CG: लखपति दीदी एमिन साहू की कहानी बनी मिसाल – रायपुर राष्ट्रीय कार्यशाला में गरियाबंद का मान बढ़ाया

 

रायपुर/गरियाबंद(गंगा प्रकाश)। लखपति दीदी एमिन साहु की कहानी – छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में शुक्रवार को जब राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) की तीन दिवसीय क्षेत्रीय कार्यशाला का अंतिम सत्र चल रहा था, तभी गरियाबंद जिले की लखपति दीदी एमिन साहू ने जैसे ही मंच पर माइक संभाला, पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा। उनके संघर्ष और सफलता की कहानी ने वहां उपस्थित हर अधिकारी, प्रतिनिधि और महिला समूहों की दीदियों को प्रेरित किया।

कार्यशाला का भव्य आयोजन

यह कार्यशाला ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित थी। शुभारंभ मंत्रालय के सचिव श्री शैलेष कुमार और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय के सचिव श्री एस. सी. एल. दास ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए किया। समापन दिवस पर राष्ट्रीय मिशन संचालक श्रीमती जयश्री जैन स्वयं उपस्थित रहीं। आयोजन में मध्यप्रदेश, ओडिशा, बिहार, झारखंड, राजस्थान, गुजरात, तेलंगाना, जम्मू कश्मीर, उत्तराखंड समेत देशभर से अधिकारी, विशेषज्ञ और लखपति दीदियां शामिल थीं।

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कहानी – मिट्टी से शिखर तक

गरियाबंद जिले के फिंगेश्वर विकासखंड के ग्राम तर्रा की रहने वाली एमिन साहू कभी केवल एक गृहिणी थीं। पति के साथ खेती-बाड़ी में हाथ बँटाती थीं, लेकिन आमदनी सीमित थी। जीवन में बदलाव तब आया जब वह बिहान समूह से जुड़ीं। उन्होंने समूह की बैठकों में अन्य दीदियों को आत्मनिर्भर बनते देखा। धीरे-धीरे उन्होंने भी बचत शुरू की और महिला लखपति पहल के तहत प्रशिक्षण प्राप्त किया।

एमिन दीदी ने छोटे से अचार बेचने के काम से शुरुआत की। आज वे आम, करौंदा, नींबू, कटहल, जीमीकांदा जैसे कई प्रकार के अचार, पापड़, बड़ी, फिनाइल, धूपबत्ती, अगरबत्ती तैयार कर रही हैं। उत्पादों की सुंदर पैकिंग कर वे ग्राम पंचायत बैठकों, समूह बैठकों, क्लस्टर बैठकों, मेलों, प्रदर्शनी स्टॉल, दुकानों, कैंटीन व बाजारों में बिक्री करती हैं।

30-40 हजार रुपये मासिक, सालाना 4 लाख की आय

आज उनकी मासिक आय 30-40 हजार रुपये हो चुकी है। सालाना उनकी आय 3 से 4 लाख रुपये के बीच पहुँच गई है। एमिन दीदी कहती हैं – “बिहान से जुड़ने के बाद ही मेरी जिंदगी बदली। कभी सोचा नहीं था कि घर के काम और खेत के अलावा मैं भी अपने दम पर कमा पाऊंगी। आज मुझे गर्व है कि मैंने अपने बच्चों और परिवार के लिए कुछ किया।”

राजिम में आउटलेट, दिल्ली-गुरुग्राम सरस मेला तक छत्तीसगढ़ी स्वाद

एमिन साहू ने अपने उत्पादों का आउटलेट राजिम में शुरू किया। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ी पारंपरिक व्यंजनों को भी बाजार तक पहुंचाने का बीड़ा उठाया। चीला, फरा, ठेठरी, खुर्मी, गुजिया, बड़ा जैसे छत्तीसगढ़ी व्यंजनों का स्टॉल लगाकर उन्होंने राज्य के स्वाद को पहचान दिलाई। बिहान के सहयोग से उन्हें भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक लाइसेंस भी मिला।

हाल ही में दिल्ली और गुरुग्राम में आयोजित सरस मेला में उन्हें छत्तीसगढ़ फूड स्टॉल लगाने का अवसर मिला। वहाँ 15 दिनों में उन्होंने 1 लाख 85 हजार रुपये का विक्रय किया। उनके साथ समूह की चार अन्य दीदियां – प्रेमीन गायकवाड़, खेमीन साहू, भूमिका साहू, केवरा साहू – भी फूड जोन में कार्य कर रही हैं। सरस मेला में छत्तीसगढ़ी व्यंजनों को जबरदस्त सराहना मिली।

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सम्मान और तालियों की गूंज

रायपुर कार्यशाला में जब मिशन संचालक श्रीमती जयश्री जैन ने मंच से एमिन साहू की तारीफ की, तब अन्य राज्यों के प्रतिनिधि भी उनके सम्मान में तालियाँ बजाते रहे। समापन समारोह में एमिन साहू को विशेष सम्मान दिया गया।

प्रेरणा बनी एमिन साहू

आज एमिन साहू केवल अपने परिवार की ही नहीं, बल्कि सैकड़ों महिलाओं की प्रेरणा हैं। उनके आत्मविश्वास से यह स्पष्ट होता है कि महिला समूहों के जरिये आत्मनिर्भरता की जो अलख बिहान ने जगाई है, उसका उजाला छत्तीसगढ़ के हर गांव-टोला तक पहुँच रहा है।

कार्यशाला में यह तय हुआ कि लखपति महिला पहल को और अधिक जिलों में तेजी से विस्तार दिया जाएगा ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो और हर महिला सशक्त बन सके।

 


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