जनदर्शन में गूँजी जनता की आवाज़ – कलेक्टर ने 79 समस्याओं पर दिए त्वरित कार्यवाही के निर्देश
गरियाबंद (गंगा प्रकाश)। जनदर्शन में गूँजी जनता की आवाज़ – जिले के आम लोगों की उम्मीदें लेकर आज फिर कलेक्टर बी. एस. उइके के दरबार में भीड़ उमड़ी। जनदर्शन में इस बार कुल 79 आवेदक पहुंचे, जिन्होंने अपनी छोटी-बड़ी, लेकिन बेहद महत्वपूर्ण समस्याएं कलेक्टर के सामने रखीं।

कलेक्टर उइके ने एक-एक आवेदन को गंभीरता से सुना और संबंधित विभागीय अधिकारियों को तुरंत और नियमानुसार कार्रवाई करने के सख्त निर्देश दिए। उन्होंने साफ कहा – “जनता की समस्या का समय पर समाधान प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है, इसमें कोई लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।”
गाँव-गाँव से आए मुद्दे, हर आवाज़ में था दर्द और उम्मीद
- ग्राम बोदल बाहरा के चैतराम नेताम ने अंतिम जाँच प्रतिवेदन दिलाने की गुहार लगाई।
- ग्राम मोहतरा के किशोर ध्रुव ने ऋण पुस्तिका बनाने की मांग की।
- ग्राम चरभट्ठी के महेश साहू ने भूमि का पट्टा देने की बात रखी।
- ग्राम कौंदकेरा की गंगाबाई ने भुगतान राशि दिलाने की मांग की।
- गरियाबंद की अनीता यादव ने उचित न्याय दिलाने की गुहार लगाई।
- गरियाबंद के हेमंत रामटेके ने गंदे पानी की निकासी की समस्या रखी।
- ग्राम देहारगुड़ा के सेलेश्वर कुमार ने नौकरी से बिना कारण हटाए जाने पर कार्रवाई की मांग की।
- ग्राम पंचायत गोबरा में सचिव को हटाने की शिकायत दर्ज कराई गई।
- ग्राम बासीन की मनीषा पुर्रे ने नामांतरण संबंधी समस्या रखी।
- ग्राम धवलपुरडीह के सागर गिरी ने भूमि का पट्टा देने का आवेदन दिया।
- ग्राम खलियापारा के बृजलाल ने सौर ऊर्जा बोरवेल की मांग रखी।
- ग्राम पतोरा की निर्मला मारकंडे ने भूमि अधिकार देने की बात कही।
- ग्राम चुरकी के भुनेश्वर ने तेंदूपत्ता संग्रहण राशि दिलाने की मांग की।
- नगर पंचायत कोपरा के मनहरण साहू ने प्रधानमंत्री आवास शहरी सूची में नाम जोड़ने की मांग की।
कलेक्टर के निर्देश – “फाइलों में नहीं अटके जनता के सपने”
बैठक के दौरान कलेक्टर उइके ने कहा कि हर आवेदन का समाधान तय समय-सीमा में होना चाहिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि “किसी भी तरह की समस्या लंबित न रखी जाए, और आवेदक को समाधान की स्थिति की जानकारी भी दी जाए।”
अधिकारियों की पूरी टीम रही मौजूद
इस मौके पर अपर कलेक्टर प्रकाश राजपूत, नवीन भगत, पंकज डाहिरे, जिले के सभी एसडीएम, जनपद सीईओ और अन्य अधिकारी मौजूद थे।
जनदर्शन में एक बार फिर यह साबित हुआ कि जब जनता की आवाज़ सीधे प्रशासन तक पहुँचती है, तो बदलाव की उम्मीद भी मजबूत होती है।