छुरा (गंगा प्रकाश)। विकासखंड क्षेत्र के ग्राम पंचायत चरौदा, खुसरुपाली, भैंसामुड़ा, नयापारा कोसमी, दुल्ला सहित अन्य गांवों में मनरेगा बचाओ संग्राम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मजदूर, किसान और महिलाएं शामिल हुईं। ग्रामीणों ने मनरेगा कार्य बंद होने, पेयजल संकट और वन अधिकार पट्टाधारी किसानों की धान खरीदी नहीं होने जैसी गंभीर समस्याएं खुलकर सामने रखीं।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से महिला कांग्रेस जिला अध्यक्ष श्रीमती मंजू ध्रुव, ब्लॉक अध्यक्ष श्रीमती माहेश्वरी शाह, राजमहल से आए राजा यशपेंद्र शाह, जिला उपाध्यक्ष समद खान, ब्लॉक प्रभारी शुघरमल आड़े, सह प्रभारी कमल यदु, प्रशासनिक महामंत्री प्रहलाद यदु तथा मंडल अध्यक्ष चेतन ठाकुर उपस्थित रहे।
इसके अलावा कार्यक्रम को सफल बनाने में सक्रिय कांग्रेस कार्यकर्ता डागेश्वर ठाकुर, दिलीप, रूपसिंह, अशोक, अग्रेशन, अरुण, सविता, लताबाई, प्रमिला, गणेशराम, जगनुराय, सांगोपाल सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण कार्यकर्ताओं और पंचायत प्रतिनिधियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

भैंसामुड़ा में पानी की भीषण समस्या
ग्राम भैंसामुड़ा में महिलाओं ने जल संकट को लेकर गहरा आक्रोश व्यक्त किया। महिलाओं ने बताया कि जल जीवन मिशन के अंतर्गत पानी टंकी का निर्माण कराया गया, लेकिन आज तक वह अधूरी पड़ी है। पाइपलाइन विस्तार भी आधे घरों में ही हो पाया है। नल कनेक्शन होने के बावजूद घरों तक पानी नहीं पहुंच रहा।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें मजबूरी में हैंडपंप और बोरिंग से पानी भरना पड़ता है। गर्मी के मौसम में हालात और बदतर हो जाते हैं। कई बार दूर-दूर से पानी लाना पड़ता है, जिससे महिलाओं और बुजुर्गों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। ग्रामीणों ने मांग की कि जल जीवन मिशन के अधूरे कार्य को तत्काल पूर्ण कराया जाए।
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दो वर्षों से मनरेगा ठप, मजदूरों पर रोजी-रोटी का संकट
कार्यक्रम में मजदूरों ने बताया कि बीते लगभग दो वर्षों से कई गांवों में मनरेगा के तहत काम लगभग बंद है। न तो नए कार्य स्वीकृत हो रहे हैं और न ही मजदूरों को नियमित रोजगार मिल पा रहा है। इससे गरीब परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
महिला मजदूरों ने कहा कि मनरेगा बंद होने से उन्हें पलायन या कर्ज का सहारा लेना पड़ रहा है। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि सरकार ग्रामीण रोजगार की रीढ़ कही जाने वाली मनरेगा योजना को कमजोर कर रही है।

चरौदा में वन अधिकार पट्टाधारी किसानों का फूटा दर्द
ग्राम पंचायत चरौदा में आयोजित कार्यक्रम में किसानों की सबसे बड़ी चिंता वन अधिकार पट्टे की जमीन पर उपजे धान की सरकारी खरीदी नहीं होने को लेकर रही। मेन चरौदा में लगभग 85 किसान मौजूद रहे, जिन्होंने एक स्वर में कहा कि उनकी पूरी खेती वन अधिकार पट्टे पर आधारित है।
किसानों ने बताया कि वे सोसायटी से कर्ज लेकर खेती करते हैं। यदि धान की खरीदी नहीं होगी तो वे कर्ज कैसे चुकाएंगे। इससे किसान गहरे आर्थिक संकट में फंसते जा रहे हैं। किसानों ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार आने के बाद वन अधिकार पट्टाधारी किसानों के धान की खरीदी बंद कर दी गई है, जिससे आदिवासी और छोटे किसान सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।
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नेताओं ने सरकार पर साधा निशाना
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महिला कांग्रेस जिला अध्यक्ष श्रीमती मंजू ध्रुव ने कहा कि मनरेगा मजदूरों का अधिकार है, उसे कमजोर करना गरीबों के पेट पर लात मारने जैसा है। ब्लॉक अध्यक्ष श्रीमती माहेश्वरी शाह ने कहा कि जल जीवन मिशन और मनरेगा दोनों योजनाओं में भारी अनियमितता है, जिसका खामियाजा ग्रामीण भुगत रहे हैं।
जिला उपाध्यक्ष समद खान ने कहा कि वन अधिकार पट्टाधारी किसानों की धान खरीदी बंद करना आदिवासी समाज के साथ अन्याय है। वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
कार्यक्रम के अंत में ग्रामीणों ने एकजुट होकर मांग की कि अधूरी पानी टंकी और पाइपलाइन कार्य तत्काल पूरे कराए जाएं, मनरेगा के तहत रोजगार शुरू किया जाए और वन अधिकार पट्टाधारी किसानों की धान खरीदी तुरंत चालू की जाए। अन्यथा आने वाले दिनों में बड़े आंदोलन की चेतावनी दी गई।

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