जनहित मुद्दों की अनदेखी का आरोप; बैठक में सिर्फ 6 पार्षद रहे मौजूद, कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
छुरा (गंगा प्रकाश)। नगर पंचायत छुरा में गुरुवार को आयोजित सामान्य सभा की बैठक सियासी विवाद का केंद्र बन गई। कांग्रेस के 9 पार्षदों ने सामूहिक रूप से बैठक का हिष्कार कर दिया, जबकि अध्यक्ष पक्ष के केवल 6 पार्षद ही बैठक में शामिल हुए। इस घटनाक्रम ने नगर पंचायत की कार्यप्रणाली, पारदर्शिता और जनहित के मुद्दों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष के इस कदम से नगर की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
सिर्फ कोरम पूरा करने की औपचारिकता बन गई बैठक
नेता प्रतिपक्ष पंचराम टंडन ने आरोप लगाया कि सामान्य सभा की बैठक नियमानुसार हर तीन माह में होनी चाहिए, लेकिन छुरा में यह केवल औपचारिकता बनकर रह गई है। उन्होंने कहा कि पिछले एक वर्ष से बैठकों का आयोजन केवल कोरम पूरा करने के लिए किया जा रहा है, जबकि महत्वपूर्ण जनहित के मुद्दों को एजेंडे से बाहर रखा जा रहा है।
एजेंडा तय करने में मनमानी, पार्षदों को नहीं दी जाती जानकारी
विपक्षी पार्षदों ने नगर पंचायत अध्यक्ष पर एकतरफा कार्यशैली अपनाने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि एजेंडा बिना किसी चर्चा के तैयार कर लिया जाता है और पार्षदों को समय पर इसकी जानकारी नहीं दी जाती। इससे पारदर्शिता प्रभावित हो रही है और जनप्रतिनिधियों की भूमिका सीमित होती जा रही है।
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जनहित के मुद्दों को लगातार किया जा रहा नजरअंदाज
पार्षदों का कहना है कि वे लगातार पेंशन, राष्ट्रीय परिवार सहायता योजना, राशन कार्ड जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाते रहे हैं, लेकिन हर बार जवाब टाल दिया जाता है। अगली बैठक में जवाब देने का आश्वासन दिया जाता है, लेकिन उस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती।
आवास योजना पर असर, पात्र हितग्राही भी परेशान
वार्ड क्रमांक 15 के पार्षद सलीम मेमन ने प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि नियमों में बदलाव के कारण योजना का लाभ प्रभावित हुआ है और पात्र हितग्राही भी इससे वंचित हो रहे हैं। नगर में विकास कार्यों की गति भी पिछले एक वर्ष में धीमी पड़ी है, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।
पुराने काम चल रहे, नए विकास कार्य ठप
विपक्षी पार्षदों ने आरोप लगाया कि वर्तमान में नगर में जो भी निर्माण कार्य हो रहे हैं, वे पूर्व कार्यकाल में स्वीकृत योजनाओं के अंतर्गत हैं। नए विकास कार्यों की शुरुआत नहीं होने से नगर का विकास प्रभावित हो रहा है।
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इंजीनियर नहीं होने से तकनीकी कार्य प्रभावित
नगर पंचायत में नियमित इंजीनियर की नियुक्ति नहीं होने के कारण तकनीकी कार्य प्रभावित हो रहे हैं। निजी इंजीनियरों की मदद से कार्य कराए जा रहे हैं, जिससे गुणवत्ता और पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। आम नागरिकों के अनापत्ति प्रमाण पत्र जैसे कार्य भी समय पर नहीं हो पा रहे हैं।
पार्षद मद की राशि के उपयोग पर विवाद
पार्षदों ने आरोप लगाया कि वार्ड विकास के लिए निर्धारित पार्षद मद की राशि का उपयोग बिजली बिल भुगतान में किया गया है। इससे वार्डों में आवश्यक विकास कार्य प्रभावित हुए हैं और जनता को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
पेयजल संकट और मूलभूत सुविधाओं की कमी
नगर में पेयजल संकट गंभीर होता जा रहा है। कई वार्डों में लोगों को पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। नालियों के ढक्कन की मांग भी लंबे समय से लंबित है, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बनी हुई है।
नामांतरण के मामले लंबित, व्यापारी परेशान
नगर पंचायत के अधीन दुकानों और भवनों के नामांतरण के मामले लंबे समय से अटके हुए हैं। व्यापारियों द्वारा आवेदन देने के बावजूद इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
कर रसीदों में गड़बड़ी, दोबारा भुगतान का दबाव
पार्षद हरीश यादव ने आरोप लगाया कि वर्ष 2018 से 2021 के बीच के करों की रसीदें गायब या नष्ट हो गई हैं। इस कारण नागरिकों को दोबारा कर भुगतान करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इस मामले में अब तक न तो कोई जांच हुई है और न ही जिम्मेदारों पर कार्रवाई।
आंदोलन की चेतावनी, बढ़ सकता है विवाद
विपक्षी पार्षदों ने चेतावनी दी है कि यदि जनहित के मुद्दों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। उन्होंने कहा कि वे जनता के हितों के लिए लगातार आवाज उठाते रहेंगे।
प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
इस पूरे घटनाक्रम के बाद छुरा नगर पंचायत की कार्यप्रणाली और विकास कार्यों पर सवाल खड़े हो गए हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन और सत्ताधारी पक्ष इस विवाद को कैसे सुलझाते हैं और क्या जनहित के मुद्दों पर ठोस पहल की जाती है या नहीं।
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