मरार पटेल समाज की परंपरा ने छेरछेरा पर्व को दिया नया रंग
कोपरा/गरियाबंद (गंगा प्रकाश)। आमतौर पर कलश में जल, नारियल और आम के पत्ते होते हैं, लेकिन गरियाबंद जिले के ग्राम तर्रा में इस बार कलशों में आस्था के साथ-साथ हरी-भरी सब्जियां भी सजीं। मौका था मरार पटेल समाज द्वारा आयोजित मां शाकंभरी जयंती और छेरछेरा पर्व का, जहां शुद्ध शाकाहारी सब्जियों से सजी कलश यात्रा ने हर किसी का ध्यान खींच लिया।
मूली, गोभी, भाटा (बैंगन), मिर्चा और टमाटर से सुसज्जित कलशों के साथ जब यात्रा गांव की गलियों से निकली तो पूरा माहौल भक्तिमय हो उठा। मां शाकंभरी के जयकारे, ढोल-नगाड़ों की गूंज और श्रद्धालुओं की भीड़ ने गांव को एक अलग ही रंग में रंग दिया। यह यात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बनी, बल्कि प्रकृति और अन्न के प्रति सम्मान का संदेश भी देती नजर आई।

आयोजन के दौरान मां शाकंभरी, दुर्गा जगदंबा शक्ति, शताक्षी, वनशंकरी (बनशंकरी) और आशापुरा माता की विधिवत पूजा-अर्चना की गई। समाजजनों का कहना है कि मां शाकंभरी को अन्न और सब्जियों की देवी माना जाता है, इसलिए यह आयोजन शुद्ध शाकाहार और पर्यावरण संरक्षण की भावना को जीवंत करता है।
छेरछेरा पर्व के साथ हुए इस आयोजन में सामाजिक समरसता और लोक परंपराओं की झलक साफ दिखाई दी। महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों की समान भागीदारी ने कार्यक्रम को खास बना दिया।

पूरे गांव में दिनभर उत्सव का माहौल रहा और यह आयोजन शांतिपूर्ण व अनुशासित ढंग से संपन्न हुआ, जिसे लोग लंबे समय तक याद रखेंगे।
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