कमार समाज के उत्थान की योजनाओं के बीच जमीनी हकीकत अलग, बड़ी जलटंकी बंद तो 1000 लीटर की सोलर टंकी के भरोसे पूरा गांव
छुरा (गंगा प्रकाश)। शासन विशेष पिछड़ी जनजातियों, विशेषकर कमार समाज के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए लगातार विभिन्न योजनाएं संचालित कर रहा है। शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने के दावे भी किए जाते हैं। लेकिन गरियाबंद जिले के छुरा विकासखंड से लगभग 12 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत सेमहरा के आश्रित ग्राम छत्तरपुर की तस्वीर इन दावों पर सवाल खड़े करती नजर आती है।
गांव में पेयजल समस्या के समाधान के लिए बड़ी पानी टंकी का निर्माण तो करा दिया गया, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि आज तक उससे नियमित जलापूर्ति शुरू नहीं हो सकी। नतीजा यह है कि पूरा गांव एक 1000 लीटर क्षमता वाली सोलर जलटंकी के भरोसे अपनी प्यास बुझाने को मजबूर है।
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ग्रामीणों के अनुसार, सोलर सिस्टम तभी काम करता है जब तेज धूप होती है। बादल छाने या बारिश होने पर पानी मिलना मुश्किल हो जाता है। स्थिति को और गंभीर बनाते हुए सोलर पैनल भी क्षतिग्रस्त हो चुका है और जैसे-तैसे संचालित हो रहा है। ऐसे में ग्रामीणों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी पानी जुटाने में भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।
विडंबना यह है कि एक ओर शासन कमार समाज के विकास और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात करता है, वहीं दूसरी ओर छत्तरपुर जैसे गांव में बनी जल संरचना का पूरा लाभ ग्रामीणों तक नहीं पहुंच पा रहा है। यदि करोड़ों या लाखों रुपये खर्च कर पेयजल ढांचा तैयार किया गया है, तो उसका लाभ लोगों को समय पर क्यों नहीं मिल रहा? यह सवाल अब ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।
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ग्रामीणों ने मांग की है कि बड़ी पानी टंकी को शीघ्र चालू कराया जाए, क्षतिग्रस्त सोलर पैनल की मरम्मत कर नियमित पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि विशेष पिछड़ी जनजाति के इस गांव को भी योजनाओं का वास्तविक लाभ मिल सके।
इस संबंध में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग, उपखंड राजिम के सीडीओ नवीन साहू से उनका पक्ष जानने के लिए दूरभाष के माध्यम से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका जिसके कारण उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो पाया है।
