छुरा (गंगा प्रकाश)। नगर के कलार समाज भवन में मंगलवार को कलार समाज के इष्टदेव भगवान सहस्त्रबाहु अर्जुनदेव की जयंती श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाई गई। इस अवसर पर नगर सहित परिक्षेत्र के सैकड़ों समाजजन एकत्रित हुए और पारंपरिक विधि-विधान से भगवान सहस्त्रबाहु अर्जुनदेव की पूजा-अर्चना की। समाज भवन में सुबह से ही भक्ति और जयघोष का वातावरण बना रहा।
कार्यक्रम की शुरुआत भगवान सहस्त्रबाहु अर्जुनदेव के चित्र पर फूल-माला अर्पण, धूप-दीप प्रज्ज्वलन और मंगलाचरण से की गई। सभी ने सामूहिक रूप से अपने इष्टदेव के समक्ष समाज की एकता, प्रगति और समृद्धि की कामना की।

सहस्त्रबाहु अर्जुन — हेहय वंश के प्रतापी राजा
इस अवसर पर समाज के सचिव मिथलेश सिन्हा ने भगवान सहस्त्रबाहु अर्जुनदेव के जीवन और उनके पराक्रम का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि भगवान सहस्त्रबाहु अर्जुन हेहय वंश के महान सम्राट थे, जिनकी राजधानी माहिष्मती नगरी (वर्तमान महेश्वर, मध्यप्रदेश) थी। उनके पिता का नाम कृतवीर्य था और उन्हें भगवान दत्तात्रेय से ऐसा वरदान प्राप्त था, जिससे उन्हें सहस्र भुजाएँ प्राप्त हुईं और वे अजेय योद्धा बन गए। मिथलेश सिन्हा ने कहा —हमारे आराध्य भगवान सहस्त्रबाहु अर्जुन का जीवन केवल पराक्रम का नहीं, बल्कि धर्म की रक्षा और न्याय की स्थापना का प्रतीक है। उनके आदर्श आज भी समाज को शक्ति और प्रेरणा देते हैं।
समाज के वक्ताओं ने दिया एकता का संदेश
सभा को संबोधित करते हुए ग्राम प्रमुख हीरालाल सिन्हा ने कहा कि भगवान सहस्त्रबाहु अर्जुन केवल एक योद्धा नहीं बल्कि क्षत्रिय मर्यादा और पराक्रम के प्रतीक हैं। उन्होंने समाज से आग्रह किया कि अपने गौरवशाली इतिहास को नई पीढ़ी तक पहुंचाएं और एकजुट रहकर सामाजिक उत्थान में योगदान दें।
जिला सलाहकार चिंताराम सिन्हा ने कहा कि कलार समाज का इतिहास बेहद समृद्ध और गौरवशाली रहा है। उन्होंने बताया कि कलार समाज की कुलदेवी रतनपुर स्थित मां महामाया हैं, जिनके मंदिर का निर्माण कलचुरी राजाओं ने किया था। उन्होंने यह भी कहा — हमारा समाज केवल श्रमशील नहीं, बल्कि वीर और विद्वान वंशजों का समाज है। हमें अपने इतिहास पर गर्व करना चाहिए और उसे आने वाली पीढ़ियों तक जीवित रखना चाहिए।

परिक्षेत्र के मंडलेश्वर शिवलाल सिन्हा ने भगवान सहस्त्रबाहु अर्जुनदेव की वीरता का उल्लेख करते हुए बताया कि उन्होंने एक बार रावण को भी युद्ध में परास्त किया था। समाज के परिक्षेत्र सचिव हेमंत सिन्हा ने कहा — हमारा वंश क्षत्रिय परंपरा से जुड़ा है। भगवान सहस्त्रबाहु अर्जुनदेव के बाद भी हमारे वंश में अनेक पराक्रमी राजा हुए, जिन्होंने धर्म और न्याय की रक्षा की।
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सामाजिक एकता और उत्साह से भरा माहौल
इस अवसर पर समाज के वरिष्ठजनों एवं युवाओं ने मिलकर एकता का संकल्प लिया। बालचंद सिन्हा, यशवंत सिन्हा, कुलेश्वर सिन्हा, बेदलाल सिन्हा, अर्जुनधनंजय सिन्हा, पवन सिन्हा, ईश्वरलाल सिन्हा, रोहित सिन्हा, चैतुराम सिन्हा, पूर्वांश सिन्हा, रुद्रांशी सिन्हा, रुपनाथ सिन्हा, देवलाल सिन्हा, बिसाहू सिन्हा, संजय सिन्हा, बलदेव सिन्हा, रितेंद्र सिन्हा, प्रभुलाल सिन्हा, बिसंभर सिन्हा, लिलेश सिन्हा, जगदीश सिन्हा, चुरण सिन्हा, धर्मेंद्र सिन्हा, यश सिन्हा, कुंती सिन्हा, एलिका सिन्हा सहित बड़ी संख्या में माताएँ, बहनें और बच्चे मौजूद थे।
कार्यक्रम के अंत में सामूहिक प्रसाद वितरण और भजन संध्या का आयोजन हुआ, जिसमें भक्ति गीतों से पूरा समाज भवन गूंज उठा।

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