CG:पिता के जन्मदिन पर शिक्षिका ने रचा सेवा पर्व! ‘न्योता भोज’ में बाँटी मुस्कानें, बच्चों ने कहा – धन्यवाद दीदी!
गरियाबंद/राजिम (गंगा प्रकाश)। पिता के जन्मदिन पर शिक्षिका ने रचा सेवा पर्व! कहते हैं, इंसान के पास जितना भी हो, वह तब तक अधूरा है जब तक उसका कुछ हिस्सा दूसरों की खुशी के लिए खर्च न किया जाए। मंगलवार को छत्तीसगढ़ के राजिम में ऐसा ही नज़ारा देखने को मिला, जिसने यह साबित कर दिया कि जन्मदिन केवल केक काटने और पार्टियों तक सीमित नहीं है, बल्कि सेवा और संस्कार से भी जुड़ा हो सकता है।

यह प्रेरक आयोजन किया सेजेस स्कूल राजिम में पदस्थ व्याख्याता समीक्षा गायकवाड़ ने, जिन्होंने अपने पिताजी के जन्मदिन को यादगार बनाने के लिए बच्चों की सेवा का रास्ता चुना। समीक्षा गायकवाड़ के इस अनोखे संकल्प ने ना सिर्फ उनके परिवार को गौरवान्वित किया, बल्कि समाज को भी सोचने पर मजबूर कर दिया कि खुशियाँ बांटने का सबसे बड़ा तरीका है – सेवा।
‘न्योता भोज’ बना प्रेरणा का माध्यम
राजिम के शासकीय पूर्व माध्यमिक बालक शाला में मंगलवार को प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना के तहत ‘न्योता भोज’ का आयोजन किया गया। इस भोज में समीक्षा गायकवाड़ ने अपने पिताजी के जन्मदिन पर विद्यालय के सभी बच्चों को विशेष पौष्टिक भोजन का उपहार दिया।
भोजन वितरण के दौरान शिक्षक और विद्यार्थी, दोनों के चेहरे खुशी से खिल उठे। बच्चे भी उत्साहित थे कि आज उन्हें रोज के भोजन से अलग स्वादिष्ट व्यंजन मिल रहे थे। भोजन में विशेष रूप से खीर, सब्जी-पूड़ी, चावल-दाल, और मौसमी फल शामिल थे।
पिता के नाम किया सेवा का समर्पण
इस अवसर पर समीक्षा गायकवाड़ ने कहा, – “मेरे पिताजी मेरे जीवन के सबसे बड़े प्रेरणा स्रोत हैं। उन्होंने हमेशा सिखाया कि जितना हो सके, दूसरों की मदद करो। इसलिए मैंने तय किया कि उनके जन्मदिन को बच्चों की सेवा से जोड़ूँ, ताकि ये बच्चे भी इस खुशी का हिस्सा बनें और पिताजी को यही मेरी सच्ची भेंट होगी।”
शिक्षक भी बने सहयोगी, भोजन परोसा और आशीर्वाद दिया
इस अवसर पर प्राचार्य संजय एक्का, वरिष्ठ व्याख्याता बी.एल. ध्रुव, शिक्षक सागर शर्मा और प्रधानपाठक अजयगिरी गोस्वामी सहित कई शिक्षक मौजूद रहे। सभी ने स्वयं भोजन परोसने में भाग लिया।
खुद प्राचार्य ने कहा, – “समीक्षा दीदी का यह प्रयास बेहद प्रेरणादायक है। आज बच्चों को भोजन के साथ-साथ एक बड़ा संदेश भी मिला – ‘खुशी तब और बढ़ती है जब उसे बांटा जाए।’”
‘न्योता भोज’ क्या है?
मुख्यमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना के अंतर्गत ‘न्योता भोज’ एक अभिनव पहल है, जिसमें कोई भी समाजसेवी, कर्मचारी, शिक्षक, व्यापारी अथवा आम नागरिक अपने खास अवसर जैसे जन्मदिन, शादी की वर्षगांठ या पुण्यतिथि पर विद्यालयों में पौष्टिक भोजन उपलब्ध करवा सकता है।
इससे बच्चों को अतिरिक्त पोषण तो मिलता ही है, साथ ही सामाजिक समरसता, साझा संस्कृति और सेवा संस्कार को भी मजबूती मिलती है।
गुरुजनों की गरिमामयी उपस्थिति
इस आयोजन में शिक्षकगण एन.एल. साहू, कंचन शर्मा, एन.आर. साहू, राकेश साहू, संतोष सूर्यवंशी, कमल सोनकर, मधु गुप्ता, अंजू मार्कण्डे, राकेश ठाकुर समेत अनेक शिक्षक उपस्थित थे। भोजन परोसते वक्त हर शिक्षक ने बच्चों को आशीर्वाद भी दिया, जिससे आयोजन का माहौल और भी आत्मीय बन गया।
बच्चों के चेहरे खिले
भोजन वितरण के बाद बच्चों ने समीक्षा गायकवाड़ को घेर लिया। किसी ने कहा “धन्यवाद दीदी!”, तो कोई बोला “हमेशा ऐसे ही आते रहना।” उनकी मासूम मुस्कुराहट और चमकती आँखों ने यह जता दिया कि भोजन सिर्फ पेट नहीं भरता, बल्कि दिल भी भरता है।
समाज के लिए संदेश
पिता के जन्मदिन पर आयोजित यह ‘सेवा पर्व’ यह बताने के लिए काफी है कि खुशियों को मनाने का सबसे सुंदर तरीका है – उन्हें जरूरतमंदों के साथ बाँटना। समीक्षा गायकवाड़ का यह कदम हजारों लोगों के लिए प्रेरणा है कि अपने उत्सवों को समाजसेवा से जोड़ें और संस्कारों को अगली पीढ़ी तक पहुँचाएँ।
समापन पंक्ति
“जन्मदिन पर केक, पार्टी, सजावट तो सब करते हैं, पर किसी का पेट भर कर, किसी के चेहरे पर मुस्कान लाकर जो संतोष मिलता है – वही असली तोहफ़ा है। समीक्षा दीदी ने बता दिया कि खुशी जब बाँटी जाती है, तो वह सिर्फ खुशी नहीं रहती, वह संस्कार बन जाती है।”