Cgnews: गरियाबंद पुलिस का बड़ा कदम: “मुसाफिर डेटाबेस” बनेगा सुरक्षा कवच, अब अजनबी नहीं रहेंगे बेनकाब!

 

राजिम/गरियाबंद (गंगा प्रकाश)। अपराध पर लगाम कसने और जनता की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए गरियाबंद पुलिस ने एक क्रांतिकारी पहल की शुरुआत की है। जिले के एसपी निखिल राखेचा के सख्त दिशा-निर्देश पर राजिम थाना परिसर में आज एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें “मुसाफिर (अजनबी रोल) डेटाबेस” तैयार करने के महत्वपूर्ण निर्णय पर अमल किया गया।

बैठक में एसडीओपी गरियाबंद निशा सिन्हा, थाना प्रभारी राजिम निरीक्षक अमृत लाल साहू समेत नगर पंचायत राजिम के समस्त जनप्रतिनिधि, वार्ड पार्षद और प्रशासनिक अधिकारी शामिल हुए।

क्या है ‘मुसाफिर डेटाबेस’ योजना?

यह योजना थाना स्तर पर CCTNS (Crime and Criminal Tracking Network & Systems) के माध्यम से हर बाहरी व्यक्ति की पहचान दर्ज करने की व्यवस्था है। अब कोई भी अनजान मुसाफिर यदि आपके वार्ड, मोहल्ले या गली में ठहरेगा, तो उसकी पूरी जानकारी — नाम, पता, फोटो, आईडी प्रमाण — थाने में दर्ज की जाएगी।

इस कदम का उद्देश्य स्पष्ट है:

“शक की कोई गुंजाइश नहीं, हर अजनबी पर रहेगी पुलिस की नजर!”

बैठक में क्या हुआ खास?

जनप्रतिनिधियों को मिला जिम्मा:

  • सभी वार्ड पार्षदों को निर्देशित किया गया कि वे अपने क्षेत्र में आने वाले किसी भी अनजान व्यक्ति की जानकारी थाने में देना सुनिश्चित करें।

सामाजिक भागीदारी की मिसाल:

  • जनप्रतिनिधियों ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए पुलिस को हरसंभव सहयोग देने का वादा किया। वार्डों में जागरूकता अभियान चलाकर नागरिकों को भी इस योजना में सहभागी बनाने का निर्णय लिया गया।

अपराध नियंत्रण में मिलेगी बढ़त:

  • थाना प्रभारी अमृत लाल साहू ने बताया कि मुसाफिरों का रिकॉर्ड रखने से क्षेत्र में होने वाली आपराधिक गतिविधियों पर नजर रखना आसान होगा।

“अब कोई भी संदिग्ध व्यक्ति बगैर पहचान के राजिम में कदम नहीं रख पाएगा।”

भविष्य में क्या होगा फायदा?

  • अपराधियों की पहचान और निगरानी में आसानी
  • संदिग्ध गतिविधियों की त्वरित सूचना
  • महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों की सुरक्षा में बढ़ोत्तरी
  • घटना घटने की स्थिति में त्वरित कार्रवाई की क्षमता

पुलिस की अपील – जनता बने सहयोगी

गरियाबंद पुलिस ने जनता से भी आह्वान किया है कि यदि किसी के क्षेत्र में नया या अजनबी व्यक्ति ठहरे, तो उसकी सूचना तुरंत थाना राजिम में दें। यह पहल तभी सफल होगी जब जनता और पुलिस मिलकर काम करें।

“मुसाफिर डेटाबेस” — सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि अपराधमुक्त समाज की ओर बढ़ता एक सशक्त कदम है। गरियाबंद पुलिस ने यह साबित कर दिया कि अब कोई भी अजनबी बिना पहचान के नहीं घूम सकेगा।

 


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