रायपुर(गंगा प्रकाश)। बंग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अमानवीय अत्याचारों, भारत के हमारे राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे के अपमान पर छत्तीसगढ़ डायोसिस के सचिव एवं समाजसेवी नितिन लॉरेन्स समेत अन्य पदाधिकारियों एवं समाजसेवी जनों के साथ तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने बंग्लादेषी राष्ट्रपति की नाकामी एवं मानव अधिकारों के हनन की भर्त्सना की है। समाज सेवी श्री लॉरेन्स ने कहा कि युनाइटेड नेशन्स एवं अंतरराष्ट्रीय पटल पर भी सभी बतौर मूकदर्षक इस अत्याचार को चलचित्र की भांति देख रहें हैं। बंग्लादेष में लगातार अल्पसंख्यको जिनमें सनातन हिन्दू धर्म एवं ईसाई धर्म के लोग हैं वे अमानवीय पीड़ा का सामना कर रहें है अल्पसंख्यकों पर हमले, लूट, हत्या आगजनी एवं महिलाओं पर हो रहे जुल्म को किसी लेखनी अथवा फिल्म के द्वारा नहीं दर्शाया जा सकता है। ऐसे में अखण्ड भारत के राष्ट्रपति महामहिम द्रौपदी मुर्मू एवं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी को अंतरराष्ट्रीय पटल पर इस मुद्दे को जोर शोर से उठाकर इसके समाधान हेतु कड़े कदम उठाने की दिशा में कार्य करना चाहिए। जिस देश की आजादी के लिए भारतीयों ने अपनी जान दी है उसी देश में भारतीय मूल के लोगों पर अत्याचार होना खोखली एवं सांप्रदायिक बंगलादेशी सरकार की छबि को वैश्विक पटल पर बेनकाब कर रही है। युनाइटेड नेशन्स से अपील है कि ऐसे देश की सदस्यता यू एन से समाप्त की जानी चाहिए। जहां मानव अधिकारों की खुले आम हत्या एवं बलात्कार किया जा रहा है। इस संबंध में अतिशीघ्र महामहिम राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौंप कर उनसे बंग्लादेश में निवासरत भारतीय मूल के अल्पसंख्यकों के अधिकारों की सुरक्षा एवं धार्मिक स्वतंत्रता हेतु ठोस सार्थक कदम उठाने की मांग की जाएगी।
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