जिले के पहले कृषि अभियंता बने, उच्च क्षमता वाली मूंगफली थ्रेशर पर किया शोध

गरियाबंद (गंगा प्रकाश)। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) के 11वें दीक्षांत समारोह में गरियाबंद जिले के युवा शोधार्थी डॉ. सौरभ कुमार देवांगन को कृषि अभियांत्रिकी विषय में पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई। यह सम्मान उन्हें महामहिम राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री के कर-कमलों द्वारा प्रदान किया गया। इस उपलब्धि के साथ डॉ. सौरभ जिले के पहले ऐसे युवक बन गए हैं जिन्होंने कृषि अभियांत्रिकी में पीएचडी की डिग्री हासिल की है। साथ ही वे प्रदेश के देवांगन समाज के भी पहले व्यक्ति हैं जिन्होंने इस विषय में उच्चतम शैक्षणिक उपलब्धि प्राप्त की है।

किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखकर किया शोध

डॉ. सौरभ कुमार देवांगन ने वर्ष 2022 में पीएचडी में प्रवेश लिया था। उनके शोध का विषय उच्च क्षमता वाली मूंगफली थ्रेशर का विकास रहा। उन्होंने अपने शोध के माध्यम से ऐसी आधुनिक मशीन विकसित करने पर कार्य किया, जो किसानों के लिए कम समय और कम लागत में अधिक उत्पादन सुनिश्चित कर सके।

उन्होंने बताया कि मूंगफली की गहाई की पारंपरिक प्रक्रिया में अधिक समय, श्रम और लागत लगती है। नई थ्रेशर तकनीक से किसानों को इन समस्याओं से राहत मिलेगी। मशीन के उपयोग से श्रम की बचत होगी, उत्पादन लागत घटेगी और किसानों की आय में वृद्धि संभव हो सकेगी।

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तिलहनी फसलों को बढ़ावा देने की सोच

डॉ. देवांगन ने कहा कि उनका उद्देश्य किसानों को केवल धान की खेती तक सीमित न रखकर मूंगफली जैसी तिलहनी फसलों की ओर भी प्रेरित करना है। उनका मानना है कि यदि देश में तिलहनी फसलों का उत्पादन बढ़ेगा तो खाद्य तेल के क्षेत्र में भारत आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ सकेगा और आयात पर निर्भरता कम होगी।

उन्होंने कहा कि कृषि यंत्रीकरण के माध्यम से खेती को अधिक लाभकारी और आधुनिक बनाया जा सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में नई तकनीकों का उपयोग किसानों के जीवन स्तर में सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

ग्रामीण विकास के क्षेत्र में भी सक्रिय

वर्तमान में डॉ. सौरभ कुमार देवांगन नीति आयोग के “एस्पिरेशनल ब्लॉक फेलो” के रूप में कार्यरत हैं। वे ग्रामीण विकास, कृषि नवाचार और किसानों के हित में सतत कार्य कर रहे हैं। उनकी यह उपलब्धि जिले के युवाओं और विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।

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परिवार, गुरुजनों और साथियों को दिया श्रेय

अपनी सफलता पर डॉ. सौरभ ने अपने शोध निदेशक, विश्वविद्यालय के शिक्षकों, परिवारजनों और मित्रों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि उनके लिए अंत नहीं, बल्कि कृषि यंत्रीकरण और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में नए अनुसंधान और नवाचार की शुरुआत है।

डॉ. सौरभ की इस उपलब्धि पर जिलेभर में खुशी का माहौल है। सामाजिक संगठनों, शिक्षाविदों और युवाओं ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए इसे गरियाबंद जिले के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया है।

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