सरकारी भर्ती की पारदर्शिता पर सवाल, दस्तावेज मांगने वाले पत्रकार को नहीं मिली नियुक्ति संबंधी जानकारी

यदिनंद्रन नायर

रायपुर/बीजापुर (गंगा प्रकाश)। शासकीय पॉलीटेक्निक महाविद्यालय बीजापुर में एक कर्मचारी की नियुक्ति से जुड़े दस्तावेजों को लेकर शुरू हुआ सूचना के अधिकार (आरटीआई) का मामला अब एक बड़े विवाद का रूप लेता दिखाई दे रहा है। नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण अभिलेखों की मांग, सूचना देने में टालमटोल, सीमित जानकारी उपलब्ध कराने की पेशकश और अंततः प्रथम अपील को खारिज किए जाने के बाद पूरे मामले पर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

मामले की शुरुआत तब हुई जब हिंदी दैनिक समाचार पत्र गंगा प्रकाश से जुड़े पत्रकार यदिनंद्रन नागर ने सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत शासकीय पॉलीटेक्निक बीजापुर में कार्यरत कर्मचारी लक्ष्मण कुमार चंद्रा की नियुक्ति से संबंधित दस्तावेजों की मांग की। आवेदन में नियुक्ति आदेश, आवेदन पत्र, शैक्षणिक योग्यता प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, चयन सूची, चयन समिति की कार्यवाही और सेवा पुस्तिका के पृष्ठों की प्रमाणित प्रतियां मांगी गई थीं।

इतना ही नहीं, एक अन्य आरटीआई आवेदन में महाविद्यालय में कार्यरत सभी नियमित, संविदा, गेस्ट फैकल्टी और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की संख्या, नामावली तथा उनकी नियुक्ति प्रक्रिया से संबंधित अभिलेखों की जानकारी भी मांगी गई थी। जाहिर है कि यह मांग किसी व्यक्तिगत विवाद के बजाय सरकारी संस्थान में भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर थी।

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पहले कहा जानकारी उपलब्ध है, फिर बदला रुख

दस्तावेजों के अनुसार 4 मई 2026 को जनसूचना अधिकारी एवं प्राचार्य द्वारा आवेदक को पत्र जारी कर बताया गया कि भर्ती नियम 2005, विज्ञापन और चयन सूची सहित कुल 28 पृष्ठों की जानकारी उपलब्ध है। इसके लिए 56 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया था। इससे यह स्पष्ट हुआ कि विभाग के पास संबंधित अभिलेख उपलब्ध हैं।

लेकिन मामला तब उलझ गया जब नियुक्ति से जुड़े मूल दस्तावेजों की मांग पर गोपनीयता का हवाला सामने आ गया। बाद में प्रथम अपील की सुनवाई के दौरान यह तर्क दिया गया कि मांगी गई जानकारी तीसरे पक्ष से संबंधित व्यक्तिगत सूचना है और संबंधित कर्मचारी ने सूचना सार्वजनिक करने पर असहमति व्यक्त की है।

क्या सरकारी नियुक्ति भी निजी जानकारी है?

यहीं से विवाद गहराता है। सवाल उठ रहा है कि क्या किसी सरकारी संस्थान में हुई नियुक्ति से जुड़े दस्तावेज पूरी तरह निजी सूचना माने जा सकते हैं? सरकारी नौकरी सार्वजनिक धन से संचालित व्यवस्था का हिस्सा होती है। नियुक्ति प्रक्रिया में विज्ञापन, आवेदन, चयन और नियुक्ति जैसे चरण सार्वजनिक जवाबदेही से जुड़े होते हैं।
आरटीआई कार्यकर्ताओं का मानना है कि यदि नियुक्तियां पूरी तरह नियमों के अनुरूप हुई हैं तो दस्तावेज सार्वजनिक होने से किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। वहीं दूसरी ओर कानून व्यक्तिगत जानकारी और गोपनीय दस्तावेजों को भी संरक्षण देता है। इसी बिंदु पर पारदर्शिता और गोपनीयता के बीच टकराव दिखाई देता है।

प्रथम अपील भी हुई खारिज

तकनीकी शिक्षा संचालनालय, नया रायपुर में प्रथम अपील की सुनवाई हुई। अपीलीय अधिकारी ने उपलब्ध अभिलेखों का परीक्षण करने के बाद जनसूचना अधिकारी की कार्रवाई को नियमानुसार मानते हुए अपील का निराकरण कर दिया। आदेश में कहा गया कि तीसरे पक्ष की प्रक्रिया अपनाई गई और संबंधित व्यक्ति की असहमति के कारण सूचना नहीं दी जा सकती।

हालांकि आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि अपीलकर्ता संतुष्ट नहीं है तो वह 90 दिनों के भीतर राज्य सूचना आयोग में द्वितीय अपील दायर कर सकता है।

कई सवाल अभी भी अनुत्तरित

इस पूरे प्रकरण में कुछ प्रश्न लगातार चर्चा का विषय बने हुए हैं—

  • यदि भर्ती नियम, विज्ञापन और चयन सूची उपलब्ध कराई जा सकती है तो नियुक्ति से जुड़े अन्य दस्तावेज क्यों नहीं?
  • क्या सरकारी नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े सभी अभिलेख निजी सूचना की श्रेणी में आते हैं?
  • क्या व्यापक जनहित के पहलू पर पर्याप्त विचार किया गया?
  • क्या सूचना रोके जाने से पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न नहीं लगता?

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राज्य सूचना आयोग पर टिकी निगाहें

अब यह मामला राज्य सूचना आयोग तक पहुंचता है या नहीं, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं। यदि द्वितीय अपील दायर होती है तो आयोग को यह तय करना होगा कि सरकारी भर्ती से जुड़े दस्तावेजों में गोपनीयता की सीमा क्या है और जनहित का दायरा कितना व्यापक है।

फिलहाल बीजापुर से रायपुर तक पहुंचा यह मामला केवल एक आरटीआई विवाद नहीं रह गया है, बल्कि सरकारी नियुक्तियों में पारदर्शिता, जवाबदेही और सूचना के अधिकार की वास्तविक प्रभावशीलता की परीक्षा बन गया है। आने वाले दिनों में इस प्रकरण से जो तथ्य सामने आएंगे, वे न केवल संबंधित नियुक्ति बल्कि सरकारी संस्थानों में सूचना उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर भी महत्वपूर्ण असर डाल सकते हैं।

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