गरियाबंद/फिंगेश्वर (गंगा प्रकाश)।  प्रजापिता ब्रहमाकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारसिवनी स्थित ऊॅ शांति भवन में एक दिवसीय स्वास्थ्य शिविर का आयोजन हुआ। जिसमें ब्रहमाकुमारीज के मुख्यालय माऊॅट आबू राजस्थान से डॉ. वेणुगोपाल का आगमन हुआ। इस आयोजन में ब्रहमाकुमारी उमा बहन जी (संचालिका ब्रहमाकुमारीज) बतौर अतिथि उपस्थित हुए द्वारा डॉ. वेणुगोपाल को स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया गया। ब्रहमाकुमारी उमा बहन ने आए हुए आगंतुक अतिथि व आयोजन में विभिन्न स्थानों से आए हुए लोगों का स्वागत किया। डॉ. वेणगोपाल का परिचय देते हुए ब्रहमाकुमारी उमा बहन ने बताया कि ब्रहमाकुमारीज द्वारा प्रसारित होने वाले चैनल पीस ऑफ माइंड में 2006 से आपके नियमित कार्यक्रम आयोजित हो रहा है जिसमें रूप मुख्य रूप से प्रेरणा कार्यक्रम है जिसमें समाज में अपने उल्लेखनीय कार्य कर अपने कार्यो से अन्य लोगों को प्रेरणा देते है उनका साक्षात्कार होता है। जिसका 500 एपिसोड बन चुका है जिसे ब्रहमाकुमारी प्रेरणा नाम से सर्च करके देखा जा सकता है। वे नेचुरोपैथी विशेषज्ञ भी है। सदा स्वस्थ कैसे रहें व आपका स्वास्थ्य आपकी मुटठी में है इस पर उन्होंने अनेकों स्थान पर व्याख्यान देकर हजारों लोगों को लाभान्वित किया है। इस अवसर पर उपस्थित जनों को डॉ. वेणुगोपाल ने अपने व्याख्यान में बताया कि आत्म इस शरीर के द्वारा सुख दुख का अनुभव करती है किन्तु शरीर स्वस्थ्य नहीं होगा तो जो सुख जीवन में प्राप्त करना चाहते है वह प्राप्त नहीं कर सकते है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य की शिक्षा बाल्यकाल से ही स्कूलों में होनी चाहिए जो ज्ञान हमें बचपन में प्राप्त करना चाहिए वह ज्ञान हमें बहुत देर के पश्चात मिलता है जिसके कारण हम जीवन का संपूर्ण आनंद नहीं ले पाते। हमें स्वास्थ्य क्या है अस्वस्थ्य क्या है इसका ज्ञान जरूरी है। हम दैनिक जीवन में क्या गलती कर रहे है उसे जानना जरूरी है। शरीर के साथ मन का स्वास्थ्य भी जरूरी है जितनी मानसिक अस्वस्थता होगी उतना शरीर में हानिकारक रसायन का स्त्राव होने लगता है और शरीर अस्वस्थ्य होगा। स्वस्थ व्यक्ति के भिन्न-भिन्न लक्षण उन्होंने बताया। उन्होंने कहा कि गहरी नींद एवं आसान शौच प्रक्रिया का ना होना सारी बीमारियों की जड़ है। उन्होंने बताया कि अच्छी भूख लगना-ऊंचाई के हिसाब से आपके शरीर का वजन होना चाहिए। चेहरा चमकदार होना चाहिए। आलस्य से मुक्त, दर्द रहित रोग के विषय में बोलते हुए उन्होंने कहा कि रोग क्या है ? उन्होंने कहा कि यह एक असमान्य स्थिति है अर्थात शरीर के आंतरिक उर्जा का प्रवाह में अवरोध। सभी बीमारियों का कारण आत्मा के शक्ति का शरीर के सभी अंगो में प्रवाह में रूकावट होना। उन्होंने कहा कि स्वस्थ्य रहने के लिए दो चीज करना है विरूद्ध आहार-शरीर को दूषित करने वाला आहार का गलत संयोजन, आहार की गलत मात्रा, आहार गलत समय पर प्रतिकुल ऋतु गर्मी के दिनों में पाचन तंत्र धीमा होता है इसलिए उस समय आम खाते है तो पाचन तंत्र ठीक रहता है ठंडी के दिनों में पाचन तंत्र तीव्र होता है इस समय प्रकृति हमें संतरा देती है जिसे खाने से हमारा पाचन तंत्र बैलेंस में रहता है। उन्होंने कहा कि एक शरीर को जन्म देने वाली मॉ है दूसरा प्रकृति मॉ है कभी भी कोई मॉ अपने बच्चों को गलत आहार नहीं देगी ठीक उसी प्रकार फल देता है जो हमें स्वस्थ रखें। कार्यक्रम में काफी संख्या में ऊॅ शांति के कार्यकर्ता, महिलाएं उपस्थित थे। जिनमें परमानंद यादव, रोशन साहू, लखन भाई, भुनेश्वर धु्रव, ईश्वर साहू, राजेन्द्र आदि शामिल थे।


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