Narmada Jayanti 2026 , नई दिल्ली। हिंदू पंचांग में माघ मास को अत्यंत पुण्यदायी माना गया है और जब इसी महीने की शुक्ल सप्तमी तिथि पर दो बड़े पर्व एक साथ पड़ जाएं, तो उसका धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है। वर्ष 2026 में माघ शुक्ल सप्तमी के दिन रथ सप्तमी और नर्मदा जयंती का शुभ संयोग बन रहा है। यह संयोग न केवल दुर्लभ है, बल्कि भक्तों के लिए आरोग्य, सुख-शांति और मोक्ष की कामना को पूर्ण करने वाला भी माना जाता है।
Narmada Jayanti 2026 : रथ सप्तमी के साथ नर्मदा जयंती का दुर्लभ संयोग, जानें पूजा विधि और महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रथ सप्तमी सूर्यदेव को समर्पित पर्व है, जबकि नर्मदा जयंती मोक्षदायिनी मां नर्मदा के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाई जाती है। इस दिन अग्नि (सूर्य) और जल (नर्मदा) की संयुक्त पूजा का विशेष महत्व होता है।
रथ सप्तमी का धार्मिक महत्व
रथ सप्तमी को सूर्य जयंती भी कहा जाता है। मान्यता है कि इसी दिन सूर्यदेव अपने रथ पर आरूढ़ होकर उत्तरायण की ओर अग्रसर हुए थे। इस दिन सूर्य की पूजा करने से रोग, शोक और दरिद्रता का नाश होता है। आयुर्वेद और ज्योतिष दोनों में सूर्य को आरोग्य और आत्मबल का कारक माना गया है।

नर्मदा जयंती का महत्व
पुराणों के अनुसार मां नर्मदा का प्राकट्य भगवान शिव के तप से हुआ था। कहा जाता है कि नर्मदा के दर्शन मात्र से पापों का नाश हो जाता है और स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसीलिए मां नर्मदा को “मोक्षदायिनी” कहा गया है। नर्मदा जयंती के दिन नदी तटों पर विशेष पूजा, दीपदान और भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाता है।

शुभ योग का फल
इस वर्ष रथ सप्तमी और नर्मदा जयंती का एक साथ होना अत्यंत शुभ माना जा रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस दिन सूर्य पूजा के साथ जल तत्व की आराधना करने से जीवन में संतुलन, मानसिक शांति और स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होता है। यह दिन विशेष रूप से रोगों से मुक्ति, पारिवारिक सुख और आध्यात्मिक उन्नति के लिए श्रेष्ठ माना गया है।

There is no ads to display, Please add some


