सत्र शुरू हुए महीने बीत गए, बच्चों को अब तक नहीं मिली ड्रेस, मीडिया को भी परिसर में घुसने से रोका
भूषण सेठिया
भैरमगढ़/बीजापुर (गंगा प्रकाश)। जिले के भैरमगढ़ विकासखंड स्थित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में अव्यवस्थाओं का आलम है। लगभग 220 बच्चों के रहने वाले इस बड़े छात्रावास में शौचालय की मूलभूत सुविधा तक बदहाल है, जिससे मासूम छात्र रोजाना परेशान हो रहे हैं। छात्रों और अभिभावकों ने विद्यालय के प्राचार्य ओम प्रकाश गुप्ता पर एकतरफा राज चलाने और शिकायतों को अनसुना करने का गंभीर आरोप लगाया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, छात्रावास परिसर में कई शौचालय बने हुए हैं, लेकिन उनमें से महज दो ही सुचारू रूप से काम कर रहे हैं। बाकी सभी शौचालय जर्जर हालत में हैं और उपयोग लायक नहीं हैं। ऐसे में 220 छात्रों को सुबह से शाम तक शौचालय के लिए लंबी कतार में लगना पड़ता है।
बच्चों को अब तक नहीं मिली ड्रेस
कुछ बच्चों से जब हमने बात की तो उन्होंने बताया कि अभी तक उन्हें स्कूल ड्रेस भी नहीं मिली है। नया शैक्षणिक सत्र शुरू हुए महीनों बीत चुके हैं, बावजूद इसके बच्चे बिना गणवेश के ही स्कूल आने को मजबूर हैं।
सबसे चिंताजनक स्थिति छोटे बच्चों की है। पेयजल और निस्तारी के लिए पानी की समुचित व्यवस्था न होने से छोटे-छोटे बच्चे स्वयं नीचे से ऊपर तक पानी ढोने को मजबूर हैं, जो उनकी उम्र और सुरक्षा दोनों के लिहाज से गंभीर विषय है। छात्रों ने बताया कि इस संबंध में कई बार प्राचार्य से मौखिक और लिखित शिकायत की गई, लेकिन प्राचार्य के कानों में जूं तक नहीं रेंगी।
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मीडिया को रोका
जब यह मामला सूत्रों के हवाले से मीडिया तक पहुंचा तो भैरमगढ़ के कुछ मीडिया कर्मियों ने वस्तुस्थिति जानने के लिए विद्यालय परिसर में जाने का प्रयास किया। इस दौरान उन्होंने अधीक्षक शेखर गुप्ता से संपर्क किया, जिन्होंने प्राचार्य को इस संबंध में सूचना दी। आरोप है कि प्राचार्य ओम प्रकाश गुप्ता ने मीडिया कर्मियों को परिसर में प्रवेश देने से साफ इनकार कर दिया।
प्राचार्य का कहना था कि यदि आपको आश्रम या स्कूल के अंदर आना है तो एसी ट्राइबल या डीएम साहब की अनुमति लेकर आइए, अन्यथा मेरे स्कूल में कोई नहीं घुस सकता। वहीं जब कुछ अभिभावकों से बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने भी माना कि आश्रम में व्यवस्थाएं सुचारू रूप से संचालित नहीं हो रही हैं।
एकलव्य जैसे प्रतिष्ठित आवासीय विद्यालय में इस तरह की लापरवाही न केवल छात्रों के स्वास्थ्य और स्वच्छता के अधिकार का हनन है, बल्कि शासन की आदिवासी छात्र हितैषी योजनाओं पर भी सवाल खड़े करती है। जिले के पीएमश्री एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय भैरमगढ़ में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को मूलभूत सुविधाओं के अभाव का सामना करना पड़ रहा है। परिजनों और सामाजिक संगठनों ने आरोप लगाया है कि विद्यालय परिसर में शौचालयों की संख्या बेहद कम है तथा उपलब्ध शौचालयों में से कई खराब पड़े हैं, जिससे विद्यार्थियों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
मिली जानकारी के अनुसार विद्यालय के बालक एवं बालिका छात्रावास में लगभग 220-220 विद्यार्थी निवासरत हैं। इसके बावजूद प्रत्येक छात्रावास में केवल दो-दो शौचालय उपलब्ध हैं। इनमें से भी कुछ शौचालय उपयोग योग्य नहीं हैं। ऐसी स्थिति में कई विद्यार्थियों को शौच के लिए छात्रावास परिसर से बाहर जंगल की ओर जाना पड़ता है। इससे विद्यार्थियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और गरिमा से जुड़े गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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परिजनों का आरोप है कि बालिका छात्रावास में सैनिटरी पैड की नियमित उपलब्धता भी सुनिश्चित नहीं की जा रही है। इससे छात्राओं को विशेष रूप से कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि आवासीय विद्यालय में रहने वाले बच्चों को स्वच्छता और स्वास्थ्य संबंधी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रबंधन की प्राथमिक जिम्मेदारी है, लेकिन वर्तमान व्यवस्थाएं विद्यार्थियों की जरूरतों के अनुरूप नहीं हैं।
प्राचार्य को लेकर पहले भी उठ चुके हैं सवाल
विद्यालय के प्राचार्य ओम प्रकाश को लेकर पूर्व में भी प्रशासनिक स्तर पर शिकायतें सामने आ चुकी हैं। कलेक्टर बीजापुर द्वारा राज्य स्तरीय आदिम जाति कल्याण, आवासीय एवं आश्रम शैक्षणिक संस्थान समिति को भेजे गए पत्र में मानसिक एवं प्रशासनिक प्रताड़ना, असहयोगात्मक व्यवहार तथा प्रशासनिक और शैक्षणिक कमियों का उल्लेख किया गया था। पूर्व में गठित जांच समिति तथा जिला पंचायत के निरीक्षण प्रतिवेदन में भी विद्यालय की व्यवस्थाओं पर गंभीर टिप्पणियां दर्ज की गई थीं।
शिकायतों की होगी जांच : सहायक आयुक्त
मामले पर सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग देवेंद्र सिंह ने कहा कि एकलव्य आवासीय विद्यालय भैरमगढ़ में शौचालयों की खराब स्थिति एवं सैनिटरी पैड की उपलब्धता से संबंधित शिकायतों की जांच कराई जाएगी। उन्होंने आश्वस्त किया कि व्यवस्थाओं में सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे ताकि विद्यार्थियों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
