फिंगेश्वर (गंगा प्रकाश)। केन्द्र की भाजपा सरकार इन दिनों नए नए मुद्दों को उठाकर छ.ग. विधानसभा चुनाव एवं 2024 के लोकसभा चुनाव के समय जनता का ध्यान देश की ज्वंलत समस्याओं से भटकाने में लगी है। फिंगेश्वर जनपद पंचायत की अध्यक्ष श्रीमती पुष्पा जगन्नाथ साहू ने कहा कि मोदी सरकार देश को कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों-अडानी घोटाला, जाति जनगणना और विशेष रूप से बढ़ती बेरोजगारी, बढ़ती असमानता और आर्थिक संकट आदि से भटकाने की कोशिश कर रही है। मोदी सरकार आंकड़ों को चाहे कितना भी छिपा ले हकीकत यह है कि बड़ी संख्या में लोग परेशान है। ये पिछले सप्ताह रिपोर्ट किए गए कुछ तथ्य है जिन्हें दबा दिया गया है। उन्होंने कहा कि आवश्यक वस्तुओं की कीमतें तेजी से बढ़ रही है। इसका सबसे ज्यादा असर आम परिवारों के घरेलू बजट पर पड़ रहा है। टमाटर की कीमतों में अनियंत्रित उछाल को सबने देखा। जनवरी 2023 से तुअर दाल की कीमतें 45 प्रतिशत बढ़ गई है। कुल मिलाकर दालों का मुद्रास्फीति 13.4 प्रतिशत तक पहुंच गया है। अगस्त से आटे की कीमतें 20 प्रतिशत बेसन की कीमतें 21 प्रतिशत गुड़ की कीमतें 11.5 प्रतिशत और चीनी की कीमतें 5 प्रतिशत बढ़ी है। आवश्यक घरेलू क्षेत्र में अनियंत्रित महंगाई अर्थव्यवस्था को मैनेज करने में मोदी सरकार की अक्षमता को दर्शाती है। जनपद अध्यक्ष श्रीमती पुष्पा साहू ने कहा कि सितंबर 2023 का आरबीआई का नवीनतम बुलेटिन, कोविड 19 महामारी से उबरने में मोदी सरकार की पूरी तरह से विफलता को दर्शाता है। फरवरी 2020 में 43 प्रतिशत लोग लेबर फोर्स में थे। 3.5 से अधिक वर्षो के बाद, यह भागीदारी दर 40 प्रतिशत के आसपास बनी हुई है। उन्होंने बताया कि अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय की एक रिर्पोट से पता चलता है कि 25 वर्ष से कम आयु के 42 प्रतिशत से अधिक ग्रेजुएट 2021-22 से बेरोजगार है। यह गंभीर चिंता का विषय है। महामारी से पहले 2022 में भी महिलाओं को उनकी वास्तविक आय का केवल 85 प्रतिशत ही मिल पा रहा था। हम यह भी जानते है कि महामारी की शुरूआत से पहले ही भारत में बेरोजगारी 45 वर्षो में सबसे अधिक थी। यह एक ऐसा ऑकड़ा था जिसे मोदी सरकार ने बहुत छिपाने की कोशिश की थी। मोदी सरकार की पूंजिपतियों को फायदा पहुंचाने वाली नीतियों ने आर्थिक लाभ को कुछ चुने हुई कंपनियों तक केन्द्रित कर दिया है। इस वजह से प्रतिस्पर्धा करना लगभग असंभव हो गया है। मार्सेलस की एक रिर्पोट में सामने आया कि 2022 में कुल मुनाफे का 80 प्रतिशत सिर्फ 20 कंपनियों के पास गया। इसके विपरीत छोटे व्यवसाय की बाजार हिस्सेदारी भारत के इतिहास में सबसे निचले स्तर पर थी। 2014 से पहले छोटे व्यवसाय की बिक्री कुल बिक्री का लगभग 7 प्रतिशत थी लेकिन 2023 की पहली तिमाही में यह गिरकर 4 प्रतिशत से भी कम हो गई। यह सब आंकड़े दर्शाती है कि मोदी सरकार इन गंभीर समस्याओं से जानबुझकर नजर अंदाज कर रही है।


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