ढे बन गए हैं। इससे खेती योग्य भूमि खराब हो रही है और बारिश के मौसम में जलभराव, कटाव और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। वन क्षेत्रों में खुदाई से पर्यावरणीय संतुलन पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि जिस योजना का उद्देश्य आदिवासी अंचल का विकास है, यदि उसी योजना के तहत आदिवासी इलाकों की जमीन और जंगल को नुकसान पहुंचाया जा रहा है, तो यह विकास नहीं बल्कि विनाश होगा।
ठेकेदार का बयान, पर सवाल बरकरार
जब इस संबंध में सड़क निर्माण कार्य से जुड़े ठेकेदार से सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि मिट्टी और मुरम के लिए पंचायत से अनुमति ली गई है और कलेक्टर को इसकी जानकारी है। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि खनिज विभाग से विधिवत खनन अनुमति ली गई है या नहीं और रॉयल्टी का भुगतान किस मद में किया जा रहा है। मौके पर किसी भी ट्रैक्टर के साथ रॉयल्टी पर्ची या खनिज पास नजर नहीं आने से संदेह और गहराता है।

आगे और बढ़ सकता है खेल
सूत्रों का कहना है कि अभी तो केवल प्रारंभिक परत के रूप में मिट्टी और मुरम डाली गई है। आगे गिट्टी बिछाने और उसके बाद पुनः मुरम की जरूरत पड़ेगी। ऐसे में आशंका है कि यदि अभी कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले महीनों में अवैध खनन और परिवहन का यह खेल और बड़े पैमाने पर हो सकता है।
जांच की उठी मांग
ग्रामीणों, सामाजिक संगठनों और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों ने मांग की है कि जिला प्रशासन, खनिज विभाग, वन विभाग और निर्माण एजेंसी की संयुक्त टीम बनाकर पूरे मामले की जांच की जाए। यह स्पष्ट किया जाए कि अब तक कितनी मात्रा में मिट्टी-मुरम का उपयोग हुआ है, वह कहां से लाई गई है, कितनी रॉयल्टी जमा की गई है और कार्य की प्रगति तय मानकों के अनुरूप है या नहीं। साथ ही यदि अवैध खनन की पुष्टि होती है, तो संबंधित ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
अब यह देखना अहम होगा कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू करता है या फिर यह मामला भी अन्य आरोपों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा। फिलहाल इतना तय है कि करोड़ों रुपये की इस सड़क योजना पर उठे सवालों ने पूरे इलाके में हलचल पैदा कर दी है।

There is no ads to display, Please add some



