बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा गिरफ्तार की गई पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की डिप्टी सेक्रेटरी सौम्या चौरसिया ने अपनी गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए बिलासपुर हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर की है। इस याचिका पर बुधवार को हाईकोर्ट में सुनवाई होनी है।
शराब घोटाला मामला : ED की गिरफ्तारी को चुनौती देते

ED की कार्रवाई के बाद दूसरी बार जेल पहुंची सौम्या चौरसिया को विशेष PMLA कोर्ट ने 14 दिन की रिमांड पर भेजा है। इससे पहले भी उन्हें दो दिन की रिमांड पर लिया गया था। रिमांड अवधि समाप्त होने के बाद ED ने उन्हें दोबारा कोर्ट में पेश किया था।
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बताया गया है कि इससे पहले EOW द्वारा जारी प्रोडक्शन वारंट को लेकर 8 जनवरी को सुनवाई प्रस्तावित है। वहीं, शराब घोटाले से जुड़े मामलों में 13 जनवरी से ट्रायल की प्रक्रिया भी शुरू होने वाली है।
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की जांच ED द्वारा की जा रही है। ED ने इस मामले में ACB में FIR दर्ज कराई है, जिसमें करीब 3200 करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले का दावा किया गया है। जांच में सामने आया है कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में IAS अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी एपी त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के सिंडिकेट के जरिए इस घोटाले को अंजाम दिया गया।
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ED की जांच में कई राजनेताओं, आबकारी विभाग के अधिकारियों और कारोबारियों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज की गई है। आरोप है कि शराब सिंडिकेट के जरिए कोल लेवी की तर्ज पर अवैध वसूली की गई, जिससे राज्य के खजाने को भारी नुकसान हुआ।
सूत्रों के अनुसार, सौम्या चौरसिया की दूसरी बार गिरफ्तारी के बाद ब्यूरोक्रेट्स और राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि सुप्रीम कोर्ट से जमानत पर चल रहे अन्य आरोपी आबकारी अधिकारियों पर भी शिकंजा कस सकता है। ED ने इन अधिकारियों को अंतिम चार्जशीट में आरोपी बनाया है और जल्द पूछताछ के लिए समन जारी किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
ED ने चार्जशीट पेश करने से पहले बड़ी कार्रवाई करते हुए भाटिया वाइन, छत्तीसगढ़ डिस्टलरी, वेलकम डिस्टलरी सहित कई कंपनियों और 31 आबकारी अधिकारियों की चल-अचल संपत्तियां अटैच की हैं। अब तक इस मामले में 382 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति कुर्क की जा चुकी है।
ED के अनुसार जांच में यह सामने आया है कि सौम्या चौरसिया को करीब 115.5 करोड़ रुपये की अवैध आय (POC) प्राप्त हुई थी। डिजिटल रिकॉर्ड, जब्त दस्तावेज और व्हाट्सएप चैट्स से यह भी दावा किया गया है कि वे शराब सिंडिकेट की सक्रिय सदस्य थीं और अवैध धन के लेन-देन व मनी लॉन्ड्रिंग में उनकी अहम भूमिका रही।
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